Saturday, April 4, 2026
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गैर विभागीय अफसरों के भरोसे कारागार विभाग!

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गैर विभागीय अफसरों के भरोसे कारागार विभाग!
गैर विभागीय अफसरों के भरोसे कारागार विभाग!

गैर विभागीय अफसरों के भरोसे कब तक चलेगा कारागार विभाग! आईपीएस के हाथ में विभाग की कमान, आईएएस को सौंपे सभी कमाऊ अनुभाग। अफसरों की लापरवाही से कई बार हुई प्रदेश सरकार की किरकिरी। जानकारी न होने की वजह से चौपट हुई कारागार विभाग की व्यवस्थाएं।

राकेश कुमार निडर

लखनऊ। प्रदेश का कारागार विभाग विभागीय अधिकारी नहीं आयातित अधिकारी चला रहे है। यह बात पढ़ने और सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन सच है। शासन ने विभाग की कमान आईएएस और आईपीएस के हाथों में सौंप रखी है। इन अधिकारियों को विभाग की जानकारी नहीं होने के कारण कारागार मुख्यालय और जेलों की व्यवस्थाएं सुधरने के बजाए और बिगड़ती जा रही है। शासन की इस व्यवस्था से विभाग के अधिकारी काफी आहत भी है लेकिन मामला अनुशासन और शासन सत्ता से जुड़ा होने की वजह से उन्होंने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।

विभागीय जानकारों के मुताबिक प्रदेश सरकार ने कारागार विभाग की कमान विभाग के अधिकारियों के बजाए आयातित अधिकारियों के हाथों में सौंप रखी है। वर्तमान समय में महानिदेशक कारागार का पद प्रमुख सचिव (आईएएस) और महानिरीक्षक कारागार पद की जिम्मेदारी पुलिस विभाग के (आईपीएस) अधिकारी के हाथों में है। सूत्रों का कहना है कि विभाग की कमान जिन अधिकारियों को सौंप रखी गई है उन्हें न्यायिक विभाग से जुड़े कारागार विभाग के कार्यप्रणाली की जानकारी न के बराबर है। विभाग में आने वाले आयातित इन अधिकारियों को विभाग की कार्यप्रणाली को समझने में महीनों लग जाते है। जब तक वह विभाग के कार्यप्रणाली को समझते है तब तक मुख्यालय और जेलों की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे ही चलती है।

सूत्रों का कहना है कि कारागार विभाग का काम न्यायिक अभिरक्षा के बंदियों को सुरक्षित रखना है। बंदियों को समय पर न्यायालय में पेश करना और बंदियों की जमानत मंजूर होने पर उन्हें समय पर जेल से रिहा करना इनकी जिम्मेदारी होती है। विभाग के कार्यप्रणाली काफी जटिल होती है। इस जटिलता का खामियाजा भी विभाग के अधिकारियों को भुगतना पड़ता है। बीते दिनों एक कैदी की समयपूर्ण रिहाई के मामले में लापरवाही करने पर पूर्व प्रमुख सचिव/डीजी जेल को सुप्रीमकोर्ट ने जमकर फटकार तो लगाई ही इसके साथ ही विभाग पर पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया था। इस मामले में प्रदेश सरकार की खासी किरकिरी भी हुई। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

चार आईपीएस डीआईजी के पास पांच जेल परिक्षेत्र

प्रदेश के कारागार विभाग में वर्तमान समय में प्रमुख सचिव कारागार की जिम्मेदारी आईएएस अनिल गर्ग के पास है। कारागार मुख्यालय की जिम्मेदारी पुलिस महानिदेशक (आईपीएस) पीसी मीणा के हाथ में है। अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) की कमान प्रोन्नत आईएएस धर्मेंद्र सिंह को सौंप रखी गई है। इसके अलावा प्रयागराज और वाराणसी, कानपुर, बरेली, मेरठ जेल परिक्षेत्र के डीआईजी की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारियों के हाथ में है। आगरा परिक्षेत्र के साथ कारागार मुख्यालय, लखनऊ, अयोध्या और गोरखपुर जेल परिक्षेत्रों की जिम्मेदारी विभागीय डीआईजी के हाथों में है। यह अलग बात है कि विभाग में अधिकारियों की कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह व्यवस्था कर रखी है।