अफगानिस्तान से अमरीका गया


एस.पी.मित्तल

अफगानिस्तान से अमरीका तो चला गया, लेकिन भारत के लिए जिस बात का डर था, वही हुआ। पाकिस्तान के एनएसए मोईद यूसूफ ने भारत पर 9/11 जैसे हमले की धमकी दी तो कश्मीर को लेकर आतंकी संगठन एकजुट हुए। तय तारीख से एक दिन पहले ही अमेरिका के सभी सैनिक अफगानिस्तान छोड कर चले गए है। 30 अगस्त की आधी रात को काबुल एयरपोर्ट से अमेरीका के मालवाहक विमान ने डेल्टा सैनिकों के साथ आखरी उडान भरी। 20 वर्ष पहले अमेरिका के डेल्टा सैनिक ही सबसे पहले अफगानिस्तान पहुंचे थे। अमेरिका के लिए यह दुखद भरा रहा कि आखरी उडान से पहले 13 मरीन अमेरिकी सैनिको के शव भी पहुॅच गये। इससे पूरे अमेरिका में शोक का माहौल है। अमरीकी सनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान का क्या होगा, वह उपर वाला ही जानता है लेकिन भारत के लिए जिस बात का डर था वही हुआ है। अब जब अफगानिस्तान पर तालिबान का पूरी तरह कब्जा हो गया, तब पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एन.एस.ए.) मोईद यूसूफ ने कहा है कि भारत ने यदि तालिबान सरकार को मान्यता नही दी तो भारत पर 9/11 जैसे हमले हो सकते है। इधर एन.एस.ए. का धमकी भरा बयान आया है तो उधर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान में आंतकी संगठन रणनीति बनाने में जुट गए है। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख हाफिज सयैद अब तालिबान के लड़ाकों से मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देगा।

कश्मीर के मुद्दे पर आतंकी संगठनों केा एकजुट करने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी सक्रिय है। हालांकि तालिबान की ओर से कहा गया है कि वह भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन मौजूदा समय में तालिबान काफी हद तक पाकिस्तान पर निर्भर है। अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में जो हेलीकॉप्टर, टैंक, और सैन्य सामग्री छोड गए है, उन्हे पाकिस्तानी सेना के अधिकारी ही चला रहे हैं। तालिबान को अमेरिकी सैन्य सामग्री के उपयोग के बारे में भी पाक सेना के अधिकारी ही जानकारी दे रहे है। अफगानिस्तान से अमेरिका को भगाने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में तालिबान के न चाहते हुए भी पाकिस्तान हमारे कश्मीर में आंतकी गतिविधियां करता करायेगा। तालिबान अफगानिस्तान में किस प्रकार से शासन करता है, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन पाकिस्तान की बदमान खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर के हालात बिगाड़ने में कोई कसर नही छोडेगी। यदि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को नही हटाया जाता, तो तालिबान के अफगानिस्तान में घुसने के साथ कश्मीर में भी आतंकी घटनाएं हो जाती। अनुच्छेद 370 के हटने से कश्मीर में सुरक्षाबलों को स्थिति मजबूत हुई है तथा कश्मीर के लोगों को भी अब सरकार की योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। हालात सामान्य होने के कारण ही कश्मीर में पर्यटन को बढावा मिला है। इससे आम कश्मीरियों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है।

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