भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ..!

राजेन्द्र चौधरी

शारदा पीठ के अहर्निश पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज का ये प्रवचन-कथन सभी के लिए दिशा निर्देशक एवं मार्ग निर्धारक है कि ‘नेता वही जिसमें नीति हो और नीति उसी में होती है, जिसमें नैतिकता होती है’।अखिलेश यादव ने कहा कि पूज्यनीय शंकराचार्य जी की ये बातें हर दंभी-घमंडी को सुननी और अंगीकृत करनी चाहिए पर अभिमानी सुनते नहीं हैं, इसीलिए उनका पतन-अंत होता ही है क्योंकि अभिमान के नहीं होते कान! धर्म तथा अहंकार’ की लड़ाई ही महाकाव्यों का मूल विषय रहा है, और अंहकार का अंततः अंत होता है, यही मूल संदेश। अहंकारी कभी सनातनी नहीं हो सकता है।अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ!

उन्होंने कहा कि सच्चे संतों का अपमान करके भाजपा ने फिर साबित कर दिया है कि सिवाय अपनी पैसों की भूख और ख़ुदगर्ज़ी के, वो किसी की भी सगी नहीं है। भाजपाई की ये पुरानी ‘कु-कार्यशैली’ है कि जो भी भाजपाइयों के ज़ुल्म, ज़्यादती और जुर्म के खि़लाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे भाजपाई झूठे आरोपों से धमकाने, दबाने, मिटाने की साज़िश करते हैं।

भ्रष्ट-भाजपाई, उनके मुख़बिर संगी-साथी और सत्ता सजातीय वाहिनी की ‘बिगड़ी-तिकड़ी’ नकारात्मकता का आपराधिक त्रिगुट है, जिसका मंसूबा धन-कमाने के लिए सत्ता हासिल करना है। ये सब के सब अपने-अपने स्वार्थ के लिए एक अड्डे पर इकट्ठा हैं वैसे ये एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। इनकी आपसी खटपट की भूमिगत आवाज़ें अक्सर बाहर सुनाई दे जाती हैं।

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