अधर में बॉलीवुड का भविष्य

ओमीक्रॉन बॉलीवुड का भविष्य नववर्ष की शुरुआत होते-होते फिल्म निर्माता एकता कपूर, अभिनेता जॉन अब्राहम, उनकी पत्नी प्रिया रंचल और वयोवृद्ध अभिनेता प्रेम चोपड़ा के कोविड पॉजिटिव होने की खबरें चिंता में डाल गईं। प्रेम चोपड़ा को तो अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। करीना कपूर खान, अर्जुन कपूर, अंशुला कपूर, मृणाल ठाकुर, नोरा फतेही, रिया कपूर, शिल्पा शिरोडकर, अमृता अरोड़ा, अलाया एफ, शनाया कपूर, महीप कपूर भी इसकी चपेट में आ ही चुके हैं।

यह कोविड की पहली-दूसरी लहर के दौरान सामने आई बात को याद करने का वक्त है, जब कहा जा रहा था कि कन्टेंट का मामला हो या उसकी रचना का, विचार या कल्पना का, बॉलीवुड को बहुत कुछ बदलना होगा। स्टार्स को मिलने वाली राशि से लेकर उपकरणों और काम करने वाली टीम का बजट हो, सबको तर्कसंगत बनाने की जरूरत होगी। दुर्भाग्य से भरे इस अभूतपूर्व दौर में सबसे ज्यादा जरूरत संयम और सहानुभूति का तालमेल रखते हुए उस दौर की वापसी का इंतजार करने की है जब सब कुछ फिर से सामान्य होगा। हड़बोंग में रिलीज कर करोड़ों कमाने की अंधी होड़ में कूदने से कोई लाभ नहीं होने वाला।

कोरोना ने जिस तरह एक नए चेहरे ओमीक्रॉन के साथ दस्तक दी है, उसने बॉलीवुड हो या हॉलीबुड सब को फिर से परेशान कर दिया है। मामले तेजी से बढ़े तो यह चिंता का कारण बनेगा। सप्ताहांत कर्फ्यू और लॉकडाउन की आशंकाओं के बीच व्यक्तिगत, पेशागत, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक- सभी मोर्चों पर यह चिंता दिखनी स्वाभाविक है। जाहिर है, बॉलीवुड भी ओमीक्रॉन के खतरे से दूर तो है नहीं। दुनिया की किसी भी चीज की तरह नए वायरस ने इसे भी तोड़ कर रख दिया है।

ओमीक्रॉन ऐसे समय में जब शूटिंग सहित सारा काम तय शुदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) से चल रहा हो, स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं कि किसी भी अन्य उद्योग की तुलना में फिल्मी दुनिया का भविष्य अभी सर्वाधिक अनिश्चय के दौर में है। यहां महज एक फिल्म नहीं बनती। एक फिल्म के सेट पर तमाम लोग साथ में काम करते हैं, वह भी बहुत करीब रहकर। कई बार लंबे समय तक और अक्सर बंद जगहों में भी। यह भी सही है कि फिल्म एक रचनात्मक माध्यम है और इसकी निर्माण प्रक्रिया में असीमित बंदिशें नहीं थोपी जा सकतीं। यहां सोशल डिस्टेन्सिंग का न्यूनतम इस्तेमाल ही हो सकता है और ऐसे में अपेक्षाकृत ज्यादा खतरा देखते हुए समस्या इस बार दोगुना बढ़ी हुई दिखती है।

समस्या इतनी ही नहीं है। फिल्म निर्माण के अलावा इसके प्रदर्शन का सवाल भी बड़ा है। स्क्रीनिंग सेक्टर को बीते दो सालों में जैसा झटका लगा, छुपा नहीं है। कितने ही सिंगल स्क्रीन सिनेमाहाल संघर्ष करते हुए टूट गए और शटर गिरा लिए। दूरदराज इलाकों में यह ज्यादा ही हुआ। बीते कुछ सालों में जो लोग स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म (ओटीटी) के संपर्क में आए, महामारी के दौरान पूरी तरह इनकी ओर शिफ़्ट हो गए। अब उन्हें यह घर बैठे इंटरटेनमेंट फायदे का सौदा भी लगने लगा है। ओटीटी के प्रति बढ़ता यह प्रेम इंडस्ट्री के लिए नए खतरे के तौर पर सामने आया है।

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