
मुख्यमंत्री ने विभिन्न बोर्डों की वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षाओं के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। विभिन्न बोर्डां के 1,682 मेधावी विद्यार्थी सम्मानित किये जा रहे, इनमें प्रदेश स्तर पर प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले 223 तथा जनपद स्तर पर टॉप-10 स्थान प्राप्त करने वाले 1,459 विद्यार्थी सम्मिलित। यदि विद्यार्थी जीवन के किसी भी क्षेत्र में शुद्ध नीयत के साथ अनवरत परिश्रम करेंगे, तो उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने से कोई ताकत रोक नहीं सकती। जीवन एक विस्तृत क्षेत्र, आप सभी विद्यार्थी अच्छे प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, इंजीनियर, आर्मीं ऑफिसर तथा समाजसेवी बन सकते। सार्थक दिशा मे किये जाने वाले परिश्रम का परिणाम हमेशा सुखद होता, यदि माता-पिता अपने बच्चां का सही मार्गदर्शन करें, तो उनका भविष्य उज्ज्वल तथा सपने साकार होंगे। हमारे देश में ज्ञान की एक समृद्ध परम्परा, हमने विद्या को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विस्तृत माना। विगत 09 वर्षों में प्रदेश में नकल विहीन परीक्षाएं करायी गयीं, आज प्रदेश में लगभग 56 लाख छात्र-छात्राएं मध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में सम्मिलित होते।
परीक्षाएं छात्र-छात्राओं को परेशान करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, परीक्षा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करने वाली होनी चाहिए। प्रोजेक्ट अलंकार के अन्तर्गत प्रदेश में 1,500 करोड़ रु0 से अधिक धनराशि विद्यालयों के पुनरूद्धार के लिए उपलब्ध करायी गयी। आज विद्यालयों में अच्छे क्लास रूम, टॉयलेट और पेयजल की उत्तम व्यवस्था। जनपद स्तर के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को मंत्रिगण, सांसदों, विधायकों व शासन से जुड़े अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया जा रहा। सफलता का मार्ग शॉर्टकट से नहीं, बल्कि परिश्रम से निकलता, जीवन में परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं होता। छात्र-छात्राएं डिजिटल लाइब्रेरी से जुड़ें, समाचार पत्रों का अध्ययन जरूर करें, सोशल मीडिया में न्यूनतम समय दें। छात्र-छात्राएं ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग करें, जीवन का कुछ समय शारीरिक स्वास्थ्य के लिए निकालें, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य जीवन के सभी आयामों व लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक।
लखनऊ। आज यहां लोक भवन में आयोजित ‘मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह’ के अवसर पर विभिन्न बोर्डों की वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षाओं के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के उपरान्त अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने राज्य स्तरीय मेधावी छात्र-छात्राओं को 01 लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक, टैबलेट, साफा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तथा उनके अभिभावकों व विद्यालय के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जीवन एक विस्तृत क्षेत्र है। आप सभी विद्यार्थी अच्छे प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, इंजीनियर, आर्मी ऑफिसर तथा समाजसेवी बन सकते हैं। यदि आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में शुद्ध नीयत के साथ अनवरत रूप से परिश्रम करेंगे, तो आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने से कोई ताकत रोक नहीं सकती। यह सीखने की सबसे अच्छी उम्र है। अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सार्थक प्रयास प्रारम्भ कर दें। इसके लिए औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। जिस फील्ड में आप जाएं, पूरी जानकारी प्राप्त करें।
आज प्रदेश भर में एक साथ 1,682 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जा रहा हैं। इसके अन्तर्गत लखनऊ में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, काउंसिल फॉर दि इण्डियन स्कूल सर्टिफिकेट्स इक्जामिनेशंस, नई दिल्ली, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली की बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश स्तर पर प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले 223 विद्यार्थी, उनके अभिभावक, विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा जनपद स्तर पर टॉप-10 स्थान प्राप्त करने वाले 1,459 विद्यार्थी सम्मिलित है। यह छात्र-छात्राओं के लिये एक उपलब्धि और आगे बढ़ने के लिये जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्थक दिशा मे किये जाने वाले परिश्रम का परिणाम हमेशा सुखद होता है। 223 मेधावियों में छात्रों की संख्या 85 और छात्राओं की संख्या 138 है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद में प्रदेश स्तर पर हाईस्कूल में प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले 115 मेधावियों में 34 छात्र और 81 छात्राएं हैं। इण्टरमीडिएट परीक्षा में प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले मेधावियों में 09 छात्र और 14 छात्राएं हैं। दोनों को मिलाकर माध्यमिक शिक्षा परिषद में प्रदेश स्तर पर छात्रों की संख्या 43 तथा छात्राओं की 95 है। यह संख्या बताती है कि छात्राएं अधिक मेहनत कर अधिक अंक प्राप्त करने की सामर्थ्य रखती हैं। यह छात्रों के लिये भी एक प्रेरणा होनी चाहिए कि छात्राएं घर में परिवार का सहयोग करते हुये भी अच्छे अंक प्राप्त करती हैं। बेटी पढ़ेगी, तो आगे बढ़ेगी तथा देश व समाज को भी आगे बढ़ायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्कृष्ट परिणाम मेधावियों के माता-पिता व उनके अभिभावकों के परिश्रम तथा शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। यदि माता-पिता अपने बच्चां का सही मार्गदर्शन करें, तो उनका भविष्य उज्ज्वल होगा तथा सपने साकार हांगे। इस दिशा में माता-पिता का प्रयास, शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रधानाचार्य का अनुशासन महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है। छात्र-छात्राओं के अभिभावक उनके पहले गुरु होते हैं। अभिभावक बच्चों को ऐसे कार्यों के साथ जोड़े, जो उनका रचनात्मक विकास कर सकें। छोटे बच्चों को स्मार्ट फोन देने के कई बार घातक परिणाम भी देखने को मिलते हैं। हमारे देश में ज्ञान की एक समृद्ध परम्परा रही है। हमने विद्या को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्या को विस्तृत माना है। ‘सा विद्या या विमुक्तये’, अर्थात विद्या वह है जो हमारे जीवन में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सके और उन चुनौतियों से जूझने के लिये प्रेरणा प्रदान कर सके, जो समाज व राष्ट्र के समक्ष उत्पन्न हुई है। भारत की परम्परा ने कभी पलायनवादी रूख नहीं अपनाया। भगवान श्रीराम तब भगवान श्रीराम बने, जब उन्हें गुरु वशिष्ठ मिले। भगवान श्रीराम के पास दिव्य अस्त्र तब आए, जब गुरु विश्वामित्र मिले। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में तब प्रस्तुत हुये, जब उन्हें गुरु के रूप में महर्षि वाल्मीकि मिले। उत्तर से दक्षिण तक भारत की एकता तब आगे बढ़ी, जब महर्षि अगस्त्य जैसे ऋषि सामने आये।
गुरु संदीपन के मिलने से श्रीकृष्ण के जीवन में मुरली को सुदर्शन चक्र बनने में समय नहीं लगा। समय के अनुरूप मुरली की आवश्यकता वृन्दावन में थी तथा धर्म की स्थापना के लिये सुदर्शन चक्र भी आवश्यक था। महर्षि संदीपन ने इसे महसूस किया और श्रीकृष्ण के हाथों से मुरली वृन्दावन में रखवा दी। गुरु संदीपन ने श्री कृष्ण से कहा कि सुदर्शन चक्र लेकर निकलो, तभी धर्म की स्थापना होगी और देश सुरक्षित होगा। इस प्रकार की प्रेरणा लम्बी यात्रा को आगे बढ़ाती है। भारत का विश्व में सम्मान बड़ी सैन्य शक्ति और धन धान्य से परिपूर्ण होने के कारण नहीं था, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ज्ञान की धरोहर के कारण था। इसलिए भारत विश्वगुरु के रूप में स्थापित हुआ। मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान उसी कड़ी का हिस्सा है। आज से 09 वर्ष पूर्व मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह नहीं होते थे। परीक्षाओं में नकल होती थी। विगत 09 वर्षों में प्रदेश में नकल विहीन परीक्षाएं सम्पन्न कराने का कार्य किया गया है। आज प्रदेश में लगभग 56 लाख छात्र-छात्राएं माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में बैठते हैं। यह परीक्षा ससमय आयोजित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षाएं छात्र-छात्राओं को परेशान करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का आधार छात्र-छात्राओं के अन्दर आत्मविश्वास पैदा करने वाला होना चाहिए, जिससे वह स्वयं को स्वतःस्फूर्त भाव से उसमें लीन कर लें। वह परीक्षक उत्तम कोटि का नहीं माना जाता, जो विद्यार्थियों को परेशान करने की नीयत से अत्यंत जटिल प्रश्न बनाता है। प्रश्न ऐसा होना चाहिए, जिसे छात्र आसानी से हल कर दें। 09 वर्ष पूर्व शिक्षकों की भर्ती नहीं होती थी। विद्यालय खराब स्थिति में थे। आज विद्यालय में शिक्षक भी हैं और उनके स्थान पर कोई प्रॉक्सी टीचर नहीं पढ़ाता। शिक्षा के क्षेत्र में अनेक अभिनव प्रयास व प्रयोग किए गए हैं। आज समय पर परिणाम आते हैं। 56 लाख बच्चों की परीक्षा अब तीन महीने में नहीं, बल्कि 14 से 15 दिन में होती है और अगले 14 से 15 दिन में परिणाम भी आ जाते हैं। परिणाम आने के साथ ही छात्रों को मार्कशीट समय पर मिल जाने से छात्र अपनी आगे की तैयारी करते हैं।
आज गवर्नमेन्ट इण्टर कॉलेज, गवर्नमेन्ट बालिका इण्टर कॉलेज या प्रबन्धकीय सहायता प्राप्त विद्यालय सहित माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालय दर्शनीय बन गए हैं। इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, लखनऊ से जुड़े विद्यालयों में पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा के छात्रों तथा शास्त्री एवं आचार्य से जुड़े हुए छात्रों को संस्कृत का अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होता है। इसके लिए सरकार ने अनुदान की व्यवस्था की। सरकार ने प्रोजेक्ट अलंकार के अन्तर्गत प्रदेश में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विद्यालयों के पुनरूद्धार के लिए उपलब्ध करवाई। सी0एस0आर0 से धनराशि लगायी गयी। जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। आज विद्यालयों में अच्छे क्लास रूम बन गए हैं। विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए टॉयलेट और पेयजल की उत्तम व्यवस्था की गई है। भारत सरकार ने भी छात्र-छात्राओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए अनेक अभियान प्रारम्भ किये हैं। अटल टिंकरिंग लैब इसका एक उत्तम उदाहरण है। विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी बन रही है। कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो छात्र-छात्राओं को शिक्षा के नवाचारों से जोड़ने व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आज प्रदेशस्तरीय सम्मान समारोह के साथ-साथ जनपद स्तर के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को मंत्रिगण, सांसदों, विधायकों व शासन से जुड़े हुए अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। यह मेधावियों के लिए एक नए जीवन की शुरुआत है। यह प्रेरणा देता है कि सफलता का मार्ग शॉर्टकट से नहीं, बल्कि परिश्रम से निकलता है। जीवन में परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं होता। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हमने परिश्रम किस भाव और मनःस्थिति में किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों पर स्मार्टफोन के लिए अनावश्यक दबाव मत डालें। डिजिटल लाइब्रेरी के साथ जुड़ें। समाचार पत्रों का अध्ययन जरूर करें। सोशल मीडिया में न्यूनतम समय दें। प्रतियोगी परीक्षाओं के इण्टरव्यू में आपका प्रेजेण्टेशन ही आपके चयन का आधार बनेगा। देश, दुनिया तथा समाज के बारे में जानकारी रखिए। व्यावहारिक जानकारी से स्वयं को ओतप्रोत करिए। अपनी परम्परा, संस्कृति, विरासत, देश और आस-पास के परिवेश की गहन जानकारी रखिए। आज के कार्यक्रम में आप लखनऊ आए है, तो लखनऊ के बारे में जानकारी प्राप्त करें। साथ ही, अपने जनपद के बारे में जानकारी प्राप्त करें। यदि आप अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ जुड़ेंगे, तो वह आपके लिए उपयोगी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं में आत्मविश्वास आवश्यक है, लेकिन इस भ्रम में कभी नहीं रहना चाहिए कि मैं ही सही हूं और बाकी गलत हैं। कोई व्यक्ति तब असफल होता है, जब वह अति आत्मविश्वास के साथ चलता है और छोटी-छोटी बातों को नजरअन्दाज करता है। यह छोटी-छोटी बातें बाद में हमारे लिए बाध्य बन जाती है। इसलिए जीवन तथा पाठ्यक्रम की प्रत्येक छोटी से छोटी बात का ध्यान रखें। हमारे यहां ज्ञान के द्वार को बन्द करने का आदेश नहीं है। जहां कहीं अच्छी जानकारी तथा ज्ञान प्राप्त होता है, उसके लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए। अच्छी जानकारी के साथ स्वयं को जोड़े। छात्र-छात्राएं ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग करें। अपने जीवन का कुछ समय शारीरिक स्वास्थ्य के लिए निकालें, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के सभी आयामों और लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता महत्वपूर्ण है। समय पर जगना, समय पर सोना तथा समय पर भोजन करना अत्यन्त आवश्यक है।
हम सभी का दायित्व है कि देश और समाज के लिए अपना योगदान करें। अपने परिवार के अन्य सदस्यों, विद्यालय के अन्य छात्र-छात्राओं को भी मेरिट में स्थान प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा दें। मेधावियों ने मेरिट में इसलिए स्थान प्राप्त किया क्योंकि उन्होंने खूब पढ़ाई की। पूरी तन्मयता के साथ अपने प्रश्न पत्र को देखने के उपरान्त उत्तर लिखे। ऐसा अन्य क्षेत्रों में भी हो सकता है। जीवन के अलग-अलग क्षेत्र में अन्य लोगों को भी आप आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकेंगे, तो यह देश के प्रति एक सेवा होगी। इस सेवा के लिए हम सभी को सदैव तैयार रहना चाहिए। हमारी सफलता में माता-पिता व शिक्षकों साथ-साथ समाज और देश का भी योगदान है। हमारे मन में समाज और देश के इस योगदान के प्रति कृतज्ञता का भाव होना चाहिए। हमारे अन्दर देश और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा होना चाहिए।

अयोध्या में मेधावी सम्मान समारोह 2026 का आयोजन, अदिति यादव हुईं सम्मानित
अयोध्या जिलाधिकारी सभागार अयोध्या में आयोजित मेधावी सम्मान समारोह 2026 में जिले के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में अदिति यादव, पुत्री श्री अशोक यादव, को उनकी शैक्षिक उपलब्धियों एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), मुख्य विकास अधिकारी (CDO), जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती रोली सिंह, अयोध्या विधायक श्री वेद प्रकाश गुप्ता तथा गोसाईगंज विधायक श्री अभय सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।अतिथियों ने अदिति यादव को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएं समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं तथा उनकी उपलब्धियां अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। सम्मान प्राप्त करने पर अदिति यादव एवं उनके परिजनों में खुशी का माहौल है। क्षेत्र के लोगों ने भी इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। यह सम्मान समारोह शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गुलाब देवी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिये निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशों और संकल्पना के अनुरूप विभाग सफलता के निरन्तर नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2026 की यू0पी0 बोर्ड की परीक्षाएं नकलविहीन, शुचितापूर्ण और निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हुई। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के अन्तर्गत राजकीय माध्यमिक विद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय और संस्कृत विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इस अवसर पर लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेनशर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
























