
क्या होगा जब अस्पताल में डॉक्टर ही न हों…? क्या होगा जब मरीज गंदे बेड पर तड़पता रहे…? और क्या होगा जब वेंटिलेटर होते हुए भी मरीज दम तोड़ दे…? ये कोई फिल्मी कहानी नहीं…ये है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की कड़वी हकीकत… जहां इलाज के नाम पर सिर्फ लापरवाही मिल रही है… दूसरी तरफ सरकार प्रदेश में उत्तम स्वास्थ वयवसथ का दवा करती है।
आज हम बात करने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्वास्थ वस्था पर राजधानी लखनऊ का चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र… जहां हालात इतने खराब हैं कि मरीजों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं…उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 16 मार्च 2026 को चिनहट सीएचसी का निरीक्षण किया था तो कई खामियां मिली थीं। उपमुख्यमंत्री ने फटकार लगाते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। पाठक की चेतावनी के बावजूद अस्पताल के जिम्मेदार नहीं चेते।… डॉक्टरों को फटकार लगाई… सुधार के निर्देश दिए… लेकिन… क्या बदला? 2 अप्रैल गुरुवार 2026 को जब मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पहुंचे… तो सच्चाई और भी डराने वाली थी… डॉक्टर गायब, स्टाफ नदारद, इमरजेंसी में जरूरी दवाएं तक नहीं गंदगी का अंबार, मरीज बिना बेडशीट के पड़े….57 जरूरी दवाओं में से सिर्फ 38 ही उपलब्ध… सोचिए… अगर किसी की जान इन 19 दवाओं पर टिकी हो तो…?
—– सिस्टम की सबसे दर्दनाक सच्चाई —–
अस्पताल में सिस्टम की लापरवाही—-अस्पताल में सिर्फ 2 सफाईकर्मी मौजूद… जबकि होने चाहिए थे 6… डस्टबिन कूड़े से भरे… बायोमेडिकल वेस्ट खुले में… और जिम्मेदार? कोई जवाब नहीं…” कुछ डॉक्टर बिना सूचना गायब… न कोई रिकॉर्ड… न कोई जवाबदेही… मंडलायुक्त ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए… लेकिन सवाल ये है—क्या सिर्फ निर्देश से सिस्टम सुधरेगा?
वेंटिलेटर होते हुए भी मौत—देवरिया का एक मरीज… लखनऊ आया… जिंदगी की आस लेकर…लेकिन… केजीएमयू और बलरामपुर के चक्कर में… उसे वेंटिलेटर नहीं मिला… और उसने दम तोड़ दिया……सबसे बड़ा झटका क्या है…? शहर में 62 वेंटिलेटर बंद पड़े हैं! कारण – डॉक्टर और टेक्नीशियन की कमी लोकबंधु – 30 बंद, बलरामपुर – 32 में से आधे बंद ,ठाकुरगंज – 2 बंद, लक्ष्मीबाई – 5 बंद यानी मशीनें हैं… लेकिन चलाने वाला नहीं…।
—जनता की मांग है जल्द हो विशेषज्ञ डॉक्टर और टेक्नीशियन की तैनाती—-
लोकबंधु अस्पताल:— यहाँ 40 वेंटिलेटर बेड हैं, जिनमें केवल 10 बेड ही उपयोग में हैं। दरअसल, पिछले साल अस्पताल में भीषण आग लगी थी, जिसके बाद से वेंटिलेटर यूनिट का संचालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने अगले माह तक सभी बेड शुरू करने का दावा किया है।
बलरामपुर अस्पताल:— यहाँ 60 वेंटिलेटर बेड हैं, जिसमें 28 पर ही मरीज भर्ती हो रहे हैं, बाकी का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
ठाकुरगंज और लक्ष्मीबाई अस्पताल:— ठाकुरगंज में दो व रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में पांच वेंटिलेटर हैं। इन दोनों अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टर और टेक्नीशियन की कमी के चलते बेड पर नियमित मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है।
राजधानी के कुछ अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड की कमी नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ और टेक्नीशियन की कमी के चलते कमरे में बंद हैं। एक-दो नहीं, बल्कि 62 वेंटिलेटर का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बलरामपुर अस्पताल में 32, लोकबंधु में 30 और ठाकुरगंज में दो व रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में पांच वेंटिलेटर मरीज के इस्तेमाल में नहीं आ रहे हैं। केजीएमयू में करीब 300 वेंटिलेटर बेड हैं, जो अधिकतर समय मरीजों से भरे रहते हैं। यहाँ लखनऊ आसपास के अलावा प्रदेशभर से गंभीर मरीज रेफर होकर आते हैं। ट्रॉमा सेंटर में हर दिन 600-650 गंभीर मरीज आते हैं। ऐसे में हर दिन कई मरीजों को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
गरीब की मजबूरी सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त… लेकिन जब इलाज ही न मिले तो…? प्राइवेट अस्पताल में एक दिन का खर्च— 50 हजार से डेढ़ लाख रुपए…गरीब क्या करे…?इलाज कराए या घर बेच दे…?
अस्पताल में मरीज सिर्फ इलाज ही नहीं… पानी तक के लिए मरीज भटक रहे हैं… वाटर कूलर खराब, गर्म पानी, पंखे बंद, उमस में परेशान तीमारदार ….क्या यही है ‘स्वास्थ्य व्यवस्था’ है……? सिविल अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों के लिए लगे वाटर कूलर इन दिनों खराब पड़े हैं। इस वजह से उन्हें पानी की तलाश में परिसर में ही दूसरी जगह लगे वाटर कूलर के पास जाना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में कई जगहों के पंखे भी नहीं चल रहे हैं, जिससे वहां बैठे तीमारदारों को उमस व गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।लोग पानी के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि अस्पताल परिसर में लगा एक वाटर कूलर पूरी तरह से खराब पड़ा है, वहीं दूसरे से गर्म पानी आ रहा है और उसके आस-पास गंदगी फैली है।
एक तरफ सरकार दावे करती है… दूसरी तरफ अस्पतालों में मरीज दम तोड़ रहे हैं…सवाल सिर्फ सिस्टम का नहीं है… सवाल है इंसानियत का…अगर आज हम नहीं जागे…
तो कल ये दर्द किसी भी घर तक पहुंच सकता है… “आप क्या सोचते हैं? क्या इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?




















