Friday, May 15, 2026
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पुराने जंगलों को बचाना अधिक आवश्यक…

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पुराने जंगलों को बचाना अधिक आवश्यक...
पुराने जंगलों को बचाना अधिक आवश्यक...
डॉ.विजय गर्ग 
डॉ.विजय गर्ग 

धरती पर जीवन की निरंतरता के लिए जंगलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि वे एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र होते हैं, जिनमें पेड़-पौधे, जीव-जंतु, पक्षी, कीट, मिट्टी, जल और मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े रहते हैं। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब जंगलों का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। ऐसे समय में यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या केवल नए पेड़ लगाना ही पर्यावरण संरक्षण का समाधान है, या फिर हमें उन पुराने जंगलों को बचाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो सदियों से धरती को संतुलित बनाए हुए हैं।

वास्तव में, पुराने जंगलों को बचाना नए पेड़ लगाने से कहीं अधिक आवश्यक है। पुराने जंगल प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें विकसित होने में दशकों नहीं बल्कि कई बार सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं। इन जंगलों में केवल विशाल वृक्ष ही नहीं होते, बल्कि एक जटिल और संतुलित प्राकृतिक व्यवस्था भी विकसित हो चुकी होती है। यहां अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां, सूक्ष्म जीव, पक्षी और वन्यजीव रहते हैं। इन सभी का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर करता है। इसलिए जब कोई पुराना जंगल नष्ट होता है, तब केवल पेड़ नहीं कटते, बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

पुराने जंगल कार्बन को संग्रहित करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। बड़े और पुराने पेड़ अपने तनों, शाखाओं और जड़ों में भारी मात्रा में कार्बन को संचित रखते हैं। यही कार्बन यदि वातावरण में पहुंच जाए तो ग्लोबल वार्मिंग और अधिक बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार पुराने जंगल पृथ्वी के प्राकृतिक “कार्बन बैंक” की तरह काम करते हैं। जब ऐसे जंगल काटे जाते हैं, तो वर्षों से संचित कार्बन वातावरण में फैल जाता है और जलवायु परिवर्तन की गति तेज हो जाती है। दूसरी ओर, नए लगाए गए पौधों को इतना बड़ा बनने में कई दशक लग जाते हैं कि वे उतनी मात्रा में कार्बन अवशोषित कर सकें। इसलिए पुराने जंगलों का संरक्षण जलवायु संकट से लड़ने के लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।

जैव विविधता के संरक्षण में भी पुराने जंगलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनेक दुर्लभ पशु-पक्षी और वनस्पतियां केवल पुराने जंगलों में ही जीवित रह सकती हैं। बाघ, हाथी, तेंदुआ, गिद्ध, उल्लू, कई प्रकार की तितलियां और औषधीय पौधे ऐसे वातावरण पर निर्भर करते हैं, जहां प्राकृतिक संतुलन वर्षों से बना हुआ हो। यदि जंगल नष्ट हो जाते हैं तो ये जीव अपने प्राकृतिक आवास से वंचित हो जाते हैं। कई प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त होने लगती हैं। जैव विविधता का नुकसान केवल प्रकृति का नुकसान नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के लिए भी खतरा है, क्योंकि भोजन, औषधि और पर्यावरणीय संतुलन का आधार भी यही विविधता है।

पुराने जंगल जल चक्र को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे वर्षा को आकर्षित करते हैं, भूजल स्तर को बनाए रखते हैं और नदियों को जीवित रखने में मदद करते हैं। घने जंगल वर्षा के पानी को धीरे-धीरे धरती में पहुंचाते हैं, जिससे जल संरक्षण होता है। जहां जंगलों की कटाई होती है वहां अक्सर सूखा, बाढ़ और मिट्टी कटाव जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों के नष्ट होने से भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस प्रकार जंगल मानव जीवन की सुरक्षा से भी सीधे जुड़े हुए हैं।

आज कई देशों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते हैं। यह निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन केवल पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं है। अक्सर लाखों पौधे लगाए जाते हैं, परंतु उनकी उचित देखभाल नहीं होती और वे कुछ वर्षों में नष्ट हो जाते हैं। दूसरी ओर, पुराने जंगल पहले से ही एक विकसित और संतुलित प्राकृतिक तंत्र होते हैं। यदि एक पुराना जंगल बचाया जाता है, तो उसके साथ हजारों जीवों, जल स्रोतों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को भी बचाया जाता है। इसलिए संरक्षण की प्राथमिकता पुराने जंगलों को मिलनी चाहिए।

पुराने जंगलों का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी कम नहीं है। अनेक आदिवासी समुदाय और ग्रामीण लोग सदियों से जंगलों पर निर्भर रहे हैं। उनकी जीवनशैली, संस्कृति, परंपराएं और लोक ज्ञान जंगलों से जुड़ा हुआ है। जंगल उन्हें भोजन, ईंधन, औषधियां और रोजगार प्रदान करते हैं। जब जंगल नष्ट होते हैं, तो केवल पर्यावरण ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान भी संकट में पड़ जाती है।

विकास के नाम पर आज दुनिया भर में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है। सड़क निर्माण, खनन, औद्योगिक परियोजनाएं, बांध और शहरी विस्तार के लिए पुराने जंगलों को लगातार नष्ट किया जा रहा है। कई बार सरकारें इसके बदले अन्य क्षेत्रों में वृक्षारोपण का दावा करती हैं, लेकिन कोई भी नया जंगल सैकड़ों वर्षों पुराने जंगल की बराबरी नहीं कर सकता। पुराने जंगलों की मिट्टी, नमी, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को कृत्रिम रूप से दोबारा बनाना लगभग असंभव है।

शिक्षा व्यवस्था में भी जंगल संरक्षण को अधिक गंभीरता से शामिल करने की आवश्यकता है। बच्चों और युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि केवल “पेड़ लगाओ” अभियान ही पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें यह भी जानना चाहिए कि पहले से मौजूद जंगलों को बचाना अधिक आवश्यक है। यदि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के महत्व को समझेंगी, तभी वे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बन पाएंगी।

मीडिया और सामाजिक संस्थाओं को भी जंगल संरक्षण के मुद्दे को व्यापक रूप से उठाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। लोगों को यह समझना होगा कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी के फेफड़े हैं। यदि पुराने जंगल समाप्त हो गए, तो मानव जीवन भी गंभीर संकट में पड़ सकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाए। आर्थिक प्रगति महत्वपूर्ण है, लेकिन वह प्रकृति को नष्ट करके नहीं होनी चाहिए। सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनमें पुराने जंगलों की कटाई पर सख्त नियंत्रण हो। साथ ही स्थानीय समुदायों को जंगल संरक्षण में भागीदार बनाया जाना चाहिए।

अंततः कहा जा सकता है कि पुराने जंगल मानवता की अमूल्य धरोहर हैं। वे केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि पृथ्वी के जीवन तंत्र की आधारशिला हैं। नए पेड़ लगाना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक उन पुराने जंगलों को बचाना है जो सदियों से धरती को जीवन दे रहे हैं। यदि हमने समय रहते पुराने जंगलों की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और संतुलित पर्यावरण से वंचित हो सकती हैं। इसलिए आज का सबसे बड़ा पर्यावरणीय संदेश यही होना चाहिए—“पुराने जंगल बचाइए, क्योंकि वही भविष्य बचाएंगे।”