
प्रतीक यादव की आख़िरी रात: घर में सिर्फ बेटियां, नौकर और मौत से जंग की कहानी
Akhilesh Yadav के छोटे भाई प्रतीक यादव के अचानक निधन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा शोक पैदा कर दिया है। महज़ 38 वर्ष की उम्र में हुई इस मौत ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। परिवार के करीबी सूत्रों और अस्पताल से जुड़े इनपुट्स के आधार पर घटनाक्रम की जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद भावुक और चौंकाने वाली है।
अपर्णा असम में थीं, फोन पर लेती रहीं हर अपडेट
Aparna Yadav उस समय असम में एक शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थीं। जैसे ही उन्हें पति की तबीयत खराब होने की जानकारी मिली, वह लगातार परिवार और स्टाफ के संपर्क में रहीं। बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम करीब 5 बजे उन्होंने परिवार के करीबी एक ज्योतिषी से भी संपर्क किया और प्रतीक की हालत देखने को कहा। ज्योतिषी खुद घर नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने स्टाफ राकेश से फोन पर जानकारी ली। जवाब मिला कि प्रतीक अपने कमरे में आराम कर रहे हैं। यही सूचना अपर्णा तक भी पहुंचाई गई।
रात 11:30 बजे अचानक बिगड़ी तबीयत
प्रतीक यादव के करीबी और जिम सहयोगी सर्वेश पांडेय के अनुसार मंगलवार रात करीब 11:30 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्टाफ और ड्राइवर की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश हुई। हालांकि, इस बात को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से अलग बयान सामने आया है। रात करीब 1 बजे अपर्णा यादव ने दोबारा फोन मिलाया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। स्टाफ ने बताया कि प्रतीक सो चुके हैं।
सुबह किचन में बेहोश मिले
बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे घर के किचन में प्रतीक यादव बेहोशी की हालत में मिले। घर में उस समय सिर्फ उनकी दोनों बेटियां — प्रथमा और प्रतीक्षा — तथा नौकर मौजूद थे। सुरक्षा गार्ड बाहर तैनात थे। नौकर तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचा और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को लेकर वापस आया। डॉक्टर ने जांच में शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं पाई। हार्ट फंक्शन बंद हो चुका था। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल ने क्या कहा?
सिविल अस्पताल के CMS डॉ. डीसी पांडेय के अनुसार प्रतीक यादव को सुबह 6:55 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच में शरीर में कोई हरकत नहीं पाई।
पैर की सर्जरी के बाद बदल गया था रूटीन
सूत्रों के मुताबिक, मई की शुरुआत में प्रतीक यादव के बाएं पैर की सर्जरी हुई थी। पैर में काफी सूजन थी और वह पिछले कई दिनों से घर पर ही रह रहे थे। इससे पहले उन्हें Medanta Hospital में भर्ती कराया गया था, जहां इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रचिता शर्मा की निगरानी में इलाज चल रहा था। परिवार के लोगों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद उनका रूटीन पूरी तरह बदल गया था। वह बाहरी लोगों से मिलना-जुलना लगभग बंद कर चुके थे।
पोस्टमॉर्टम में हार्ट और विसरा सुरक्षित
पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टरों ने हार्ट और विसरा सुरक्षित रख लिया है ताकि आगे की जांच में मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही कई सवालों के जवाब सामने आ पाएंगे।
बैकुंठ धाम में हुआ अंतिम संस्कार
Baikunth Dham में गुरुवार दोपहर प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार किया गया। चिता को मुखाग्नि उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दी। अखिलेश यादव ने भाई की चिता पर लकड़ी रखकर अंतिम विदाई दी। उनकी दोनों बेटियां भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहीं और उन्होंने भी पिता को नम आंखों से अंतिम प्रणाम किया।
























