‘विकसित भारत संकल्प’ की सिद्धि के लिए समृद्ध UP अनिवार्य : केन्द्रीय कृषि मंत्री

मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री ने उ0प्र0 कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केन्द्रीय व राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने उ0प्र0 के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लाण्ट सेन्टर स्थापित किए जाने की घोषणा की, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी प्रदान की।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी।

केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने आगामी जुलाई माह से प्रारम्भ होने वाले विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण) अर्थात वी0बी0-जी0राम जी0 के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्तर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उ0प्र0 के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लाण्ट सेन्टर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए केन्द्रीय मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।

केन्द्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित कृषि एवं विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।

विकसित भारत/2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि रोडमैप’ उ0प्र0 के लिए अत्यन्त उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध।

बैठक में अल नीनो की सम्भावित परिस्थितियों के दृष्टिगत उ0प्र0 में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तार से समीक्षा, जल संरक्षण, फसल प्रबन्धन, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों, आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी को और सुदृढ़ बनाने पर बल

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा : मुख्यमंत्री

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केन्द्रीय व राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लाण्ट सेन्टर स्थापित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे औद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।


केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत संकल्प’ की सिद्धि के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश जितनी तेजी से कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों की समृद्धि के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, विकसित भारत का लक्ष्य उतनी ही शीघ्रता से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केन्द्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय तथा साझा प्रयासों से इस राष्ट्रीय संकल्प को अवश्य पूरा करेंगी। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारु राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। कृषि, ग्रामीण विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन बदलते समय की चुनौतियों के बीच विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में गम्भीर मंथन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई है, ताकि कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।


केन्द्रीय कृषि मंत्री ने चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस सम्बन्ध में स्वीकृति का आशय पत्र मुख्यमंत्री जी को सौंपा। मुख्यमंत्री जी ने इसके लिए केन्द्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री जी को सौंपते हुए प्रदेश सरकार को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गरीब कल्याण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमन्द परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अगले चरण में भी सभी पात्र लाभार्थियों को पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।

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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्तर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लाण्ट सेन्टर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए भी केन्द्रीय मंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्री शिवराज सिंह चौहान जी का लम्बा एवं सफल अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की और आज उनके अनुभव, दूरदर्शिता तथा मार्गदर्शन का लाभ पूरे देश को प्राप्त हो रहा है।


केन्द्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित कृषि एवं विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत/2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई0सी0ए0आर0) द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि रोडमैप’ उत्तर प्रदेश के लिए अत्यन्त उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा। प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए केन्द्र और राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व तथा केन्द्र सरकार के सतत सहयोग से उत्तर प्रदेश विकसित कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक ने ‘विकसित कृषि/2047-उत्तर प्रदेश कार्ययोजना’ पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें जलवायु समावेशी विकास, कृषि विविधीकरण, संसाधन आधारित नियोजन, विज्ञान आधारित कृषि, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा सम्पूर्ण शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को विकसित कृषि का आधार बनाया गया है। बैठक में अवगत कराया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपये की है, जिसे वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण एवं उच्च उत्पादकता आधारित रणनीति के माध्यम से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वास्तविक कृषि वृद्धि दर को 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।


कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जनपद की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं बाजार की मांग के अनुरूप कृषि विविधीकरण को व्यापक स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। धान एवं गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही उत्पादन से विपणन तक सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित कर किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए।


रोडमैप में स्पष्ट किया गया कि राज्य में उत्पादन वृद्धि का सबसे बड़ा आधार उत्पादकता वृद्धि होगी। धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, फल एवं सब्जियों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जलवायु सहनशील किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबन्धन, सूक्ष्म सिंचाई, सटीक कृषि, आधुनिक यंत्रीकरण तथा डिजिटल कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जानी चाहिए। विभिन्न फसलों के वर्तमान उत्पादकता अंतर को कम करना विकसित कृषि की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।


आई0सी0ए0आर0 के महानिदेशक ने मक्का, दलहन, तिलहन, धान, गेहूं, गन्ना, फल एवं सब्जियों के लिए पृथक दीर्घकालिक विकास रणनीति प्रस्तुत की। इसमें मक्का में जलवायु अनुकूल संकर किस्मों, ड्रिप सिंचाई, प्रसंस्करण एवं मूल्य श्रृंखला विकसित करने, दलहन उत्पादन में धान परती क्षेत्रों, गन्ना आधारित अन्तरवर्ती खेती तथा वर्षा आधारित क्षेत्रों की सम्भावनाओं का उपयोग करने, तिलहन उत्पादन में उन्नत बीज, बीज प्रतिस्थापन, वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबन्धन एवं सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने तथा धान एवं गेहूं उत्पादन में जल संरक्षण, प्रत्यक्ष बुवाई, जीरो टिलेज तथा मौसम आधारित कृषि सलाह प्रणाली को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा की गई। कार्ययोजना में कृषि को अधिक लाभकारी एवं जलवायु अनुकूल बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को व्यापक स्तर पर अपनाने का सुझाव दिया गया। विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फसल उत्पादन के साथ डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम, वर्मी कम्पोस्ट तथा कृषि वानिकी को समाहित करने से किसानों की शुद्ध आय में 109 प्रतिशत से 162 प्रतिशत तक वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय विस्तार की सम्भावना व्यक्त की गई।


कार्ययोजना में कृषि यंत्रीकरण को वर्ष 2047 तक 75 प्रतिशत तक बढ़ाने, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इण्टरनेट ऑफ थिंग्स, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने की अनुशंसा की गई। प्रत्येक जनपद में डिजिटल कृषि एवं ए0आई0 प्लेटफॉर्म, प्रिसिजन एग्रीकल्चर प्रयोगशालाएं, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं, जैव संसाधन एवं जैव आदान केन्द्र तथा कृषि उद्यमिता एवं बिजनेस इन्क्यूबेशन केन्द्र स्थापित किए जाने का सुझाव भी दिया गया। फल, सब्जी, पुष्पोत्पादन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को कृषि विकास के नए इंजन के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों, शीत श्रृंखला, पैक हाउस, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा निर्यात अवसंरचना का व्यापक विस्तार कर कृषि को उत्पादन आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर मूल्य संवर्धन एवं निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित किए जाने की आवश्यकता बताई गई। अवगत कराया गया कि विकसित कृषि/2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केन्द्र एवं राज्य सरकार, कृषक उत्पादक संगठनों तथा निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से उत्पादन, उत्पादकता, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात तथा जलवायु अनुकूल कृषि विकास को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


प्रमुख सचिव, कृषि, उत्तर प्रदेश ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न केन्द्रीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। समीक्षा के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कृषि विविधीकरण एवं उत्पादकता वृद्धि पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वॉयल हेल्थ कार्ड केवल बनाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपने खेत की मृदा की वास्तविक स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के सम्बन्ध में भी जागरूक किया जाए, ताकि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रभावी उपयोग कर सकें।


केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने अधिकाधिक किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए बैंकों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। विकसित भारत अभियान के अन्तर्गत जल संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्रिटिकल ब्लॉकों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संचयन के कार्य मिशन मोड में संचालित किए जाएं। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने प्रदेश को आश्वस्त किया कि उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।


उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने एफ0डी0आर0 तकनीक के उपयोग से लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बचत की है। यह तकनीक न केवल लागत में कमी लाने में सहायक सिद्ध हुई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल है। उन्होंने इस नवाचार के लिए प्रदेश को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने का आग्रह किया, जिस पर केन्द्रीय कृषि मंत्री ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।


केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने आगामी जुलाई माह से प्रारम्भ होने वाले विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण) अर्थात् वी0बी0-जी0राम जी0 के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, जल संरक्षण तथा टिकाऊ परिसम्पत्तियों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी। उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्ववर्ती मनरेगा के लम्बित देयों के भुगतान हेतु भारत सरकार को तत्काल प्रस्ताव प्रेषित किया जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार का विलम्ब न हो और नई योजना का क्रियान्वयन निर्बाध रूप से प्रारम्भ किया जा सके।


बैठक में अल नीनो की सम्भावित परिस्थितियों के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान जल संरक्षण, फसल प्रबन्धन, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। साथ ही किसानों के हितों की रक्षा के लिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्ययोजना अपनाने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की गई।इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर तथा भारत सरकार व प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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