श्मशान की आड़ में एडीए की भूमि को कब्जाने में विफल

श्मशान की आड़ में एडीए की भूमि को कब्जाने में विफल रहने वाले दबंगों ने अब घूघरा में चारागाह भूमि की आड़ में दबाव बनाया। जबकि खुद दबंगों ने चारागाह भूमि पर मकान बना रखे हैं।

एस0 पी0 मित्तल

अजमेर के निकटवर्ती घूघरा गांव में दबंगों की दबंगई रुक नहीं रही है। एमडीएस यूनिवर्सिटी के निकट संस्कृति स्कूल के सामने जिस मार्ग को 200 फीट चौड़ा किया जाना है, वहां किनारे वाली भूमि पर ग्राम पंचायत की मदद से चारागाह भूमि के बोर्ड लगा दिए गए है। ताकि भूमि मालिकों पर दबाव बनाया जा सके। भूमि मालिकों पर दबाव बनाने के लिए ही पूर्व में संस्कृति स्कूल के सामने रातों रात एक बड़े भूखंड को श्मशान स्थल पर तब्दील कर दिया गया था। जबकि यह भूखंड अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) का है। एडीए ने पुलिस संरक्षण में जेसीबी से दबंगों द्वारा बनाई गई चारदीवारी के तोड़ दिया। श्मशान की आड़ में एडीए की भूमि पर कब्जा करने में विफल रहने के बाद दबंगों ने अब चारागाह भूमि की आड़ में दबाव बनाने का काम शुरू कर दिया है।

सवाल उठता है कि जिस मार्ग को मास्टर प्लान के अनुरूप 200 फिट चौड़ा किया जाना है, उस मार्ग के किनारे चारागाह भूमि के बोर्ड लगाने का क्या फायदा है। जानकारों की माने तो ग्राम पंचायत से ही जुड़े दबंगों ने खुद गांव की चारागाह भूमि पर पक्के मकान बनाकर कब्जे कर रखे हैं, यदि जिला प्रशासन घूघरा गांव की चारागाह भूमि की जांच पड़ताल कराए तो कई दबंगों की पोल खुल सकती है। इतना ही नहीं गांव के सार्वजनिक श्मशान स्थल की तीन बीघा भूमि पर भी ऐसे ही दबंगों ने कब्जे कर रखे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी श्मशान भूमि पर कब्जे की बात स्वीकार की गई है।

लेकिन ग्राम पंचायत से लेकर राजस्व महकमे तक में दबंगों का इतना डर और भय है कि उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं होती। दबंगों का उद्देश्य उन भूमि मालिकों को डराने धमका है, जिन्होंने पूर्व में भूमि खरीदी है। चूंकि अब ऐसी भूमि के दम बहुत बढ़ गए है, इसलिए दबंग दबाव बना रहे हैं। यह दबंगाई तब की जा रही है जब राज्य सरकार छोटे भूखंडधारियों के नियमन करने पर अनेक रियायत दे रही है। दबंगों की यह कार्यवाही सरकार की मंशा के विपरीत भी है। दबंगों के दखल की वजह से ही ग्राम पंचायत में भी नियमों के विरुद्ध संविदा पर कार्मिकों को रखा गया है।

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