बंदरों को आबादी से दूर रखने के लिए बनेगा ‘कपि वन’

बंदरों के बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक नई पहल की जा रही है। आबादी वाले क्षेत्रों में बंदरों के प्रवेश को रोकने के उद्देश्य से ‘कपि वन’ स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक कपि वन लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित होगा, जहां बंदरों के लिए फलदार पौधे लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें प्राकृतिक वातावरण में ही पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सके और वे आबादी की ओर न आएं। यह पहल मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राकेश यादव

लखनऊ। प्रदेश में बंदरों की संख्या तथा मनुष्यों को घायल करने की घटनाएं घटित होने पर एक ओर जन व धन हानि होने से जन सामान्य में आक्रोश उत्पन्न होता है, वहीं दूसरी ओर आबादी क्षेत्र में बंदरों के रहने से बंदरों व मनुष्यों दोनों को ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बंदरों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने तथा शहरी क्षेत्र के बाहर उनका वास स्थल विकसित कर उन्हें भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ विषयवस्तु पर आधारित वृक्षारोपण महायज्ञ के अंतर्गत 21 जुलाई को प्रत्येक नगर निकाय (नगर निगम, नगर पालिका तथा नगर पंचायत) के बाहरी क्षेत्र में न्यूनतम 01 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फलदार प्रजातियों का रोपण कर कपि वन स्थापित किये जा रहे है।

कपि वन में अवनत भूमि के चयन को प्राथमिकता दी गयी है। कपि वन में बड़हल, आम, जामुन, अमरूद, बेल, गूलर, कटहल, बेर, शहतूत, पीपल, अंजीर सहित विभिन्न फलदार प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। प्रजातियों का चयन इस प्रकार किया गया है कि कपि वन में रोपित फल प्रजातियों में पूरे वर्ष फल उपलब्ध रहें। कपि वन की स्थापना में नगर विकास विभाग तथा आवास विकास विभाग सहयोग व सहभागिता कर रहे है।

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