

प्रमुख सचिव कारागार के संभाले संभल नहीं रहा विभाग! एक सप्ताह में तीन जेल में तीन बंदियों की हुई मौत। सीतापुर, सेंट्रल जेल इटावा के बाद बिजनौर जेल में संदिग्ध मौत। यूपी की जेलों में आखिर क्या हो रहा है? एक सप्ताह में सीतापुर, इटावा और अब बिजनौर जेल में बंदियों की संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कारागार विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था अब जांच के घेरे में है।
लखनऊ। महानिदेशक कारागार के तमाम आदेशों के बाद भी प्रदेश की जेलों में आत्महत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। सीतापुर, सेंट्रल जेल इटावा के बाद रविवार को बिजनौर जेल में एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मौत ने जेल प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। मृतक की पहचान दीपक पुत्र चंद्रपाल निवासी गांव पृथ्वीपुर के रूप में हुई है। दीपक 18 फरवरी 2025 से लूट के मामले में जेल में बंद था। इस घटना के बाद मृतक के परिवारजनों और गांव वालों ने पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और आत्महत्या किए जाने का आरोप लगाया है।
मिली जानकारी के अनुसार घटना रविवार दोपहर के समय हुई, जब जेल के बंदियों को बैरक से बाहर निकाला गया था ताकि वे अपना भोजन कर सकें। इसी दौरान दीपक जेल परिसर में स्थित एक आम के पेड़ के पास पहुंचा और कथित तौर पर रस्सी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना मिलने पर पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे मृतक दीपक के परिवारजनों और गांव वालों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दीपक आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता था और इस घटना के पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने आत्महत्या की बात को सिरे से खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। उधर इस संबंध में जब जेल अधीक्षक अदिति श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
जेल परिक्षेत्र डीआईजी पर नहीं होती कार्यवाही!
प्रदेश की जेलों में आए दिन हो रही आत्महत्या की घटनाओं के बाद भी विभाग के प्रमुख सचिव हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए है। दोषी आला अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से अधिकारी बेलगाम हो गए है। सूत्रों की माने तो जेलों में गंभीर घटनाएं होने के बाद उच्चाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए अधिकारी वार्डर, हेड वार्डर और ज्यादा हुआ तो डिप्टी जेलर के खिलाफ निलंबन, विभागीय कार्रवाई, स्पष्टीकरण जैसी मामूली कार्रवाई कर मामले को निपटा देते है। परिक्षेत्र के डीआईजी और जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से आत्महत्या की घटनाएं थम नहीं रही हैं। ऐसा तब है जब डीजी जेल ने घटनाएं रोकने के लिए अंगौछे, फीते वाले जूते, नारे वाले पजामे समेत प्लास्टिक की रस्सी तक का प्रवेश जेल में प्रतिबंधित कर रखा है।




















