राष्ट्रीय
संवैधानिक रूप से भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को अशोक स्तंभ को अपना राष्ट्रीय चिन्ह अपनाया था। इसे शासन,संस्कृति और शांति का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया था। अशोक स्तंभ को संस्कृति और शांति का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया।
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर बसे विविध पृष्ठभूमियों के भारतीय इन राष्ट्रीय प्रतीकों पर गर्व करते हैं। प्रत्येक भारतीय के हृदय में गौरव और देश भक्ति की भावना का संचार करते हैं।भारतीय पहचान और विरासत का मूलभूत हिस्सा हैं।
प्रधानमंत्री संसद भवन की नई बिल्डिंग की छत पर करीब 20 फीट ऊंचे कांसे के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ का अनावरण किया। राष्ट्रीय प्रतीक भारतीय पहचान और विरासत का मूलभूत हिस्सा हैं।
विश्व भर में बसे विविध पृष्ठभूमियों के भारतीय इन राष्ट्रीय प्रतीकों पर गर्व करते हैं। क्योंकि वे प्रत्येक भारतीय के हृदय में गौरव और देश भक्ति की भावना का संचार करते हैं। भारत का राजकीय प्रतीक है अशोक चिह्न। इसको सारनाथ स्थित राष्ट्रीय स्तंभ का शीर्ष भाग राष्ट्रीय प्रतिज्ञा चिह्न के रूप में लिया गया है।
मूल रूप इसमें चार शेर हैं जो चारों दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े हैं। इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी के एक दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और एक सिंह बने हैं।
विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से भारतीय सभ्यता एक है। जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। भारतीय सभ्यता बदलते समय के साथ अपने-आप को ढ़ालती भी आई है।
आज़ादी पाने के बाद भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है।भारत कृषि में आत्मनिर्भर बन चुका है और अब दुनिया के सबसे औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में भी इसकी गिनती की जाती है। विश्व का सातवां बड़ा देश होने के नाते भारत शेष एशिया से अलग दिखता है।
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