- शासन ने दिया संबद्ध/अस्थाई ड्यूटी पर लगे जेल कार्मिको को हटाने का आदेश।
- निजी आवास और कार्यालय पर लगे दर्जनों कार्मिकों को हटाएंगे एआईजी जेल!
- जेलों पर अटैच एवं संबद्ध कर्मियों को अभी तक नहीं भेजा मूल तैनाती स्थल।
- बड़ी संख्या में अभी भी कर्मी जेलों और महानिरीक्षक कार्यालयों से संबद्ध।

लखनऊ। प्रदेश भर की प्रशासनिक व्यवस्था संभाल रहे अपर महानिरीक्षक कारागार के लिए शासन का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। एआईजी कारागार प्रशासन के शासन के सिर्फ उन्हीं आदेशों का अनुपालन हो पाता है। जिसमें वसूली की उम्मीद रहती है। हाल ही में शासन के निर्देश पर मुख्यालय की ओर से एक पत्र जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से निर्देश किया गया है कि जेल प्रशिक्षक संस्थान (जेटीएस), प्रदेश की जेलों और उप महानिरीक्षक परिक्षेत्र कार्यालयों में अटैच एवं संबद्ध सभी जेलकर्मियों को तत्काल मूल तैनाती स्थल पर वापस किया जाएगा। शासन का यह आदेश एआईजी प्रशासन ने इस पर अनुपालन कराए जाने के बजाए फाइलों में कैद करके रख दिया है।
बीती 4 जून 2026 को शासन के निर्देश पर कारागार मुख्यालय की ओर से डीआईजी प्रशिक्षण संस्थान, प्रदेश के समस्त परिक्षेत्र डीआईजी, समस्त जेलों के वरिष्ठ अधीक्षक, अधीक्षक/प्रभारी अधीक्षकों को एक पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में यदि किसी कारागार/परिक्षेत्र कार्यालय पर किसी संवर्ग कोई कर्मी विशेष ड्यूटी पर तैनात या संबद्ध किया गया है तो उसे तत्काल प्रभार से निरस्त करते हुए उसको मूल तैनाती स्थल पर वापस किया जाए। इसके साथ ही निर्देश दिया गया है कि भविष्य मेंबकिसी भी संवर्ग के कार्मिक को उसके मूल तैनाती के स्थान से इतर किसी अन्य संस्थान पर संबद्ध/विशेष ड्यूटी भी न सक्षम स्तर के शासकीय अनुमति/ अनुमोदन के न लगाया जाय। इसमें हीलाहवाली करने और उत्तरदायित्वों निष्ठापूर्वक निर्वहन नहीं करने वाले सक्षम अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि शासन का यह आदेश एआईजी प्रशासन की मोटी वसूली का जरिया बन गया है। एआईजी हटाने और ड्यूटी लगाने के लिए जेलकर्मियों से मोटी रकम वसूल करने की जुगत में लग गए है। सूत्रों की माने तो जेल प्रशिक्षक संस्थान और लखनऊ परिक्षेत्र कार्यालय में समय में करीब एक दर्जन से अधिक कर्मी डीआईजी कैंप कार्यालय से संबद्ध या फिर विशेष ड्यूटी पर लगे है। इसमें कई तो 20 से 25 साल से एक ही जगह पर जमे है। यह तो बानगी है इसी प्रकार समस्त परिक्षेत्रों में डीआईजी ने आधा दर्जन से अधिक कर्मियों को अपनी सुरक्षा के नाम पर लगा रखा है।
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आगरा परिक्षेत्र इसका जीता जागता उदाहरण है। इस परिक्षेत्र में तो परिजनों को सरकारी वाहन से ले जाने लाने के लिए दो दो सिपाही लगा रखे गए है। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल अधीक्षक ने तो सरकारी नौकरी कर रही पत्नी को ऑफिस से लाने ले जाने के लिए सिपाही लगा रखे है। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे इन कर्मियों को हटाना एआईजी प्रशासन के बस में ही नहीं है। क्योंकि आधा दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मियों की उन्होंने अपने वृंदावन स्थित निजी आवास और अपने साथ लगा रखा है। उधर इस संबंध में काफी प्रयासों के बाद भी एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात भी हो पाई।
गाजियाबाद नहीं तो क्या अलीगढ़ पहुंच गए विकास कटियार
कारागार विभाग में संबद्धता/अस्थाई ड्यूटी हटाए जाने का आदेश पहली बार नहीं हुआ। इससे पूर्व में हुआ। इसमें अस्थाई ड्यूटी करने वाले जेलर को मोटी रकम लेकर तोहफे में कमाऊ से और अधिक कमाऊ जेल पर तैनात कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण सत्र से पूर्व शासन की ओर से प्रदेश के समस्त जेलों पर संबद्ध/अस्थाई ड्यूटी कर रहे अधिकारियों को मूल तैनाती स्थल पर वापस किए जाने का आदेश किया। इस आदेश पर भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। आज भी कई जेलर जेल नहीं होने की बात कहकर अस्थाई ड्यूटी पर लगा रखे गए है।
एक रोचक मामला यह प्रकाश में आया है कि पिछले स्थानांतरण सत्र में आजमगढ़ से गाजियाबाद स्थानांतरित किए गए जेलर विकास कटियार को पहले बागपत और फिर बागपत से अस्थाई ड्यूटी पर फिरोजाबाद जेल पर लगा दिया गया। अभी एक साल ही हुआ था कि उन्हें इस बार बागपत से अलीगढ़ जेल पर तैनात कर दिया गया। यह तबादला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि एआईजी की वसूली के आगे विभाग में स्थानांतरण नीति का भी कोई मायने नहीं है। यह इसका जीता जागता उदाहरण है। यही नहीं अस्थाई ड्यूटी पर लगाए गए कई कर्मियों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें वहीं समायोजित तक कर दिया गया है।



