राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी और कमीशनखोरी का बड़ा खुलासा! SIT की रिपोर्ट में गिनती प्रक्रिया में गड़बड़ी, सीसीटीवी से छेड़छाड़ और कई लोगों की भूमिका के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में एफआईआर की सिफारिश की गई है और मामला अब सरकार तक पहुंच चुका है। क्या आस्था के नाम पर हुआ बड़ा खेल?
- राम मंदिर चढ़ावा घोटाला? SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, एफआईआर की सिफारिश!
- क्या राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है?
- क्या करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा रामलला को चढ़ाया गया दान चोरी और कमीशनखोरी का शिकार हुआ?
- और क्या अब राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी जांच के घेरे में हैं?
- SIT की रिपोर्ट ने ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने पूरे देश में हलचल मचा दी है।
अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और कमीशनखोरी मामले में गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी। एसआईटी ने मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति, गणना प्रक्रिया में हेरफेर की आशंका जताई है। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशनखोरी का खेल उजागर किया गया है। रिपोर्ट में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टस्ट के बड़े पदाधिकारियों से लेकर उनके रिश्तेदारों, करीबियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में गड़बड़ी, सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ और कर्मचारियों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट की एक प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ को भी भेजी गई है। एसआईटी ने अपनी जांच में कई साक्ष्यों और गवाहों का उल्लेख करते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
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25 से 30 लोगों की भूमिका?
सूत्रों के मुताबिक जांच में लगभग 25 से 30 लोगों की भूमिका सामने आई है। कुछ गणनाकर्मियों के नाम भी रिपोर्ट में दर्ज बताए जा रहे हैं। जांच टीम का दावा है कि चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। एसआईटी को फुटेज में चोरी के साक्ष्य मिले हैं। इसमें गणनाकामी सीधे तौर पर शामिल रहे। खासकर अनुकल्प, मनीष, अवनीश आदि हैं। चंपत राय के करीषी टिन्नू के खिलाफ भी साक्ष्य मिले हैं।
प्राइवेट कंपनी की तरह ट्रस्ट चला रहे थे कमीशन बनेगा गले की फांस चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार, गोपाल राख के रिश्तेदार सोम के नाम का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। इन पर जल्द रिपोर्ट दर्ज हो सकती है। अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का भी जिक्र एसआईटी ने किया है। निर्माण के दौरान, पत्थरों को खरीदारी में गोपाल की प्रमुख भूमिका थी।
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चंपत राब, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को प्रथमदृष्टया दोषी पाया है। क्योंकि गणना प्रक्रिया में इनकी भूमिका रहती थी। निगरानी में नाकामी चोरी की बड़ी बजह रही। इसलिए, शायद इन सभी को लापरवाही का दोषी बनाया जाए। हालांकि, अनिल और गोपाल पर कानूनी शिकंजा भी कस सकता है। ट्रस्ट के पुनर्गठन से लेकर विस्तृत ऑडिट कराने की सिफारिश: एसआईटी ने ट्रस्ट के पुनर्गठन और विस्तृत ऑडिट की सिफारिश की है। नए तरीके से कर्मियों की भतीं कराने की सिफारिश की है। चूंकि मामले में चोरी व कमीशनखोरी के साक्ष्य मिले हैं, इसलिए एफआईआर की सिफारिश कर विस्तृत जांच की बात कही है। एसआईटी में 45 दिन की बजाय 150 दिन की वीडियो रिकॉर्डिंग रखे जाने, चढ़ाचे की गिनती के बाद डाटा की रोकना ऑनलाइम मेटी, किसी वरिष्ठ अधिकारी को मुख्य कार्यपालकधिकारी बनाए जाने की सिफारिश की हैं।
बड़े नामों पर सवाल
रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे। एसआईटी ने ट्रस्ट के पुनर्गठन, विस्तृत ऑडिट और नई भर्ती प्रक्रिया की भी सिफारिश की है।
क्या होंगे अगले कदम?
अब गृह विभाग इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करेगा। इसके बाद सरकार तय करेगी कि किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और क्या एफआईआर दर्ज होगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट लगभग दो सप्ताह बाद आने की संभावना जताई जा रही है।
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है। अब सबकी नजर सरकार और एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं?



