भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया… अपने आपको भगवान से बड़ा समझने वालों को चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया और उनके घमंड का बुखार भी उतार दिया। आखिर किसके लिए दिया गया यह तीखा बयान? किस घटना के बाद तेज हुई राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं? क्या यह सिर्फ एक टिप्पणी है या इसके पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा है?
राजेन्द्र चौधरी
भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया। अपने को भगवान से ऊपर समझने वालों को भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुख़ार भी। अखिलेश यादव ने कहा कि ये युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश का संयुक्त परिणाम है क्योंकि वोट चोरी,पेपर चोरी’,चढ़ावा-चंदा-दान चोरी, नौकरी चोरी, आरक्षण चोरी, कमीशनख़ोरी, पीडीए पर अत्याचार, घोर भ्रष्टाचार,महंगाई की मार, मिलावट के सरकारीकरण, माताओं-बेटियों तक का अपमान, देश के जेन ज़ी पर हर तरह से प्रहार भाजपा ने इन सभी तरीक़ों से जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगा है।
अखिलेश यादव अब तो भाजपा वाले भी अपने ही ‘किसी’ का इस्तीफ़ा माँगेंगे क्योंकि जो अपनी ही विधानसभा हार गये उनके भरोसे नाव कैसे पार होगी। दरअसल ये हार उनकी है जिन्होंने उनको चुना था या कहे संगठन पर अपनी मर्ज़ी की तरह थोपा था। अब तो कोई ये भी नहीं कह सकता है कि ‘भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।’ सबसे ज़्यादा खुश तो उप्र में ‘वो’ हैं, जिनको ‘पीडीए’ समाज का होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर का पद न देकर जानबूझकर राज्य स्तर का पद दिया गया था। आज तो वो भी मुस्कुराकर पूछ रहे हैं रू ‘5 बड़ा या 7’। वैसे जनता ये भी कह रही है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाये तो राज्य-अध्यक्ष तो विधानसभा लड़वा भी नहीं पाएंगे।ये डबल इंजन की डबल हार है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की हार मतलब बदलाव की शुरुआत! भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उनकी हार नहीं बचा पाएंगी। अब भाजपा का संकट हार से बढ़कर इस बात का होगा कि उनका टिकट लेने वाला ‘ड्रोन और दूरबीन’ से भी ढूंढे नहीं मिलेगा।
सभी विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई और नई उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए सजग-सचेत और संविधान के प्रति वचनबद्ध रहने की अपेक्षा।



