
मुख्यमंत्री ने नगर निगम, लखनऊ की 413 करोड़ रु0 लागत की 342 जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। नगर निगम, लखनऊ अपने कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से नगरीय जीवन को और अधिक सुगम, सुरक्षित तथा सुव्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ा। नगरीय निकायों में जितनी अच्छी सुविधाएं हांगी, उतनी ही तेजी से राज्य 01 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। 100 साल बाद नगर निगम, लखनऊ के अपने भव्य भवन के निर्माण की शुरूआत। नगर निगम, लखनऊ नागरिक सुविधाओं तथा सुरक्षा का बेहतर वातावरण बनाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। प्रदेश के नगर निगमों ने विगत 03 वर्षों में विकास व स्वच्छता के प्रतिमान स्थापित किए, स्वच्छता रैंकिंग में लखनऊ नगर निगम को देश में तीसरा स्थान प्राप्त होना बड़ी उपलब्धि है। स्वच्छता केवल नगर निगम के महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक जवाबदेही का आधार जब सरकार की कार्य पद्धति साफ-सुथरी होती, तो सकारात्मक परिणाम है। सामने आते, समन्वित प्रयासों के कारण लखनऊ स्वच्छ दिखाई दे रहा है। नगर निगम लखनऊ ने विगत 03 वर्षों में लम्बी दूरी तय की, प्रदेश ने विगत 09 वर्षों में लम्बी छलांग लगायी, प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में देश ने नए प्रतिमान स्थापित किए। प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम कार्यालय एक प्लेटफॉर्म नगर निगम, लखनऊ में मॉडल गौशाला बनायी जा रही, जिसमें गौ सेवा के साथ-साथ सी0एन0जी0 का निर्माण, कम्पोस्ट, नेचुरल फॉर्मिंग और ‘वेस्ट को वेल्थ’ में बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा। स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत कार्यांर् को तेजी से बढ़ाया जा रहा, सी0एम0 ग्रिड योजना के अन्तर्गत बनने वाली सड़कें देश के सामने मॉडल प्रस्तुत करेंगी। वर्तमान में ऊर्जा संकट एक वैश्विक संकट, भारत में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में कीमतों को लगातार नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेशवासियों से आवश्यकतानुसार बिजली उपयोग करने की अपील नगर निकायों तथा पंचायतों का दायित्व कि वह आवश्यकतानुसार नागरिकों के हित में बिजली की बचत करेंहै।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नगर निगम, लखनऊ अपने कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से नगरीय जीवन को और अधिक सुगम, सुरक्षित तथा सुव्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ा है। नगरीय निकायों में जितनी अच्छी सुविधाएं हांगी, उतनी ही तेजी से राज्य 01 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हम आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर तथा विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे। इन्हीं संकल्पों को प्राप्त करने की दिशा में नगर निगम, लखनऊ नागरिक सुविधाओं तथा सुरक्षा का बेहतर वातावरण बनाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग को और बेहतर बनाने की दिशा में निरन्तर कार्यरत है।
आज यहां नगर निगम, लखनऊ की 413 करोड़ रुपये लागत की 342 जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने ‘हमारे सपनों का लखनऊ, स्वच्छ-सुन्दर-समर्थ लखनऊ’ पुस्तिका का विमोचन किया। इससे पूर्व, उन्हांने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर नगर निगम, लखनऊ की विगत 03 वर्षां की विकास यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी। लखनऊ समेत सभी 17 नगर निगमों, 200 नगर पालिका परिषदों और 545 नगर पंचायतों का तीन वर्ष का कार्यकाल आज पूरा हो रहा है। सफल कार्यकाल के लिए सभी नगर निकायों के महापौर, चेयरमैन तथा लगभग 14,000 पार्षद बधाई के पात्र हैं। प्रदेश के नगर निगमों ने विगत 03 वर्षों में विकास व स्वच्छता के प्रतिमान स्थापित किए हैं। स्वच्छता रैंकिंग में लखनऊ नगर निगम को देश में तीसरा स्थान प्राप्त होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अब इसे नम्बर एक पर लाना है।
स्वच्छता केवल नगर निगम के महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक जवाबदेही का भी आधार है। नागरिक घर का कूड़ा कूड़ेदान में ही फेंकें तथा गीले कचरे और सूखे कचरे को सेग्रिगेट करें। प्लास्टिक का उपयोग न करें और नालियों में कूड़ा न फेंकें। सरकारी सम्पत्ति को नुकसान न पहुँचाएं। विकास के लिए लगने वाला पैसा जनता-जनार्दन का है और सरकार उसका उचित नियोजन कर रही है। आज जिस स्थान पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल बनाया गया है, वहाँ तीन दशकों से कूड़ा डम्प होता था। राष्ट्र प्रेरणा स्थल आज एक बेहतरीन केन्द्र बन चुका है। डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं0 दीनदयाल उपाध्याय व श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमाएं राष्ट्र प्रेरणा स्थल में स्थापित की गई है। यहाँ बड़ी रैली हो सकती है। यहाँ एक बड़ा मंच और म्यूजियम बना हुआ है। डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता के लिए ‘एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे’ का उद्घोष किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत ने उस लक्ष्य को प्राप्त भी किया है।
वर्तमान सरकार ने नगरीय क्षेत्र के 17 लाख से अधिक गरीबों को एक-एक आवास उपलब्ध कराया है। प्रदेश में अब तक 65 लाख गरीबों को एक-एक आवास जाति, क्षेत्र, मत व मजहब के भेदभाव के बिना उपलब्ध कराया गया है। प्रधानमंत्री जी का मानना है कि देश में केवल चार जातियाँ-गरीब, किसान, महिला और युवा हैं। इन्हें ध्यान में रखकर सरकार ने अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। गरीब को शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाना पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का विजन था। उन्होंने 1960 के दशक में कहा था कि देश की योजनाओं का आधार ऊँचे पायदान पर बैठे व्यक्ति का आर्थिक उन्नयन नहीं, बल्कि अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की प्रगति होना चाहिए। सरकार का उद्देश्य विकास के मार्ग पर पीछे छूटे व्यक्ति को सहारा देकर आगे बढ़ाना है। इसी क्रम में आवास, शौचालय, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मुफ्त बिजली कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराकर डबल इंजन सरकार ने पं0 दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी भारतीय राजनीति का एक ऐसा चेहरा थे, जिन्होंने 06 दशक तक भारतीय राजनीति को प्रभावित किया। वह निर्विवाद, निश्छल और पूरे देश को अपने साथ लेकर चलने की सामर्थ्य रखते थे। लखनऊ श्रद्धेय अटल जी के अंतःकरण में बसता था। इसीलिए अटल जी के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी भव्य प्रतिमा राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर स्थापित की गई है। आज लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर, मेट्रो सहित वह सब कुछ है, जो यहाँ की आवश्यकता थी। प्रधानमंत्री जी के लिए पूरा देश ही परिवार है और हमारी सरकार के लिए उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ की आबादी ही परिवार है। इसी प्रकार नगर निगम, लखनऊ के लिए पूरा नगर निगम ही उसका परिवार है। इसलिए बिना भेदभाव शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी को मिल रहा है। यहां हुए अच्छे कार्यों की लोग सराहना करते हैं।

आज लखनऊ प्रदेश का सबसे बड़ा महानगर तथा सबसे बड़ा नगर निगम बन गया है। स्वाभाविक रूप से क्षेत्र जितना बड़ा होगा, चुनौतियाँ भी उतनी ही बड़ी होंगी। लखनऊ मजबूती के साथ उन चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रदेश भी अपने सामने आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना कर रहा है। जनता का पैसा जनता के लिए और जनता के हित में खर्च हो, यही प्रधानमंत्री जी का विज़न है।प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आज लखनऊ में विकास दिखायी देता है। जब कोई लखनऊ आता है, तो कहता है कि लखनऊ बहुत साफ-सुथरा है। जब सरकार की कार्य पद्धति साफ-सुथरी होती है, तो उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आते हैं। नगर निगम ने पूरे लखनऊ को अपना परिवार माना और सम्पूर्ण कार्यकारिणी व जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रयास किया। महापौर, पार्षदगण, अधिकारीगण, सुपरवाइजर व सफाई कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों के कारण लखनऊ लोगों को स्वच्छ दिखायी देता है।
नगर निगम लखनऊ ने विगत 03 वर्षों में एक लम्बी दूरी तय की है। प्रदेश ने भी पिछले 09 वर्षों में लम्बी छलांग लगायी है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में देश में विगत 12 वर्षों में मजबूती के साथ नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। आज हमारे नगरों ने स्वयं को ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ की दृष्टि से स्वच्छ, सुन्दर और सुरक्षित नगर के रूप में स्थापित किया है। वर्ष 2017 के पूर्व लखनऊ नगर निगम के बॉण्ड की कीमत 25 करोड़ रुपये भी नहीं थी, जबकि विगत वर्ष नगर निगम ने 200 करोड़ रुपये से अधिक के बॉण्ड जारी किए हैं। नगर निगम की परियोजनाएं तेजी के साथ आगे बढ़ी हैं। लखनऊ नगर निगम ने अलग-अलग फील्ड में नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। इन परियोजनाओं को धरातल पर महसूस किया जा सकता है।
प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम कार्यालय एक प्लेटफॉर्म है। 100 साल बाद नगर निगम, लखनऊ के अपने भव्य भवन के निर्माण की शुरूआत हो गयी है। यहां एक मॉडल गौशाला बनायी जा रही है। इसमें गौ सेवा के साथ-साथ सी0एन0जी0 का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, कम्पोस्ट बनेगा, नेचुरल फॉर्मिंग होगी और ‘वेस्ट को वेल्थ’ में बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा। नगर निगम का इण्टीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेण्टर बेहतरीन तरीके से कार्य कर रहा है। इसका उपयोग हमने कोविड कालखण्ड में किया था। यह नागरिकों को बेहतरीन सुविधा प्रदान करने, ट्रैफिक मैनेजमेण्ट, स्वच्छता और डेवलपमेण्ट एक्टिविटीज देखने के लिए बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है।स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत कार्यांर् को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सी0एम0 ग्रिड योजना के तहत बनने वाली सड़कें आने वाले समय में देश के सामने मॉडल प्रस्तुत करेंगी। स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप जो सड़कें बन रही हैं, उनमें यूटिलिटी डक्ट भी बनाये जा रहे हैं, ताकि पाइप लाइन, केबल के लिए बार-बार सड़क न खोदनी पड़े। इनमें पार्किंग के लिए स्पेस दिया जा रहा है। फुटपाथ तथा स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था की जा रही है।
अच्छी जल निकासी न होने के कारण पहले नगर निकाय एक घण्टे की बारिश में जल प्लावित हो जाते थे। अब स्टॉर्म वॉटर की समस्या का समाधान करने के लिए नगर निगम और नगर विकास विभाग ने बेहतरीन योजना बनाई है। नगरीय क्षेत्रों में अच्छे कन्वेंशन सेण्टर बनाए जा रहे हैं। आवास विभाग के माध्यम से लखनऊ में 10,000 लोगों की क्षमता के एक कन्वेंशन सेण्टर के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसका टेण्डर भी हो चुका है। वर्तमान में ऊर्जा संकट एक वैश्विक संकट बन चुका है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ईंधन सप्लाई प्रभावित हुई है। दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जिस अमेरिका के पास अपनी ऊर्जा के स्रोत हैं, वहां पेट्रोलियम पदार्थों के दाम दोगुने से अधिक हुए हैं तथा महंगाई चरम पर है। भारत में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में कीमतों को लगातार नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। स्वाभाविक रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम दुनिया में बढ़ेंगे तथा सप्लाई चेन बाधित होगी, तो उसका असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि हमारी 90 प्रतिशत से अधिक आवश्यकता उस कच्चे तेल पर निर्भर है, जो दुनिया के अन्य देशों से आता है। ऐसे समय में सभी को देश के साथ खड़ा होना चाहिए। देश से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत कुछ दिनों में प्रदेश में बिजली संकट है। गर्मी अचानक बढ़ने के कारण विभिन्न थर्मल पावर प्लाण्ट ने अचानक शट डाउन ले लिया, जिससे उत्पादन में कमी आयी। वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश में पीक आवर की सप्लाई 15-16 हजार मेगावॉट होती थी, जो आज बढ़कर 32-33 हजार मेगावॉट पहुंच गई है। उस समय प्रदेश में कुल 06 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता था। आज पॉवर कॉरपोरेशन के मार्गदर्शन में 13 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन लगभग 10 हजार मेगावॉट तक बढ़ा है। देश की समस्या किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सभी की समस्या है। हमारा दायित्व बनता है कि ऊर्जा संकट के इस दौर में किसी के बहकावे में न आएं और न ही अफवाह फैलने दें।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जितनी बिजली की आवश्यकता हो, उतना ही उपयोग करें। घर में अनावश्यक रूप से ए0सी0, पंखा तथा लाइटें न जलाएं। डेकोरेशन के लिए लगी लाइटें बन्द कर दें। नगर निकायों तथा पंचायतों का दायित्व है कि वह आवश्यकतानुसार नागरिकों के हित में बिजली की बचत करें। यदि सभी नागरिक अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे, तो उत्पन्न चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगे। पूर्ववर्ती सरकार के समय प्रदेश के जनपदों में बिजली कभी दिन में, तो कभी रात्रि में आती थी। किन्तु आज सुचारू रूप से बिजली दी जा रही है। विद्युत आपूर्ति के लिए विभाग भी पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। प्रदेश में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह संकट के इस समय में पावर कॉरपोरेशन के साथ खड़े होकर उनका सहयोग करें। यह हमारा नागरिक दायित्व भी है। डबल इंजन सरकार प्रत्येक समस्या का समाधान निकालती है। इस दिशा में नगर निकाय भी मजबूती के साथ कार्य कर रहे हैं।
डबल इंजन सरकार ने गरीबों को 65 लाख मकान, लगभग पौने तीन करोड़ शौचालय, 16 करोड़ गरीबों को निःशुल्क राशन तथा ‘आयुष्मान भारत योजना’ का लाभ उपलब्ध कराया है। प्रदेश सरकार ने 09 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी तथा 03 करोड़ नागरिकों को एम0एस0एम0ई0 यूनिट में समायोजित करके स्वावलम्बन की दिशा में अग्रसर किया है। हमारी सरकार इसलिए सफल हैं, क्योंकि सरकार ने बिना भेदभाव सभी के हितों के लिए कार्य किया। प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। जिस उत्तर प्रदेश के समक्ष पहले पहचान का संकट था, वहां के युवाओं का आज प्रत्येक जगह सम्मान होता है। ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 06 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। जब तक उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग रिजर्वेशन की प्रक्रिया को पूर्ण करता है, तब तक वह अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाएं।
























