Tuesday, May 12, 2026
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बहराइच में पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई, मचा बवाल!

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बहराइच में पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर रद्द हो, उत्पीड़न करने वालों पर हो कार्रवाई।

त्रिनाथ शर्मा

लखनऊ/बहराइच। यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (यूपीडब्लूजेयू) ने भ्रष्टाचार से संबंधित खबर प्रकाशित करने पर बहराइच जिले के दो वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष टीबी सिंह ने पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर रद्द किए जाने तथा उत्पीड़न के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


उन्होंने कहा कि बहराइच नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग संबंधी समाचार प्रकाशित होने से नाराज अधिशासी अधिकारी (ईओ) प्रमिता सिंह ने जनपद के वरिष्ठ पत्रकार रफीकुल्लाह और मसूद कादरी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया। वहीं, भारत समाचार के पत्रकार रेहान द्वारा नगरपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी खबर प्रसारित किए जाने पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने ईओ प्रमिता सिंह की मौजूदगी में जबरन फेसबुक से खबर डिलीट करवा दी। आरोप है कि उक्त अधिशासी अधिकारी शासन के नियमों को धता बताते हुए कई वर्षों से बहराइच जिले में ही तैनात हैं।


यूपीडब्लूजेयू अध्यक्ष ने कहा कि अब भारत समाचार के पत्रकार रेहान और उनके परिवार के खिलाफ भी झूठे मुकदमे दर्ज कराने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें यूपीडब्लूजेयू बहराइच जिला इकाई के अध्यक्ष मसूद कादरी और पदाधिकारी रफीकुल्लाह शामिल हैं। बहराइच जिले के पत्रकारों ने जानकारी दी कि जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस कप्तान ने एफआईआर दर्ज कराई है।


यूपीडब्लूजेयू के संगठन सचिव अजय त्रिवेदी ने कहा कि यदि पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर रद्द कर दोषी ईओ पर कार्रवाई नहीं की जाती है तो संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना से मिलकर विरोध दर्ज कराएगा। इसके साथ ही नगर विकास विभाग में भी ज्ञापन सौंपकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।


गौरतलब है कि बहराइच जिले में राजकुमार बाजपेयी ने एक पत्र भेजकर नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। उसी के आधार पर पत्रकारों ने खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद उत्पीड़नात्मक कार्रवाई शुरू हो गई। पत्रकारों का कहना है कि नगरपालिका में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से 450 सफाईकर्मी भर्ती हैं, जिनमें 58 केवल कागजों में दर्शाए गए हैं और उनके वेतन में बंदरबांट हो रहा है। वहीं, नगरपालिका ने शासनादेश के विपरीत लोक निर्माण विभाग और जिला पंचायत की सड़कों का निर्माण अपने बजट से कराकर भुगतान भी कर दिया।

प्रकाशित खबरों में कहा गया है कि 3 से 6 महीने पहले जहां इंटरलॉकिंग कराई गई थी, वे सड़कें धंस गई हैं। वहां दोबारा टेंडरिंग कर इंटरलॉकिंग कराई जा रही है तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी खराब बताई जा रही है। इतना ही नहीं, बहराइच नगरपालिका द्वारा 1500 रुपये की स्ट्रीट लाइट 18 हजार रुपये में खरीदे जाने का आरोप है, जिनमें से 75 प्रतिशत लाइटें काम नहीं कर रही हैं।


बहराइच जिले के पत्रकारों ने मांग की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने वाली योगी सरकार को इन बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।