चुनाव ख़त्म होते ही याद आ गया ‘संकट’

राकेश यादव
राकेश यादव

चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं सारी पाबंदियां। चुनाव ख़त्म होते ही याद आ गया ‘संकट’।चुनाव के दौरान जनता को राहत और विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जैसे ही मतदान समाप्त हुआ, सरकार को अचानक आर्थिक संकट, खर्चों पर रोक और सख्त पाबंदियों की याद आ गई। सवाल यह उठता है कि अगर हालात इतने गंभीर थे तो जनता से यह सच पहले क्यों छिपाया गया? क्या चुनावी माहौल में सिर्फ लोकप्रियता बचाने के लिए फैसले टाले गए? अब जब चुनाव खत्म हो चुके हैं, तो आम आदमी पर बोझ बढ़ाने वाले कदम तेज़ी से सामने आ रहे हैं, जिससे सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर बहस छिड़ गई है।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! उन्होंने कहा कि दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है ‘भाजपा’। श्री यादव ने कहा कि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।

अखिलेश यादव ने कहा कि सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक। श्री यादव ने कहा कि वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे?

भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं है।अखिलेश यादव ने कहा अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें।

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