दिल्ली के सत्ता गलियारों में इन दिनों ऐसी ही चर्चाएं तेज़ हैं। क्यों हो रही है कैबिनेट विस्तार की चर्चा?
मानसून सत्र पहले मोदी कैबिनेट में सबसे बड़ा फेरबदल? क्या अमित शाह की बढ़ेगी ताकत, क्या राजनाथ सिंह बनेंगे राष्ट्रपति? क्या मोदी सरकार में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल होने वाला है? क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को कैबिनेट से हटाकर राष्ट्रपति बनाया जा सकता है? क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सरकार के सबसे ताकतवर चेहरे बनने जा रहे हैं? कहा जा रहा है कि आने वाले समय में जो नई कैबिनेट बनेगी, वो असल में पीएम मोदी की नहीं बल्कि “अमित शाह की कैबिनेट” होगी। और क्या स्मृति ईरानी, अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं की एक बार फिर मोदी कैबिनेट में वापसी हो सकती है?
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के मानसून सत्र से पहले या उसके आसपास सरकार मंत्रालयों में बदलाव कर सकती है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
पहला… सरकार अपने प्रदर्शन को और मजबूत दिखाना चाहती है।
दूसरा… अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
तीसरा… क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाना भी बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यानी कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्री बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि आने वाले चुनावों की तैयारी भी हो सकती है।
सबसे ज्यादा चर्चा राजनाथ सिंह को लेकर क्यों?
सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर हो रही है। कुछ राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्ष 2027 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसे एक सम्मानजनक संवैधानिक भूमिका के रूप में देखा जाएगा।हालांकि अभी तक इस संबंध में सरकार या बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
“क्या भारतीय राजनीति का एक और बड़ा अध्याय खत्म होने वाला है?”
कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे… फिर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने… ग्रह मन्त्री रहे और आज देश के रक्षा मंत्री… राजनाथ सिंह… एक ऐसा नाम, जिसे राजनीति में शालीनता, अनुभव और संतुलन की पहचान माना जाता है। लेकिन आज दिल्ली के सत्ता गलियारों में एक सवाल गूंज रहा है……क्या राजनाथ सिंह की राजनीतिक भूमिका बदलने वाली है? क्या उन्हें कैबिनेट से हटाकर राष्ट्रपति भवन भेजा जा सकता है? हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं ने इस सवाल को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है।
राजनाथ सिंह को हटाने के संभावित राजनीतिक कारण
पॉलिटिकल रिटायरमेंट: उम्र को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पद देकर एक सम्मानजनक विदाई दी जा सकती है। अमित शाह के लिए रास्ता: राजनाथ सिंह के कैबिनेट में रहने से अमित शाह को प्रधानमंत्री के उत्तराधिकारी के रूप में पेश करने में बाधा हो सकती है। उन्हें हटाने से अमित शाह के लिए राह आसान होने की चर्चा है। राजनाथ सिंह के करीबी योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को संतुलित करने के लिए उन्हें राष्ट्रपति बनाकर सवर्ण वोट बैंक को साधने की रणनीति हो सकती है।
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क्या अमित शाह का प्रभाव और बढ़ेगा?
दिल्ली में सबसे ज्यादा जिस बात की चर्चा है, वह है अमित शाह की बढ़ती राजनीतिक भूमिका।
कहा जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार के भीतर उनका प्रभाव और मजबूत हो सकता है।
बीजेपी संगठन और सरकार—दोनों में अमित शाह पहले से ही बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।
यही वजह है कि विपक्ष भी लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि सरकार के बड़े फैसलों में उनकी भूमिका सबसे अहम रहती है।
हालांकि यह कहना कि पूरी कैबिनेट “अमित शाह की कैबिनेट” होगी, अभी केवल राजनीतिक टिप्पणी और अटकल है। इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में जल्द ही फैरबदल कर सकते हैं। मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, निर्मला सीतारमण, नितिन गडकरी का मंत्रालय बदला जा सकता है, जबकि धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, नीट पेपर लीक से विवादों में घिरे रहे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी हो सकती है। प्रधान के इस्तीफे की लगातार मांग विपक्ष करता रहा है। नीट पेपर लीक होने के बाद उनके खिलाफ इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी भी पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रही है। उसकी भी डिमांड प्रधान का इस्तीफा ही है। माना जा रहा है कि इन विरोधों को देखते हुए सरकार उनकी जगह किसी अन्य को यह जिम्मेदारी दे सकती है। सूत्रों की मानें तो नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, हरदीप पुरी जैसे केंद्रीय मंत्रियों को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विभाग में बदलाव हो सकता है। धर्मेंद्र प्रधान की जगह उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि वित्त मंत्री का प्रभार पूर्व आरबीआई प्रमुख शक्तिकांत दास को मिल सकती है। दास के कार्यकाल को केंद्र सरकार एक अहम कार्यकाल की तरह मानती है और इस दौरान महंगाई को रोकने में भी सफलता मिली। इसी की लेकर अब वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके पास जा सकती है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के यूपी भाजपा प्रमुख बन जाने की वजह से उनकी भी मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है। उनकी जगह आम आदमी पार्टी से भाजपा ज्वाइन करने वाले राघव चड्डा को यह जिम्मेदारी मिल सकती है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी की जगह किसी सिख या पंजाब के नेता को लाया जा सकता है और इस दौड़ में राघव चड्डा का नाम भी चर्चा में है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में TMC से अलग हुए 20 बागी सांसद कैबिनेट में जगह की मांग कर सकते हैं। उन्होंने पहले ही NDA को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया था और अभी वे BJP के बाद NDA में दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी हैं। छोटी पार्टियों TDP और JDU के पास एक-एक कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री हैं, और नए सांसद भी ऐसी ही मांग कर सकते हैं।
हालांकि, यह देखना होगा कि क्या BJP इस प्रस्ताव को मानती है, क्योंकि वह इस गुट से दूरी बनाए रखना चाहती है। BJP में विलय करने के बजाय, इन सांसदों ने एक कम जानी-पहचानी पार्टी, NCPI में विलय करने का फैसला किया था। 9 जून, 2024 को लगातार तीसरी बार पद संभालने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन किया और दो साफ़ संदेश दिए।
वापसी किन नेताओं की हो सकती है?
अब बात उन चेहरों की जिनकी वापसी की चर्चा सबसे ज्यादा है। स्मृति ईरानी… अनुराग ठाकुर… जितिन प्रसाद… इन नेताओं के नाम लगातार राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहे हैं। इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में नए चेहरों को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना जताई गई है।
तो कुल मिलाकर… दिल्ली में चर्चाएं बहुत हैं… नाम भी कई सामने आ रहे हैं… लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यदि कैबिनेट विस्तार होता है तो उसका असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव 2027 और 2029 की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।



