गायों में तेजी से फैल रहा है वायरस….!

गायों में तेजी से फैल रहा है वायरस। गौशालाएं बन सकती हैं वायरस विस्फोट का केंद्र।राजस्थान सरकार स्टाम्प और शराब पर वसूल रही है गौ संरक्षण टैक्स। सरकार के पास पशु चिकित्सक ही नहीं हैं तो राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज से गायों और अन्य जानवरों को कैसे बचाया जाएगा…?


एस0पी0मित्तल

राजस्थान में गाय, बकरी भेड़ आदि जानवरों में लम्पी स्किन डिजीज का वायरस तेजी से फैल रहा है। हजारों गायों ने अब तक दम तोड़ दिया है तथा लाखों पशु मौत के कगार पर खड़े हैं। बेजुबान पशुओं की इस गंभीर समस्या और सरकार के सुस्त रवैये पर 2 अगस्त को जी न्यूज के राजस्थान चैनल पर लाइव डिबेट हुई। इस डिबेट में राजस्थान गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन ने राज्य सरकार का पक्ष रखा, जबकि बीकानेर के लूणकरण से भाजपा विधायक सुमित गोदारा ने सरकार की खामियां व दम तोड़ते पशुओं के बारे में जानकारी दी। वहीं एक पत्रकार के नाते मैंने पशु चिकित्सकों की कमी और पशुपालकों की पीड़ा को रखा। असल में सरकार दावा तो कर रही है कि लम्पी स्किन डिजीज से पशुओं को बचाने के उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।

राज्य में पशु चिकित्सकों के 2400 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 70 प्रतिशत पद खाली है। जबकि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पशुधन की स्थिति को देखते हुए 11 हजार पशु चिकित्सक होने चाहिए। सरकार ने 2019 में 900 पशु चिकित्सकों की भर्ती निकली थी। परीक्षा का परिणाम भी घोषित हो गया, लेकिन कानूनी झमेलों के कारण नियुक्तियां अटकी पड़ी है। इस मामले में 8 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। राज्य सरकार यदि गंभीरता दिखाए तो 900 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति का रास्ता निकल सकता है। राज्य सरकार भले ही स्वीकार न करे, लेकिन पशुओं खास कर गायों पर आफत आई हुई है।

पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर आदि जिलों में रोजाना सैकड़ों पशु मर रहे हैं। यही हाल इन जिलों से सटे जिलों का भी है। चूंकि गुजरात की सीमा भी पाकिस्तान से लगी हुई है, इसलिए राज्य सरकार ने सीमावर्ती 11 जिलों में लंपी स्किन डिजीज से पशुओं को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया है। राजस्थान के लिए गंभीर बात यह है कि गुजरात से सटे जिलों में बड़ी संख्या में पशुओं का आवागमन होता है। यानी यह वायरस गुजरात की ओर से भी आ सकता है। इसलिए एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से प्रवेश करता है। सरकार को न केवल पशुओं के आवागमन को लेकर कोई ठोस नीति बनानी होगी, बल्कि गौशालाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। रोग से बचाने के लिए गौशालाओं में केमिकल का छिड़काव करना बेहद जरूरी है। यदि गौशालाओं में गाय मरने लगी तो सरकार से हालात नहीं संभाले जाएंगे।

ग्रामीण पृष्ठभूमि के सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह टापरवाला का मानना है कि पशुओं को तत्काल प्रभाव से वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने 15 जिलों के 1126 गांवों के 10 लाख पशुओं को अब तक वैक्सीन लगा दी है ताकि लम्पी स्किन डिजीज न हो। गुजरात के पशु पालकों को टोल फ्री नम्बर 1962 दिया गया है। इस पर चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। राजस्थान में भी ऐसे उपाय करने की जरुरत है। टापरवाला ने बताया कि राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति बहुत दयनीय है, जबकि प्रदेश में आय का मुख्य स्त्रोत पशुधन ही है। उन्होंने बताया कि देसी पद्धति से भी वैक्सीन तैयार की जा सकती है, जिसके एक डोज की कीमत मात्र 20 रुपए आएगी। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9460752009 पर विक्रम सिंह टापरवाला से ली जा सकती है।

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