दीपोत्सव की झांकियां लोककलाओं के संगम से देंगी सांस्कृतिक एकता और विविधता का संदेश: जयवीर सिंह
- दीपोत्सव-2026 में 14 झांकियों से जीवंत होगी रामकथा, यूपी के लोकनृत्यों के साथ दिखेगी देशभर की सांस्कृतिक झलक।
- बालकांड से उत्तरकांड तक के प्रसंगों पर आधारित होंगी झांकियां, साकेत महाविद्यालय से रामकथा पार्क तक निकलेगी सांस्कृतिक यात्रा।
- दीपोत्सव-2026 में 3डी मॉडल से जीवंत होंगे रामायण के सातों कांड, यूपी के सात अंचलों के लोकनृत्य भी बनेंगे आकर्षण।
- फरुवाही से कालबेलिया और करमा से बीहू तक, दीपोत्सव-2026 की झांकियों में दिखेगा देशभर के लोकनृत्यों का संगम।
अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या दीपोत्सव-2026 में रामनगरी की सड़कों पर भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा और रामायण के प्रमुख प्रसंगों का भव्य दृश्य देखने को मिलेगा। संस्कृति विभाग की ओर से इस बार रामकथा के सातों कांडों पर आधारित 14 झांकियां तैयार की जा रही हैं। इनमें बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की प्रमुख घटनाओं को 3डी मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इन झांकियों की खासियत यह होगी कि रामायण के प्रसंगों के साथ उत्तर प्रदेश के 7 अलग-अलग अंचलों के लोकनृत्यों को देश के अन्य राज्यों की लोककलाओं से जोड़ा जाएगा। इस तरह दीपोत्सव की झांकी यात्रा में रामकथा के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता और लोकपरंपराओं का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह यात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर रामकथा पार्क तक पहुंचेगी।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इन झांकियों की शुरुआत बालकांड के प्रसंगों से होगी, जिसमें पुत्रेष्टि यज्ञ, गुरु विश्वामित्र द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या का ज्ञान देना, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर और श्रीराम विवाह के दृश्य प्रदर्शित किए जाएंगे। पंचवटी से जुड़े प्रसंगों को भी इसमें स्थान दिया जाएगा। उन्होंने बताया इन दृश्यों को 3डी मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ अयोध्या धाम का प्रमुख लोकनृत्य फरुवाही और उत्तराखंड का छोलिया नृत्य कलाकारों की सांकेतिक प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे।
अयोध्याकांड पर आधारित झांकी में श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन से जुड़े प्रसंगों को दिखाया जाएगा। इसमें केवट द्वारा तीनों को गंगा पार कराना, चित्रकूट के घाट पर श्रीराम-लक्ष्मण और तुलसीदास का प्रसंग, श्रीराम द्वारा भरत को चरण पादुका प्रदान करना और राजसिंहासन पर चरण पादुका स्थापित किए जाने के दृश्य शामिल होंगे। इन प्रसंगों के जरिए त्याग, समर्पण और भाईचारे का संदेश सामने आएगा। इस झांकी के साथ अवध अंचल का ढेढिया लोकनृत्य और मध्य प्रदेश का मटकी नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, अरण्यकांड की झांकी में स्वर्ण मृग प्रसंग, रावण का साधु वेश में माता सीता से भिक्षा मांगना, शबरी आश्रम में श्रीराम और लक्ष्मण का आगमन तथा रावण-जटायु युद्ध के दृश्य प्रदर्शित होंगे। इसके साथ पूर्वांचल का धोबिया नृत्य और हरियाणा का घूमर नृत्य सांकेतिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
सुंदरकांड पर आधारित झांकी में समुद्र पार करने से पहले श्रीराम का समुद्र पर बाण चलाने के लिए तैयार होना और समुद्र देव का प्रकट होना प्रमुख दृश्य होंगे। इसके अलावा माता सीता द्वारा हनुमान जी को चूड़ामणि और मुद्रिका प्रदान करना, मंदोदरी द्वारा रावण को समझाना, हनुमान जी का लंका दहन और उनके द्वारा श्रीराम का गुणगान करने के प्रसंग भी दिखाए जाएंगे। इन दृश्यों को 3डी मॉडल के माध्यम से जीवंत रूप दिया जाएगा। इसके साथ सोनांचल का प्रमुख आदिवासी लोकनृत्य करमा और छत्तीसगढ़ का छाऊ नृत्य प्रस्तुत होगा। वहीं, किष्किंधाकांड की झांकी में श्रीराम और हनुमान के प्रथम मिलन, सुग्रीव-बालि युद्ध, सुग्रीव की सहायता के लिए श्रीराम द्वारा पेड़ की ओट से बाण चलाने, जामवंत से मंत्रणा और सुग्रीव के राज्याभिषेक के दृश्य शामिल किए जाएंगे। इस झांकी में बुंदेलखंड का राई नृत्य और गुजरात का गरबा-डांडिया दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगे।
लंकाकांड पर आधारित झांकी में राम-रावण युद्ध के साथ युद्ध के महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाना, श्रीराम की गोद में मूर्छित अवस्था में लेटे लक्ष्मण जी, रामेश्वरम में श्रीराम द्वारा शिवलिंग की स्थापना और रावण की सभा में अंगद का पैर जमाने का दृश्य शामिल होगा। इसके साथ लंका विजय के बाद श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता पर देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा तथा पुष्पक विमान से अयोध्या वापसी के प्रसंग भी दिखाए जाएंगे। इस झांकी के साथ ब्रज क्षेत्र का मयूर नृत्य और असम का बीहू नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से रामकथा के प्रसंगों को लोकनृत्यों की विविध शैलियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
उत्तरकांड पर आधारित अंतिम झांकी में श्रीराम राज्याभिषेक और रामराज्य की स्थापना के प्रसंगों को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा श्रीराम दरबार की आरती के प्रतीकात्मक दृश्य के साथ श्रीराम राज्याभिषेक और देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा को प्रदर्शित करने की योजना है। इसके अलावा भरत मिलाप और गरुड़ जी द्वारा श्री कागभुशुंडि से रामकथा श्रवण करने के प्रसंग भी 3डी मॉडल के जरिए दिखाए जाएंगे। इस झांकी के साथ पश्चिमांचल का प्रमुख गूजरी लोकनृत्य और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इससे रामकथा के अंतिम चरण को लोकसंस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ जोड़कर दिखाया जाएगा।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, दीपोत्सव की इन झांकियों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों की पहचान को विशेष स्थान दिया गया है। अयोध्या की फरुवाही, अवध का ढेढिया, पूर्वांचल का धोबिया, सोनांचल का करमा, बुंदेलखंड का राई, ब्रज का मयूर और पश्चिमांचल का गूजरी लोकनृत्य रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों के साथ प्रस्तुत होंगे। इनके साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम और राजस्थान के लोकनृत्य भी शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया इस तरह दर्शकों को एक ही यात्रा में विभिन्न राज्यों की लोककलाओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य परंपराओं की झलक मिलेगी। झांकियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता को भी रेखांकित किया जाएगा।



