शुभ दीवाली आ गई, झूम रहा संसार। माँ लक्ष्मी का आगमन, सजे सभी घर-द्वार।।
सुख-वैभव सबको मिले, मिले प्यार-उपहार।सच में सौरभ हो तभी, दीपावली त्योहार।।
दीवाली का पर्व यह, हो सौरभ तब खास। आँगन झोंपड़ियों के भी, महलों को दें आस।।
जिनके स्वच्छ विचार हैं, प्रेमपूर्ण व्यवहार। उनके जीवन में सदा, दीपावली त्योहार।।
दीवाली उनकी मने, सुखी रहे परिवार। दीप बेचकर जो करे, सौरभ घर उजियार।।
मैंने उनको भेंट की, दीपावली और ईद। जान देश पर कर गए, जो वीर जवान शहीद।।
फीके-फीके हो गए, त्योहारों के रंग।दीप दिवाली के बुझे, होली भी बेरंग।।
नेह भरे मोती नहीं, खाली मन का सीप। सूख गई हैं बातियाँ, जलता कैसे दीप।।
बाती रूठी दीप से, कैसे हो प्रकाश। बैठा मन को बाँधकर, अँधियारे का पाश।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ



