सीतापुर जेल में फिर मौत! DG जेल के निर्देशों की अवहेलना

राकेश यादव
राकेश यादव

डीजी जेल के निर्देश सीतापुर जेल अधीक्षक के ठेंगे पर! जेल के अंदर एक बार फिर बंदी ने फांसी लगाकर दी जान। सनसनीखेज घटना को घंटों छिपाए रखा जेल प्रशासन। घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से बेलगाम हुए जेल अफसर।

लखनऊ। महानिदेशक कारागार के तमाम निर्देशों के बाद भी प्रदेश की जेलों में आत्महत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। सीतापुर जेल में एक बंदी के आत्महत्या करने की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है। डीजी जेल के निर्देशों का अनुपालन किया गया होता तो शायद घटना को रोका जा सकता था। बेलगाम सीतापुर जेल अधीक्षक के इन निर्देशों का कोई मायने नहीं रह गया है। यही वजह है कि जेल के अंदर बंदी आत्महत्या की घटना को अंजाम देने में सफल हो गया। दिलचस्प बात तो यह है कि जेल प्रशासन घटना की घंटों दबाए रखा। मुख्यालय तक को इसकी सूचना काफी देर में दी गई।

जानकारी के मुताबिक, मुनेंद्र पुत्र रमेश सीतापुर के मिश्रिख थाना क्षेत्र के दनियारपुर का निवासी था. वह इसी वर्ष अप्रैल 2026 में दहेज प्रथा के तहत जेल लाया गया था। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को विचाराधीन बंदी ने बैरक में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगा ली। बैरक में मौजूद अन्य कैदियों ने उसे देखते ही फौरन नीचे उतारा, लेकिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। जेल में बंदी की खुदकुशी ने कई सवाल उठा दिए हैं। पहली बात डीजी जेल के तमाम निर्देशों के बाद जेल में बंदी के पास फांसी लगाने का सामान कहां से आया और किसी सुरक्षाकर्मी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?

जेल अधीक्षक ने सीयूजी फोन न उठाने की खाई कसम!

मुख्यमंत्री कहें या फिर डीजी जेल अधिकारियों पर इसको कोई असर दिखाई नहीं पड़ता है। सीएम ने अधिकारियों की सीयूजी फोन को चालू रखने के साथ उठाने की हिदायत दी। इसका कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। सीतापुर जेल में आत्महत्या की घटना की पुष्टि के लिए सीतापुर जेल अधीक्षक प्रीति यादव के सीयूजी नंबर (9454418246) पर कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ इससे पूर्व पदभार ग्रहण करने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया था। ऐसा लगता है कि जैसे उन्होंने सरकारी फोन न उठाने की कसम खा रखी हो।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों प्रदेश की जेलों में आए दिन हो रही आत्महंता की घटनाओं को रोकने के लिए महानिदेशक कारागार पीसी मीणा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जेल अधीक्षकों को कई निर्देश दिए। निर्देशों के तहत जेल में अंगौछा, डोरी वाले जूते, प्लास्टिक की रस्सी समेत कई ऐसी वस्तुओं का जेल में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था जिससे बंदी जेल में आत्महत्या की घटनाओं को बंदी आसानी से अंजाम न दे सके। जेल में राशन कटौती, मशक्कत, गिनती काटने, मुलाकात में वसूली करने में जुटे जेल अफसरों के लिए इन निर्देशों का कोई मायने नहीं रह गया। यही वजह है कि जेलों में बंदियों की आत्महत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उधर इस संबंध में जब लखनऊ जेल परिक्षेत्र के डीआईजी रामधनी से बात की गई तो उन्होंने घटना की गंभीरता लेते हुए कहा कि इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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