मुख्यमंत्री ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का किया सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ने जनपद गाजीपुर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। 05 तहसीलों के बाढ़ से प्रभावित 350 परिवारों को राहत सामग्री का वितरण। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ जनपद गाजीपुर के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। आपदा के समय प्रदेश सरकार आपके साथ खड़ी, प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधि जनता-जनार्दन की सेवा में तत्पर। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के प्रत्येक गाँव का निरीक्षण करने,पर्याप्त राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश।

गाजीपुर/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी ने जनपद गाजीपुर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया तथा अष्ट शहीद इण्टर कॉलेज, मुहम्मदाबाद में 05 तहसीलों के बाढ़ से प्रभावित 350 परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपदा के समय प्रदेश सरकार आपके साथ खड़ी है। प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधि भी जनता-जनार्दन की सेवा में तत्पर हैं। डबल इंजन की सरकार बाढ़ प्रभावितों को युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने का कार्य कर रही है। सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15 दिनों के लिए तेल, नमक, मसाले, मोमबत्ती, दियासलाई, आलू, लाई, चना आदि किट के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी दलहन एवं तिलहन आदि बोने का समय है। राज्य सरकार द्वारा सभी लघु, सीमान्त और अन्य प्रभावित किसानों को सब्जी आदि के बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं। कल उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 2,000 कुन्तल तोरिया के बीज किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। दलहन और तिलहन के बीजों को उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया है।


प्रदेश में वर्षा औसत से कम हुई है। लेकिन बाढ़ की यह समस्या राजस्थान व मध्य प्रदेश से अतिरिक्त जल छोड़ने के कारण उत्पन्न हुई है। राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में बहुत बारिश हुई है। राजस्थान से 26 लाख क्यूसेक तथा मध्य प्रदेश से 04 लाख क्यूसेक से अधिक जल छोड़े जाने के कारण चम्बल, बेतवा एवं अन्य सहायक नदियोें के जल स्तर में वृद्धि हुई है, जिसके कारण यमुना जी व गंगा जी में भीषण जल प्लावन की समस्या खड़ी हो गयी है। बाढ़ विगत वर्ष से काफी कम है, लेकिन पहले से ही कम वर्षा के कारण पीड़ित किसानों के लिए अचानक बाढ़ आने से जल प्लावन की स्थिति कुछ क्षेत्रों में हुई है। प्रदेश के लगभग 1100 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जनपद गाजीपुर के 33 गांवों के 7,000 से अधिक परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। इन्हें अलग-अलग राहत कैम्पों में या गांवों में उनके घरों तक राशन एवं भोजन सामग्री उपलब्ध कराकर प्रशासन सहायता कार्य कर रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रदेश सरकार के मंत्रिगण द्वारा जनपद-इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, प्रयागराज का दौरा कल किया गया है और आज वे स्वयं गाजीपुर और वाराणसी के दौरे पर आये हैं।

डबल इंजन की सरकार बाढ़ प्रभावितों को युद्धस्तरपर राहत पहुंचाने का कार्य कर रही। सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15 दिनों के लिए तेल, नमक, मसाले, मोमबत्ती, दियासलाई, आलू, लाई, चना आदि किट के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा। सभी लघु, सीमान्त और अन्य प्रभावित किसानों को सब्जी आदि केबीज उपलब्ध कराये जा रहे, किसानों को 2,000 कुन्तल तोरिया के बीज निःशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था। जनपद गाजीपुर में 288 नौकाओं और एस0डी0आर0एफ0 तथा पी0ए0सी0 की फ्लड यूनिट तैनात, 31 गोताखोर और 178 आपदा मित्र बाढ़ प्रभावितांे की सेवा में समर्पित। बाढ़ का पानी कम होने पर स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा बाढ़ प्रभावितों को हर हाल में समय से राहत सामग्री प्रदान की जाए।


प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नौकाओं की व्यवस्था की गयी है। जनपद गाजीपुर में जिला प्रशासन द्वारा 288 नौकाओं की व्यवस्था की गयी है। एस0डी0आर0एफ0 तथा पी0ए0सी0 की फ्लड यूनिट को भी यहां पर तैनात किया गया है। 31 गोताखोरों और 178 आपदा मित्रों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनता की सेवा के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा कि 5,000 से अधिक पशुधन भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें विभिन्न राहत शिविरों में भूसा आदि देने की कार्यवाही की जा रही है। सभी क्षेत्रों में एण्टी स्नेक वेनम और एण्टी रैबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायी गयी है।


मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ जनपद गाजीपुर के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के चारे, भूसे तथा टीकाकरण, दवाओं की समुचित व्यवस्था की जाए तथा जिन ग्रामों में अभी भी बाढ़ का पानी है, वहां के निवासियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। पानी से घिरे गांवों के निवासियों को राहत शिविर के माध्यम से राहत पैकेट वितरित किए जाएं। उन्होंने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के प्रत्येक गंाव का निरीक्षण करने तथा वहां पर्याप्त राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बाढ़ का पानी कम होने पर स्वच्छता व सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा बाढ़ प्रभावितों को हर हाल में समय से राहत सामग्री प्रदान की जाए। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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