विशेष
विशेष,विशेषता से युक्त,विशिष्ट,असाधारण ।विशेष का मतलब विशेष बेस्ट होता है। विशेष का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब विशेष बेस्ट है। जिसे काफी अच्छा माना जाता है। साहस एक ऐसा मूल्य है जो विषय को उनके डर को दूर करने और प्रतिकूलताओं को दूर करने के लिए नेतृत्व करता है, जो आमतौर पर सार्थक है।
जब व्यक्ति में साहस नहीं होता है, तो वह मुश्किल क्षणों को पार नहीं कर सकता है। असाधारण साहस का प्रदर्शन तब किया जाता है। जब व्यक्ति अपनी सीमाओं से परे जाने या सामान्य माना जाता है। तथ्य यह है कि एक व्यक्ति यह दर्शाता है कि साहस सभी सामान्यता से बाहर है। जो इसे बहुत अलग तरीकों से पहचानता है। इस प्रकार, दुनिया भर में, ऐसे पुरस्कार और पुरस्कार हैं जिनका स्पष्ट उद्देश्य है।शौर्य के विपरीत कायरता है, जो साहस और साहस की कमी है।
यदि कोई ऐसा बच्चा है जो किसी विषय की आंखों के सामने डूब रहा है जो तैरना जानता है, तो बहादुरी से उस व्यक्ति को बचाव की कोशिश करने के लिए खुद को पानी में फेंकने की अनुमति होगी, जबकि कायरता व्यक्ति को बिना हस्तक्षेप किए देखती रहेगी। आज के इस युग में कंप्यूटर का विशेष महत्व है। पिछले कुछ वर्षों से जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का इस्तेमाल होता आ रहा है।
आज के आधुनिक जीवन में मनुष्य जन-जन के सम्पर्क में कंप्यूटर की वजह से ही है। वर्तमान युग में आप कंप्यूटर चलाना जानते हैं। कंप्यूटर ज्ञान से आप अपने बिजनेस, रोजगार को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। किसी भी प्रकार की गणना का कार्य कंप्यूटर की मदद से चंद सेकंडों में कर सकते हैं।
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दिव्यांगजनों को निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग उ0प्र0 द्वारा दिव्यांगजनों को निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण।लखनऊ। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी लखनऊ श्री कमलेश कुमार वर्मा…
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नवचयनित अधिकारियों के नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री उ0प्र0 लोक सेवा आयोग एवं उ0प्र0 अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा नवचयनित अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को…
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उत्तर प्रदेश में आरक्षण नियमावली का उल्लंघन-लौटनराम निषाद
स्वास्थ्य कार्यकर्ता(महिला) भर्ती में ओबीसी,एससी कोटे की हकमारी ,यूपीएसएसएससी ने उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली का किया उल्लंघन। लखनऊ। उत्तर प्रदेश…
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प्रत्येक बालक को ईश्वर भक्त बनायें….!
इस प्रकार प्रत्येक बालक की आत्मा जन्म से ही पवित्र और अकलुषित होती है और शुद्ध, दयालु तथा ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित होने के कारण बालक जन्म के समय से ही परमात्मा के अनन्त साम्राज्य का मालिक होता है। यदि बाल्यावस्था से बच्चों के संस्कार तथा आचरण में इन गुणों को विकसित करने के स्थान पर धूमिल करने का प्रयास माता-पिता, समाज तथा स्कूल द्वारा किया जायेगा तो यह बालक की आध्यात्मिक मृत्यु के समान है,इसलिए परिवार, समाज तथा स्कूल का वातावरण भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक गुणों के विकास के अनुकूल होना चाहिए। प्रत्येक बालक पृथ्वी पर ‘ईश्वर का अवतरण हैः- प्रत्येक बालक (अ) पवित्र (ब) दयालु तथा (स) प्रकाशित हृदय तीनांे…
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जाति नहीं जाती….
जाति नहीं जाती। प्रेम का प्यासा मानव मन है, जाति घृणा उपजाती है। मेरे देश की सारी जनता, जाति पर…
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10 प्रान्तों के मुख्यमंत्री ने श्रीराम लला मंदिर में दर्शन पूजन किया
अयोध्या। आज अयोध्या धाम में भारतीय गणराज्य के लगभग 10 प्रान्तों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री ने आज अयोध्या भ्रमण किया तथा…
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मसाला-मठरी केन्द्र में कार्यरत कामगारों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण हेतु लगाये गये कैम्प का शुभारम्भ-डॉ0 अर्चना तिवारी
मसाला-मठरी केन्द्र में कार्यरत कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान किये जाने के उद्देश्य से ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हेतु पंजीकरण…
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पाँच दिवसीय ‘जियोफेस्ट इण्टरनेशनल-2021’ आज से शुरू
पाँच दिवसीय ‘जियोफेस्ट इण्टरनेशनल-2021’ आज से शुरू,प्रकृति प्रेम व शुद्ध पर्यावरण का ज्ञान बच्चों को शुरू से ही करायें ।…
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राजनीतिक दलों ने सिर्फ समझा वोटबैंक, नहीं दिया राजनीतिक सम्मान-लौटनराम निषाद
209 विधानसभा क्षेत्रों में 30 हजार से 1.15 हजार निषाद मतदाता,”राजनीतिक दलों ने सिर्फ समझा वोटबैंक, नहीं दिया राजनीतिक सम्मान-लौटनराम…
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SGPGI लखनऊ में विकास की अपार संभावनाएं-मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्ट्यिूट ऑफ मेडिकल साइन्सेज, लखनऊ के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यक्रम…
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