लोकतंत्र बचाओ यात्रा असल में भाजपा से लोकतंत्र बचाओ यात्रा है। भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, गृह मंत्री और कृषि मंत्री जिस यात्रा में शामिल हो रहे हैं, वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ निकाली जा रही है। भाजपा की लोकतंत्र बचाओ यात्रा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में और देश के प्रजातंत्र के खिलाफ है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्राओं पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ये यात्राएं लोकतंत्र के खिलाफ हैं, क्योंकि एसआईआर के नाम पर करोड़ों वोट काट दिए गए हैं।
श्रीमती मोना ने कहा कि इस यात्रा में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन गोरखपुर में, पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा बरेली में और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान लखनऊ में उतरे। गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद और करनाल में इसी अभियान का हिस्सा बने। कांग्रेस का आरोप है कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा और ज्ञानेश कुमार का वोट काटना, दोनों आदित्यनाथ की रेजिम चेंज के लिए हैं। एसआईआर के पीछे नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी, राहुल गांधी जी और प्रियंका गांधी जी के नेतृत्व में हम सब वोट चोरों के खिलाफ इस प्रजातंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें विश्वास है कि देश यह लड़ाई जीतेगा और हम प्रजातंत्र की पुर्नस्थापना में कामयाब होंगे।
बाबा साहेब की चेतावनी
श्रीमती मिश्रा ने संविधान सभा में 16 जून 1949 को डॉ. भीमराव आंबेडकर के कहे शब्द याद दिलाएः
‘चुनाव आयुक्त का कार्यकाल निश्चित और सुरक्षित करने का कोई लाभ नहीं, यदि संविधान में किसी मूर्ख, धूर्त या सरकार के अंगूठे के नीचे काम करने वाले व्यक्ति को रोकने का प्रावधान न हो।’
वोट कटने पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं?
बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि एस.आई.आर. से नाम कटने वालों को सरकारी राशन, सरकारी लाभ और सामाजिक योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी ने भी पूर्व में एसआईआर से नाम कटने वालों को सरकारी सेवाओं से अलग करने की बात कह चुके हैं।
मुख्यमंत्री के आँकड़े ही सच बता रहे हैं
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश की अनुमानित जनसंख्या 25.70 करोड़ है और इसके करीब 65ः मतदाता होने चाहिए, यानी 16,70,50,000। राज्य निर्वाचन आयोग की स्थानीय निकाय सूचियों में भी लगभग इतने ही मतदाता दर्ज हैं:
ग्राम पंचायतें (58,189)
पुरुष मतदाताः 6,59,23,283
महिला मतदाताः 5,84,65,852
कुल मतदाता: 12,43,89,135
नगर निगम (17)
पुरुष मतदाताः 1,02,70,203
महिला मतदाताः 88,17,531
कुल मतदाताः 1,90,87,734
नगर पालिका परिषदें (200)
पुरुष मतदाताः 78,33,136
महिला मतदाताः 70,25,895
कुल मतदाताः 1,48,59,031
नगर पंचायतें (545)
पुरुष मतदाताः 49,26,062
महिला मतदाताः 44,46,417
कुल मतदाताः 93,72,479
कुल-
पुरुष मतदाताः 8,89,52,684
महिला मतदाताः 7,87,55,695
कुल मतदाताः 16,77,08,379
इसके मुकाबले ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में सिर्फ 13,39,84,792 मतदाता रहने दिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार होने चाहिएः 16,70,50,000
एसआईआर के बाद बचेः 13,39,84,792
कम हुएः 3,30,65,208 (करीब 3.31 करोड़)
कार्यसमिति में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री ने क्या कहा-
1. प्रदेश में 16 करोड़ से ज्यादा मतदाता होने चाहिए, जबकि अभी 13 करोड़ हैं।
2. 1,27,00,000 मतदाताओं के नाम गायब होना चिंताजनक है।
3. 66 लाख लोग पंचायत सूची में हैं, पर विधानसभा सूची में नहीं।
4. सरकारी योजनाओं के करीब 55 लाख लाभार्थी सूची में नहीं हैं।
5. 18 और 19 साल के साढ़े चार लाख युवाओं के नाम नहीं जुड़े हैं।
6. दूसरे राज्यों से बहू बनकर आई महिलाओं के नाम भी सूची में नहीं हैं।
7. 45 सीटें बहुत कम अंतर वाली हैं और शहरी निकायों की 28 सीटें कमजोर हो रही हैं।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ जी ने कहा कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा इंडिया गठबंधन की जीत की गारंटी होगी, क्योंकि वे आदित्यनाथ की रेजिम चेंज कराना चाहते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एसआईआर के माध्यम से वोट चोरी नहीं होने देगी।
संविधान सभा, 16 जून 1949
“There is no use making the tenure of the Election Commissioner a fixed and secure tenure if there is no provision in the Constitution to prevent either a fool or a knave or a person who is likely to be under the thumb of the Executive-“



