Saturday, May 16, 2026
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कारागार विभाग में अफसरों का अजब गजब कारनामा

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कारागार विभाग में अफसरों का अजब गजब कारनामा
कारागार विभाग में अफसरों का अजब गजब कारनामा
राकेश यादव
राकेश यादव

कारागार विभाग के आला अफसरों का अजब गजब कारनामा। गृह जनपद के निकटवर्ती जनपद में कर दी जेलर की तैनाती। सेवा नियमावली को दरकिनार कर दर्जनों कर्मचारियों की हो गई तैनाती।

लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में सरकारी सेवा नियमावली का कोई मायने नहीं है। इस विभाग में अधिकारियों की गृह जनपद के निकटवर्ती जनपद में तैनाती कर दी जाती है। ऐसा तब किया जा रहा है जब नियमानुसार किसी भी अधिकारी और सुरक्षाकर्मी की तैनाती गृह जनपद के आसपास के जनपद में नहीं किये जाने का प्रावधान है। सेटिंग गेटिंग के इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी लखनऊ से सटे हुए सीतापुर जनपद में विभाग के आला अफसरों का यह अजब गजब कारनामा आसानी से देखा जा सकता है। जनपद की जिला जेल में हरदोई जनपद के मूल निवासी राजेश कुमार वर्मा को बतौर जेलर तैनात कर दिया गया है। गृह जनपद से सटे जनपद में जेलर की तैनाती सरकारी सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन है। यह तो एक बानगी है। इसी प्रकार कई अन्य अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को विभाग के उच्चाधिकारियों ने गृह जनपद के आसपास की जेलों पर तैनाती दे रखी है।

सूत्रों के कहना है कि इस विभाग के आला अफसरों में उगाही के चलते अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर रखा है। विभाग में नियम यह है कि एक अधिकारी और कर्मचारी जनपद में तीन और मंडल में सात वर्ष तक तैनात रह सकता है। सेवा नियमावली का यह प्रावधान फाइलों में सिमटकर रह गया है। इस विभाग में दर्जनों की संख्या में सुरक्षाकर्मी गृह जनपद के आसपास की जेलों पर तैनात कर दिये गये। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। जेलर की गृह जनपद के निकटवर्ती जनपद की तैनाती के संबंध में जब लखनऊ जेल परिक्षेत्र के डीआईजी डॉ रामधनी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो कई प्रयासों के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया। डीजी जेल पीसी मीणा ने कहा इसकी जांच कराई जाएगी।

प्रमोशन के बाद भी नहीं होता जेलों से बाबुओं का तबादला

कारागार जेल परिक्षेत्र और जेलों पर तैनात बाबुओं का प्रमोशन के बाद भी तबादला नहीं किया जाता है। यह बात पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन कुछ परिक्षेत्र और जेलों में बाबुओं की तैनाती इसकी खुद ही पुष्टि करती नज़र आ रही है। आगरा जेल परिक्षेत्र में बीते करीब 18 साल तैनात एक महिला बाबू को यहीं तैनात हुए तीन प्रमोशन मिले। प्रोन्नत आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा कि जल्दी ही इन्हें अन्यत्र स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद भी इनका तबादला नहीं किया गया। इसी प्रकार कन्नौज जेल पर तैनात एक कनिष्ठ सहायक बाबू का बीते स्थानांतरण सत्र के दौरान आगरा जेल पर तबादला किया गया। इस बाबू को आजतक रिलीव ही नहीं किया गया है। कारागार मुख्यालय में तो कई बाबू नियुक्त होकर रिटायर भी हो गए इनका तबादला ही नहीं हुआ। इससे मुख्यालय और जेलों में बाबुओं का कॉकस बन गया है। यही वजह है कि बाबुओं की मनमानी पर अधिकारी भी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।