योगी ने दिया गोरखपुर से सनातन का संदेश

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर ने श्री गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर में सप्तदिवसीय भव्य श्रीराम कथा के शुभारम्भ अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। जीवन की सुगमता और संजीवता को जानना हो, तो हमें ज्ञान और भक्ति का अनुगामी बनना होगा तथा प्रभु श्रीराम के चरणों में खुद को समर्पित करना होगा।  यह अवसर हमें कभी प्रभु श्रीराम कथा तथा कभी श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण के माध्यम से प्राप्त होता। भारत के सनातन धर्म की परम्परा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का स्मरण सभी भारतीय पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते राम-राम हमारे संस्कारों का सम्बोधन बना। उत्तर प्रदेश में वह सभी तीर्थ और धाम मौजूद, जो प्रदेश को भारत के हृदय स्थल के रूप में प्रस्तुत करते। जब भी जीवन में मर्यादाओं की बात की जाती, तो हर व्यक्ति श्रीराम और अयोध्या की ओर देखता। जब भी जीवन के रहस्यों को जानने तथा जीवन्तता की बात होती, तो लोग अविनाशी काशी की ओर देखते। जीवन में भक्ति का महत्व जानना हो, तो मथुरा-वृन्दावन तथा समरसता का महत्व जानना हो, तो प्रयागराज चले जाइए। यह सभी स्थल सनातन धर्म के मूल्यों के प्रतीक।


गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जीवन में जहां भक्ति नहीं है, वहां अन्धकार, अराजकता और अज्ञानता की स्थिति है। जीवन की सुगमता और संजीवता को जानना हो, तो हमें ज्ञान और भक्ति का अनुगामी बनना होगा तथा प्रभु श्रीराम के चरणों में खुद को समर्पित करना होगा। यह अवसर हमें कभी प्रभु श्रीराम कथा के माध्यम से तथा कभी श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण के माध्यम से प्राप्त होता है। आज श्री गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर में सप्तदिवसीय भव्य श्रीराम कथा के शुभारम्भ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। श्रीराम कथा के शुभारम्भ से पूर्व मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में मुख्य मन्दिर से कथा स्थल तक श्रीरामचरितमानस की पोथी शोभा यात्रा निकाली गयी। शोभा यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर मुख्यमंत्री जी व यजमानगण ने व्यासपीठ की पूजा की।  


मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य शान्तनु जी महाराज का अभिवादन करते हुए कहा कि वह एक लोकप्रिय कथा व्यास हैं। वह श्रीराम कथा को व्यवहारिक सन्दर्भां से जोड़ते हुए प्रस्तुत करते हैं। गत वर्ष भी हम सभी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके श्रीमुख से श्रीराम कथा का श्रवण किया था। आज से अगले एक सप्ताह तक प्रभु श्रीराम कथा के श्रवण का आनन्द श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। भारत के सनातन धर्म की परम्परा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का स्मरण सभी भारतीय पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं। हमारी हर श्वास में प्रभु श्रीराम बसते हैं। किसी भी उम्र का व्यक्ति हो, वह श्रीराम को अपने पास पाता है। हम देश में किसी भी राज्य में जाए, चाहे वह हिन्दी भाषी हो अथवा गैर हिन्दी भाषी, जब उन्हें पता चलता है कि हम अयोध्या नगरी के राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं, तो उनके मुख से अभिवादन के रूप में जय श्रीराम निकलता है। राम-राम हमारे संस्कारों का सम्बोधन बना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि क्षेत्रों में अभिवादन के रूप में लोगों के मुख से ‘राम-राम जी’ ही निकलता है।


यह उत्तर प्रदेशवासियों का सौभाग्य है कि यहां वह सभी तीर्थ और धाम मौजूद हैं, जो प्रदेश को भारत के हृदय स्थल के रूप में प्रस्तुत करते हैं। जब भी जीवन में मर्यादाओं की बात की जाती है, तो हर व्यक्ति श्रीराम और अयोध्या की ओर देखता है। जब भी जीवन के रहस्यों को जानने तथा जीवन्तता की बात होती है, तो लोग अविनाशी काशी की ओर देखते हैं। जीवन में भक्ति का महत्व जानना हो, तो मथुरा-वृन्दावन तथा समरसता का महत्व जानना हो, तो प्रयागराज चले जाइए। यह सभी स्थल सनातन धर्म के मूल्यों के प्रतीक हैं। इस अवसर पर साधु-सन्त तथा श्रद्धालुजन उपस्थित थे।  

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