जेल विभाग के तबादलों में यह क्या हो रहा मंत्रीजी….!

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15-20 साल से एक जेल पर जमें कर्मियों के नहीं हुए तबादले।फाइलों में सिमटी शासन व विभागीय स्थानांतरण नीति।

आभा राकेश

लखनऊ। प्रदेश कारागार विभाग के अधिकारियों के लिए शासन व विभागीय स्थानांतरण नीति का कोई मायने नहीं रह गया है। विभाग जेल सेवा नियमावली की शर्तों से नहीं अधिकारियों की मर्जी से संचालित हो रहा है। विभागीय स्थानांतरण नीति में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जनपद में तीन साल व मंडल में सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मियों को स्थानांतरित किया जाएगा। इस निर्देश के बाद भी जेल अधिकारियों ने एक ही जनपद की जेल पर 15-20 जमे कर्मियों को स्थानांतरित नही किया गया है। यही नही कई जेलकर्मी व बाबू तो तबादला होने के बाद भी रिलीव तक नहीं किये गए है। दिलचस्प बात तो यह है जेल मंत्री सब कुछ जानकर अनजान बने है।

सूत्रों का कहना है कि आगरा जेल परिक्षेत्र कार्यालय में बीते करीब 20 साल से जमीं रंजना कमलेश का तबादला किया ही नहीं जाता है। बीते दिनों रंजना कमलेश को प्रोन्नति प्रदान की गई। इसके बावजूद उसका तबादला नहीं किया गया है। इसी प्रकार फिरोजाबाद जेल पर करीब 20 साल से तैनात बाबू छोटे लाल का भी स्थानांतरण नहीं किया गया। मथुरा जेल पर तैनात बड़े बाबू वीरपाल का दो साल पहले तबादला किया गया लेकिन आज तक इन्हें रिलीव नही किया गया है।

अफसरों के ठेंगे पर जेल डीआईजी का आदेश – शासन की स्थानांतरण नीति आने से पूर्व जेल मुख्यालय के डीआईजी जेल शैलेन्द्र मैत्रये ने प्रदेश के समस्त वरिष्ठ अधीक्षक व अधीक्षकों को एक निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में स्पष्ट रूप से लिखा गया था जेलों के समस्त स्थानांतरित कर्मियों को 24 जून 2022 तक रिलीव किया जाए। रिलीव किये गए कर्मियों की सूचना मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए। डीआईजी का यह आदेश हवा हवाई ही साबित हुआ। प्रदेश की तो छोड़िए राजधानी लखनऊ की ही जिला जेल में करीब 20 स्थानांतरित वार्डर हेड वार्डर काम कर रहे है। जेल विभाग में नियम और कानून तो अलग बात आला अफसरों के निर्देशों का अनुपालन तक नहीं किया जाता है।

यही नहीं जेलों में रिटायर कर्मी से काम करने का मामला भी प्रकाश में आया है। यह मामला पश्चिम की कमाऊ कही जाने वाली अलीगढ़ जेल का है। अलीगढ़ जेल पर तैनात अकाउंटेंट अनिल शर्मा करीब ढाई साल पहले रिटायर हो गया है। रिटायर होने के बाद भी यह बतौर अकॉउंटेंट आज भी जेल पर काम कर रहा है। काम के एवज में जेल प्रशासन के अधिकारी इसे कैंटीन से प्रतिदिन होने वाली मोटी कमाई से रिटायर अकाउंटेंट को प्रतिमाह एक फिक्स अमाउंट दिया जाता है। इसके अलावा  गल्ला गोदाम में आने वाले खाद्यान का कमीशन इसकी अतिरिक्त कमाई का जरिया बना हुआ है। यही नही इस जेल पर तैनात वार्डर अरुण, नितिन, महिला हेड वार्डर लवली व लता का दो साल पूर्व तबादला हुआ था। इन्हें रिलीव करने के बजाए अफसरों ने मोटी रकम लेकर विभिन्न जेलो से पुनः इसी जेल पर सम्बद्ध कर दिया गया। इसके अलावा गोरखपुर जेल पर तैनात वरिष्ठ सहायक कृष्ण कुमार पांडे पिछले काफी लंबे समय से इसी जेल पर जमे हुए है। कहने को तो इनका कई बार तबादला हुआ किन्तु जुगाड़ व धनबल की वजह से अधिकारी इन्हें हटा नही पाए। हाल ही में इनका तबादला गोरखपुर से गोंडा किया गया है। बताया गया है कि यह तो बानगी भर है इस प्रकार प्रदेश की जेलों में बड़ी संख्या में बाबू एवम सुरक्षाकर्मी है जिन्हें तबादले के बाद रिलीव ही नही किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जेल मंत्री सब कुछ जानकर अनजान बने हुए। विभाग में चर्चा है जेलमंत्री लंबे समय से जमें इन बाबुओं को हटा पाएंगे। इस बाबत जब जेलमंत्री से बात करने का प्रयास किया तो उनसे संपर्क ही नहीं हो पाया।

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