कांग्रेस सत्ता का दुरुपयोग कर रही है-देवनानी

तो अब जयपुर की मंडी में बकरे भी मिमिया रहे हैं। पहले घोड़े के बीच मची थी भगदड़। कांग्रेस ने पार्षदों की खरीद फरोख्त की शिकायत एसीबी में की। रिकॉर्डिंग का टेप भी दिया।

10 नवम्बर को राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा के दो-दो नगर निगमों के मेयर के चुनाव होने हैं। लेकिन इससे एक दिन पहले 9 नवम्बर को कांग्रेस ने पार्षदों की खरीद फरोख्त की शिकायत एसीबी में की है। कांग्रेस की ओर से रिकॉर्डिंग का टेप भी दिया गया है। इस टेप में एक पार्षद के बिकने के ढाई करोड़ रुपए तक मांगे जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह टेप अजय यादव नाम के व्यक्ति और कांग्रेस के कार्यकर्ता अकबर के बीच हुए संवाद का है। अकबर दो पार्षदों को भाजपा में लाने की बात कर रहा है।

अजय यादव को जयपुर हैरिटेज से भाजपा की मेयर पद की उम्मीदवार कुसुम यादव का पति बताया जा रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि जयपुर हैरिटेज नगर निगम में कुल पार्षदों की संख्या 100 है, इसमें से 47 कांग्रेस के तथा 42 भाजपा के हैं। 11 पार्षद निर्दलीय हैं। ऐेसे में पार्षदों का इधर-उधर जाना तो होगा ही। चूंकि प्रदेश में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार चल रही है,इसलिए शिकायत मिलते ही एसीबी ने जांच पड़ताल भी शुरू कर दी है। इससे अब मेयर पद के प्रत्याशी और उनके समर्थक को द्वारा पार्षदों से सम्पर्क करना पर भी मुश्किल हो रहा है। एसीबी की जांच पड़ताल से कार्यकर्ताओं में खलबली मच गई है।

वहीं जयपुर के चुनाव प्रभारी और भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से कोई खरीद फरोख्त नहीं की जा रही है। यहां यह खास तौर से उल्लेखनीय है कि गत जुलाई-अगस्त में राजस्थान में विधायकों की खरीद फरोख्त का मामला भी खूब चर्चा में आया था। खुद मुख्यमंत्री गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा वाले 35-35 करोड़ रुपए में कांग्रेस के विधायकों को खरीद रहे हैं। गहलोत ने तब विधायकों को घोड़ों की उपाधि दी थी। स्वभाविक है कि अब पार्षदों की खरीद फरोख्त की चर्र्र्र्र्र्र्चा हो रही है, तो बकरे भी मिमियाएंगे। जब घोड़ों की कीमत 35 करोड़ लग सकती है तो बकरे की कीमत ढाई करोड़ रुपए माँगना गैर वाजिब नहीं है।

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