निषाद पार्टी मुखिया ने भाजपा प्रवक्ता-लौटनराम निषाद

मझवार के सम्बंध में आरजीआई द्वारा दिया जवाब सरकार करे उजागर। निषाद पार्टी मुखिया बन गए हैं भाजपा के प्रवक्ता।

लखनऊ। तथाकथित 18 ओबीसी जातियों को एससी दर्जा का लाभ देने के मुद्दे पर राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौ.लौटनराम निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया है।उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद भाजपा प्रवक्ता बन सपा सरकार को झूठाआरोपित कर रहे हैं,यह दलाली पूर्ण राजनीति का प्रमाण है।संजय निषाद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मुख्यमंत्री व सरकारी प्रवक्ता की तरह आधारहीन बातें कर समाज को गुमराह कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने 21/22 दिसम्बर व 31 दिसम्बर,2016 को जो अधिसूचना जारी किया था, वह 17 अतिपिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने के लिए नहीं बल्कि परिभाषित करने के लिए किया था। मल्लाह,केवट,बिन्द, धीवर, धीमर, कहार, गोड़िया,तुरहा, बाथम,रैकवार,भर,राजभर,कुम्हार, प्रजापति आदि 17 अतिपिछड़ी जातियाँ 10 अगस्त,1950 से अनुसूचित जाति में शामिल मझवार,तुरैहा,गोंड़, पासी,शिल्पकार, बेलदार की ही पर्यायवाची व वंशानुगत जातियाँ हैं।

उन्होंने कहा कि जब सपा सरकार ने गलत अधिसूचना जारी किया था,तो उसी की हूबहू नकल कर भाजपा सरकार ने 24 जून,2019 को क्यों जारी किया?5 वर्षों तक भाजपा सरकार ने उच्च न्यायालय में काउंटर एफिडेविट दाखिल क्यों नहीं किया।अखिलेश यादव की सरकार ने जो अधिसूचना जारी किया था, उस पर 24 जनवरी,2017 को स्टे ऑर्डर हो गया और राष्ट्रीय निषाद संघ के अधिवक्ता सुनील कुमार तिवारी ने साक्ष्य के साथ मुख्य न्यायाधीश की पीठ में अपना पक्ष रखा तो न्यायालय ने 29 मार्च,2017 को स्टे वैकेट करते हुए सरकार से जाति प्रमाण पत्र जारी कराने का अंतरिम निर्णय दिया तो भाजपा सरकार ने निर्णय के आलोक में आदेश जारी न कर नया शासनादेश क्यों जारी किया?


निषाद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी लाभ के लिए 20 दिसम्बर,2021 को मझवार की पर्यायवाची जातियों के सम्बंध आरजीआई को पत्र भेजवाये थे।आरजीआई ने क्या जानकारी दिया, उसे अभी तक उजागर क्यों नहीं किया गया?सेन्सस-1961 में आरजीआई/सेन्सस कमिश्नर (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा जारी परिपत्र में अनुसूचित जातियों की सूची के क्रमांक-51 पर अंकित मझवार की पर्यायवाची व वंशानुगत जाति नाम मल्लाह,केवट,माँझी, मुजाबिर, राजगौड़, गोंड़ मझवार का स्पष्ट उल्लेख है।पुराने से पुराने अभिलेख में मझवार,माँझी, मल्लाह,केवट,बिन्द, गोड़िया,तुरहा, धीमर,धीवर, कहार,गोंड़,खैरहा,खोरोट,बेलदार,तुरैहा, तुराहा आदि को एक दूसरे से सम्बंधित लिखा गया है।उन्होंने संजय निषाद पर परिवारवादी व गुलामगिरी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले उत्तर प्रदेश सरकार से माँग क्यों करते थे? अनुसूचित जाति में शामिल करने या परिभाषित करने का अधिकार भारत की संसद के पास निहित है।जिसके लिए आरजीआई व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सहमति से संविधान के अनुच्छेद-341(1),(2) में संशोधन करने के लिए विधेयक पारित करना होता है।


निषाद ने कहा कि निषाद,बिन्द,कश्यप समाज को ओबीसी कोटा में कोटा नहीं,अनुसूचित जाति आरक्षण का राजपत्र व शासनादेश चाहिए।उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से 17 सितंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विधानसभा व विधान परिषद में प्रस्ताव पारित कर कैबिनेट के निर्णय के आधार पर केन्द्र सरकार को विधिसम्मत प्रस्ताव भेजकर संसद के शीतकालीन सत्र में बिल पास कर अनुसूचित जाति आरक्षण के अधिकार की मांग किया है।जब निषाद/मछुआ समुदाय भाजपा सरकार व निषाद पार्टी के किसी बहकावे में नहीं आएगा।उन्होंने बताया कि 7 जून,2015 को कसरवल निषाद आरक्षण आंदोलन में साज़िश के तौर पर इटावा निवासी युवक अखिलेश निषाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से इस घटना की सीबीआई से जाँच कराने की मांग की है।

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