G20 एनर्जी मीटिंग में भारत की दो टूक:सुरक्षित,किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा जरूरी

भारत ने अमेरिका में G20 एनर्जी अबंडेंस मिनिस्टीरियल मीटिंग में सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा की मांग की। G-20 ने स्वच्छ खाना पकाने, परमिट देने और महत्वपूर्ण खनिजों पर अहम नतीजों की दिशा में प्रगति की। केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा प्रणाली बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया, जिसे कुशल नियमन और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित सप्लाई चेन का समर्थन प्राप्त है।

ऊर्जा और आवास एवं शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने अमेरिका की G20 अध्यक्षता में 14-16 सितंबर 2026 तक ह्यूस्टन, अमेरिका में आयोजित G20 एनर्जी अबंडेंस मिनिस्टीरियल मीटिंग में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने तीन मुख्य विषयों पर चर्चा में भाग लिया: ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बेसलोड; परमिट और नियामक दक्षता; और महत्वपूर्ण खनिज व मजबूत सप्लाई चेन।

केंद्रीय मंत्री ने ज़ोर दिया कि विकास के लिए, खासकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए, सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा बहुत ज़रूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और देशों के बीच आपसी तालमेल का फ़ायदा उठाकर सभी के भले के लिए काम करने पर ज़ोर दिया, साथ ही अलग-अलग देशों की स्थितियों और विकास की प्राथमिकताओं का भी सम्मान किया।

उन्होंने बताया कि भारत एक मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा सिस्टम बना रहा है जो तेज़ी से डिजिटल, विकेंद्रीकृत और उपभोक्ता-केंद्रित होता जा रहा है। उन्होंने बिजली के क्षेत्र में भारत की बड़ी प्रगति का भी ज़िक्र किया, जिसमें बिजली उत्पादन की क्षमता 552 GW तक पहुँच गई है और इसमें से आधे से ज़्यादा क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने प्रमुख NDC लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर लिया है और 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ का लक्ष्य पाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मंत्री ने एनर्जी सेक्टर में रेगुलेटरी क्षमता को मज़बूत करने, कॉम्पिटिशन को बढ़ावा देने और ज़्यादा भागीदारी व निवेश को आसान बनाने के लिए भारत द्वारा किए गए सुधारों का ज़िक्र किया। उन्होंने ‘नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम’, ‘परिवेश’ (PARIVESH) और ‘पीएम गति शक्ति’ जैसी पहलों के बारे में बताया, जिनसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए मंज़ूरी की प्रक्रिया आसान हुई है और काम में ज़्यादा स्पष्टता आई है।

महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के मामले में, मंत्री ने सुरक्षित, मज़बूत और विविध सप्लाई चेन के महत्व पर ज़ोर दिया, साथ ही विकासशील देशों में सर्कुलरिटी और डाउनस्ट्रीम वैल्यू क्रिएशन पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने भारत के ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ का भी ज़िक्र किया, जिसमें खोज (एक्सप्लोरेशन) से लेकर रीसाइक्लिंग तक की पूरी वैल्यू चेन शामिल है, और रीसाइक्लिंग, रिकवरी व विविधता लाने के लिए G20 देशों के बीच सहयोग का आह्वान किया।

इस मंत्री-स्तरीय बैठक के नतीजतन तीन मुख्य क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जिनमें शामिल हैं:

(i) स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा: स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा को बढ़ावा देने पर G20 के वक्तव्य में स्वच्छ खाना पकाने की सार्वभौमिक सुविधा पर ज़ोर दिया गया और प्रौद्योगिकी-तटस्थ तथा राष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया गया, यह मानते हुए कि कोई एक समाधान सभी देशों की विविध आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। इसमें एलपीजी को स्वच्छ खाना पकाने का एक महत्वपूर्ण मार्ग बताया गया, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, और एलपीजी का उपयोग करने वाली परियोजनाओं सहित सभी स्वच्छ खाना पकाने के समाधानों के लिए वित्तपोषण तक समान पहुंच का आह्वान किया गया।

(ii) परमिटिंग और नियामक दक्षता: G20 परमिटिंग और नियामक दक्षता संगोष्ठी ने ऊर्जा अवसंरचना विकास को सुगम बनाने के लिए कुशल और सुव्यवस्थित परमिटिंग और नियामक प्रक्रियाओं के महत्व को स्वीकार किया, साथ ही स्वैच्छिक सूचना आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और डिजिटल तथा एआई-सक्षम उपकरणों के माध्यम से सहयोग को प्रोत्साहित किया।

(iii) पानी का दोबारा इस्तेमाल: G20 पानी के दोबारा इस्तेमाल की पहल को एक स्वैच्छिक ढांचे के तौर पर आगे बढ़ाया गया। इसका मकसद राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप विज्ञान और सबूतों पर आधारित, किफायती और ज़रूरत के हिसाब से पानी के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना था। इसने पानी की सुरक्षा और मज़बूती को बढ़ाने के लिए सहयोग और बेहतरीन तरीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया, साथ ही यह भी माना कि हर जगह एक ही तरीका काम नहीं आ सकता।

(iv) अहम खनिज: G20 अहम खनिजों पर हुई बैठक के बयान में ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीकों और आर्थिक विकास के लिए अहम खनिजों की भूमिका को माना गया। इसमें राष्ट्रीय संप्रभुता और अलग-अलग घरेलू तरीकों का सम्मान करते हुए आपसी और स्वैच्छिक सहयोग पर ज़ोर दिया गया। साथ ही, विविधता लाने, वैल्यू जोड़ने और मज़बूत सप्लाई चेन के लिए इनोवेशन, सर्कुलरिटी, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया गया।

मिनिस्ट्रियल मीटिंग के दौरान, मंत्री ने U.S. डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी के सेक्रेटरी मिस्टर क्रिस राइट; U.S. डिपार्टमेंट ऑफ़ द इंटीरियर के सेक्रेटरी मिस्टर डग बर्गम; और कनाडा के एनर्जी और नेचुरल रिसोर्सेज़ मिनिस्टर के पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी मिस्टर कोरी होगन के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं में आपसी हित के कई मुद्दों पर बात हुई, जिनमें मज़बूत एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन, पावर सेक्टर में बदलाव, और भारत की डिजिटल इकॉनमी की बढ़ती एनर्जी ज़रूरतों को पूरा करने की योजनाएँ शामिल थीं। G-20 एनर्जी अबंडेंस मिनिस्ट्रियल मीटिंग में मंत्री की भागीदारी ग्लोबल एनर्जी चर्चा में भारत के रचनात्मक योगदान और सभी के लिए सुरक्षित, टिकाऊ, किफायती और समावेशी एनर्जी भविष्य बनाने की उसकी लगातार प्रतिबद्धता को दिखाती है।

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