
ब्रिटेन के वेल्स प्रांत की राजधानी कार्डिफ में स्थित ऐतिहासिक ‘कार्डिफ कैसल’ (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर ब्रिटिश राजनीति में एक बड़ा सियासी संग्राम छिड़ गया है। दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों ने इसे ब्रिटिश संस्कृति पर कब्जा करने का प्रयास करार दिया है, जबकि स्थानीय प्रशासन और अन्य नेताओं ने इसे बहुसांस्कृतिक समाज के सम्मान और विविधता के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है।यह पूरा विवाद तब गरमाया जब सितंबर 2026 की शुरुआत में रिफॉर्म पार्टी के स्थानीय काउंसलर ओवेन क्लैटवर्थी ने कार्डिफ कैसल के ऊपर लहराते पाकिस्तानी झंडे की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। देखते ही देखते यह तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई।
इसके बाद रिफॉर्म यूके के वेल्श नेता डैन थॉमस और रिफॉर्म पार्टी के आर्थिक प्रवक्ता रॉबर्ट जेनरिक सहित कई बड़े नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने आरोप लगाया कि देश के ऐतिहासिक स्थलों पर किसी विदेशी झंडे का फहराया जाना ब्रिटिश पहचान और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश है। सोशल मीडिया पर लोग इस बात को लेकर भी आक्रोशित दिखे कि जहां एक तरफ ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में राष्ट्रीय ध्वज हटाने की बातें होती हैं, वहीं एक ऐतिहासिक किले पर विदेशी झंडे को जगह दी जा रही है।पार्टी के वरिष्ठ सांसद रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सीधे तौर पर सवाल उठाया, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है।
हम अपनी संस्कृति पर हावी होने की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? रिफॉर्म वेल्स के प्रवक्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि ब्रिटेन के ऐतिहासिक स्थलों पर केवल वेल्श ड्रैगन (वेल्स का राष्ट्रीय ध्वज) या यूनियन जैक (ब्रिटेन का राष्ट्रीय ध्वज) ही फहराया जाना चाहिए, इसके अलावा किसी और झंडे की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।चौतरफा घिरने के बाद कार्डिफ काउंसिल के लेबर पार्टी नेता क्रिस वीवर ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह झंडा इस साल अगस्त में पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्थानीय पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मानित करने के लिए दो दिनों के लिए फहराया गया था। उन्होंने यह भी साफ किया कि इसी तरह 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस पर भारत का तिरंगा भी किले पर फहराया गया था।वहीं लोकल प्रशासन के अनुसार, कार्डिफ कैसल पर विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों पर झंडा फहराना काउंसिल की एक पुरानी और स्थापित परंपरा रही है।
इस दौरान ब्रिटेन और वेल्स के राष्ट्रीय झंडे भी अपनी जगह पर पूरी गरिमा के साथ मौजूद थे।वेल्स की कंजर्वेटिव पार्टी की सदस्य नताशा असगर ने भी रिफॉर्म पार्टी के रुख की आलोचना की और कहा कि इस तरह के आयोजन कब्जा करने की मानसिकता नहीं, बल्कि शहर में रहने वाले विभिन्न समुदायों के प्रति सम्मान और समावेशन का प्रतीक हैं। उन्होंने रिफॉर्म पार्टी पर जानबूझकर नस्लीय और सामाजिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया।कुल मिलाकर, कैसल का यह विवाद केवल एक झंडे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने ब्रिटेन में लंबे समय से चल रही प्रवासन और राष्ट्रीय पहचान की बहस को एक बार फिर हवा दे दी है। एक तरफ जहां लिबरल और सत्ताधारी दल इसे एक आधुनिक, बहुसांस्कृतिक और समावेशी ब्रिटेन की बानगी मान रहे हैं, वहीं दक्षिणपंथी ताकतें इसे अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ मानकर इसका कड़ा विरोध कर रही हैं। फिलहाल इस मामले ने वेल्स और पूरे यूके की राजनीति के तापमान को काफी बढ़ा दिया है।



