स्वच्छता बीमारियों से बचाव का सहज माध्यम-मुख्यमंत्री

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संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफलता के लिए अंतर्विभागीय समन्वय महत्वपूर्ण आधार।मुख्यमंत्री ने संचारी रोग नियंत्रण के सम्बन्ध में अन्तर्विभागीय बैठक की अध्यक्षता की।प्रतिवर्ष अप्रैल, जुलाई तथा अक्टूबर माह में संचारी रोगों पर प्रभावीनियंत्रण के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय के साथ विशेष अभियानसंचालित होता है, आगामी 01 जुलाई से इसका नवीन चरण प्रारम्भ हो रहा।अभियान को सफल एवं प्रभावी बनाना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी।प्रदेश में इंसेफेलाइटिस नियंत्रण और कोविड प्रबंधन के दो सफल मॉडल,जो संचारी रोग नियंत्रण अभियान में हमारे लिए उपयोगी होंगे।इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के बाद अब हमारा लक्ष्य इस बीमारी का उन्मूलन पीडियाट्रिक आई0सी0यू0 के सफल संचालन के लिए डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, स्टाफ नर्सेज तथा ए0ई0एस0 और जे0ई0 प्रयोगशालाओं में टेक्नीशियनकी पर्याप्त संख्या रखने एवं उनके प्रशिक्षण के निर्देश।आशा, आंगनबाड़ी के साथ-साथ ग्राम प्रधानों को भी संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफलता के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।प्रदेश में मलेरिया और कालाजार रोग समाप्ति की ओर संचारी रोग नियंत्रण के लिए सघन वेक्टर सर्विलांस जरूरी।ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी के बीच वाले तालाबों कोअपशिष्ट, तथा प्रदूषण मुक्त रखने के नियोजित प्रयास किए जाएं।स्वच्छता की आदत अनेक बीमारियों से बचाव का सहज माध्यम स्कूल चलो अभियान को प्रभावी बनाएं, इसके अन्तर्गतप्रत्येक परिवार तक पहुंचे, एक भी घर न छूटे।प्रकृति संरक्षण की भारतीय संस्कृति की भावना के साथवृक्षारोपण महाभियान को जनांदोलन बनाने की आवश्यकता।आगामी जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

लखनऊ। मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर संचारी रोग नियंत्रण के सम्बन्ध में आयोजित अन्तर्विभागीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष अप्रैल, जुलाई तथा अक्टूबर माह में संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय के साथ विशेष अभियान संचालित होता है। आगामी 01 जुलाई से इसका नवीन चरण प्रारंभ हो रहा है। इस अभियान को सफल एवं प्रभावी बनाना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसकी सफलता के लिए सरकार के प्रयास के साथ-साथ जनसहभागिता भी महत्वपूर्ण है। इनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, पाथ जैसी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस नियंत्रण और कोविड प्रबंधन के दो सफल मॉडल हैं, जो संचारी रोग नियंत्रण अभियान में हमारे लिए उपयोगी होंगे।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफलता के लिए अंतर्विभागीय समन्वय महत्वपूर्ण आधार है। इस सम्बन्ध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, नगर विकास, महिला एवं बाल विकास, कृषि, बेसिक शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा विभागों द्वारा अन्तर्विभागीय समन्वय के माध्यम से स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रभावी प्रयास किये जाएं।पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में इंसेफेलाइटिस से प्रति वर्ष हजारों बच्चों की मौत होती थी। वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार द्वारा अन्तर्विभागीय समिति बनाकर एक साथ मिलकर काम किया। इसके लिए इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, अस्पताल, पीकू, मिनी पीकू बनवाकर चिकित्सक नियुक्त किये गये। साथ ही, शुद्ध पेयजल, शौचालय, सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गयी। परिणामस्वरूप आज इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में 95 प्रतिशत की कमी आयी है। इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के बाद अब हमारा लक्ष्य इस बीमारी का उन्मूलन है।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बस्ती-गोरखपुर मंडल के जनपदों सहित प्रदेश के 38 जनपदों में जापानी इंसेफेलाइटिस का प्रभाव रहा है। इनमें 18 जनपद हाई रिस्क के हैं। यद्यपि बीते 05 वर्ष में जे0ई0 से असमय मृत्यु में 95 प्रतिशत तक गिरावट आयी है, किन्तु हमें अभी भी सतर्क व सावधान रहना होगा। उन्होंने जनपदों में पीडियाट्रिक आई0सी0यू0 के सफल संचालन के लिए डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, स्टाफ नर्सेज तथा ए0ई0एस0 और जे0ई0 प्रयोगशालाओं में टेक्नीशियन की पर्याप्त संख्या रखने एवं उनके प्रशिक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आशा, आंगनबाड़ी के साथ-साथ ग्राम प्रधानों को भी इस अभियान की सफलता के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। अभियान के दौरान मंत्रिगण जनपदों में उपस्थित रहेंगे तथा आमजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग करेंगे। इन कार्यक्रमों में नोडल अधिकारियों की सहभागिता भी रहे।विगत वर्षाें के अनुभव बताते है कि जनपद लखनऊ, फिरोजाबाद, मथुरा, आगरा, बरेली, पीलीभीत और कानपुर नगर डेंगू से प्रभावित रहे हैं, जबकि बरेली, सोनभद्र, बदायूं और मिर्जापुर जनपदों में मलेरिया का असर रहा है। सिद्धार्थनगर, भदोही, मिर्जापुर, गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ जनपदों में दस्त, हैजा आदि जलजनित रोग और बाराबंकी, बलिया, वाराणसी, फतेहपुर और लखनऊ जनपदों में चिकेनपॉक्स के मरीज मिलते रहे हैं। इसी प्रकार फिरोजाबाद, मथुरा, ललितपुर, झांसी और गोरखपुर मण्डल के जनपदोें में स्क्रब टाइफस तथा लेप्टोस्पायरोसिस का प्रभाव देखा गया है।


प्रदेश में मलेरिया और कालाजार रोग समाप्ति की ओर है। राज्य में प्रति 1,000 की जनसंख्या पर एक से भी कम व्यक्ति में मलेरिया की समस्या देखी गयी है, जबकि कालाजार रोग 22 चिन्हित ब्लॉकों में प्रति 10,000 की आबादी में एक से कम व्यक्ति में ही देखा गया है। यह बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी ने टीम यू0पी0 को बधाई देते हुए कहा कि शीघ्र ही हमारा प्रदेश कालाजार मुक्त हो जाएगा और मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण भी हो जाएगा।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि शूकर बाड़ों को यथासम्भव आबादी से दूर व्यवस्थापित किये जाएं। इनमें कीटनाशक का छिड़काव किया जाए। स्क्रब टाइफस बीमारी से बचाव के लिए शहरों/गांवों में झाड़ियों की साफ-सफाई/कटाई करा ली जाए। यह झाड़ियां चूहों के लिए सुरक्षित स्थल बनती हैं और बीमारी का प्रसार करती हैं। उन्होंने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण के लिए सघन वेक्टर सर्विलांस जरूरी है। रोगियों तथा लक्षणयुक्त व्यक्तियों की त्वरित जांच तथा आइसोलेशन की समुचित व्यवस्था की जाए। आशा कार्यकर्त्रियों को मलेरिया की जांच करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। रोगियों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता रहे। एम्बुलेंस का रिस्पांस टाइम न्यूनतम रखा जाए। सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया जाए। आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिया जाए।


कम्युनिटी हेल्थ सर्विसेज को त्वरित आउटब्रेक रिस्पॉन्स के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। त्वरित आउटब्रेक रिस्पॉन्स के लिए डिजीज सर्विलांस डेटा तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जाए। फ्रंट लाइन वर्कर्स द्वारा चिन्हित क्षय रोग लक्षण युक्त व्यक्तियों के उपचार की समुचित व्यवस्था कराई जाए।ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी के बीच वाले तालाबों को अपशिष्ट तथा प्रदूषण मुक्त रखने के नियोजित प्रयास किए जाएं। विगत वर्षों के अनुभव के आधार पर चिन्हित हाई रिस्क क्षेत्रों में तथा दस्तक अभियान के दौरान टीमों के द्वारा घर-घर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित अधिक मच्छर/लार्वा घनत्व वाले क्षेत्रों में फॉगिंग आदि के माध्यम से मच्छर नियंत्रण के प्रयास किये जाएं। स्वच्छता की आदत अनेक बीमारियों से बचाव का सहज माध्यम है। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया जाए। इस सम्बन्ध में स्कूलों में वाद-विवाद, निबंध, पर्यावरणीय स्वच्छता, प्रश्नोत्तरी आदि विषयक प्रतियोगिताएं करायी जाएं। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम के दृष्टिगत नालों की सफाई करा ली जाए। उनमें सिल्ट जमा न हो, जिससे बारिश में जलभराव से बचा जा सके। मलिन बस्तियों में साफ-सफाई की अत्यधिक आवश्यकता है। यहां नियमित फॉगिंग भी कराई जाए। सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए ठोस प्रयास करें। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। लोगों के सामने क्लोरीनेशन डेमो दिया जाए। पानी उबाल कर तथा छान कर पीने की जानकारी दी जाए। क्लोरीन की गोलियां वितरित की जाएं।


स्कूल चलो अभियान को प्रभावी बनाएं। इसके अन्तर्गत प्रत्येक परिवार तक पहुंचे, एक भी घर न छूटे। कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे। यह सुनिश्चित कराएं की यूनिफॉर्म की धनराशि से वह गणवेश खरीदें। प्रत्येक  बच्चा गणवेश में ही विद्यालय आए। प्रकृति संरक्षण की भारतीय संस्कृति की भावना के साथ वृक्षारोपण महाभियान को जनांदोलन बनाने की आवश्यकता है। आगामी जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में वृहद वृक्षारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस सम्बन्ध में विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर लिया जाए। यह अभियान अपने उद्देश्यों में सफल हो, इसके लिए सभी जरूरी प्रयास किये जाएं।इसके पूर्व अपर मुख्य सचिव चिकित्सा श्री अमित मोहन प्रसाद द्वारा संचारी रोग नियंत्रण अभियान के सम्बन्ध में एक प्रस्तुतीकरण दिया गया।इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव एम0एस0एम0ई0 एवं सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला, अपर मुख्य सचिव डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार एवं सूचना निदेशक श्री शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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