सख्त हिदायतों के बाद क्या प्रदेश नेताओं में आपसी समन्वय होगा…? after strict instructions, will there be mutual coordination between the state leaders…?

राजस्थान भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में अमित शाह और भूपेंद्र यादव की उपस्थिति बहुत मायने रखती है। दीपावली के शुभकामना वाले कार्ड में भाजपा विधायक देवनानी ने राजनीतिक उपलब्धियां बताई। जन आक्रोश रैली के बनी प्रदेश समिति में अजमेर के चार भाजपा नेताओं के नाम शामिल। सख्त हिदायतों के बाद क्या प्रदेश नेताओं में आपसी समन्वय होगा….?

एस0 पी0 मित्तल

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में राजस्थान भाजपा की कोर कमेटी की बैठक हुई। यह बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होनी थी, लेकिन बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति ने सभी को चौंका दिया। जानकार सूत्रों के अनुसार कौर कमेटी की बैठक पूर्व में कोटा में ही होनी थी। लेकिन अमित शाह और भूपेंद्र यादव की उपस्थिति को देखते हुए बैठक को दिल्ली में आयोजित किया गया। सूत्रों ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रदेश नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से मुकाबला करने में पार्टी में गुटबाजी नजर नहीं आनी चाहिए। सभी नेताओं को एकजुट होकर गहलोत सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करना चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि कोई भी नेता अपना निजी एजेंडा न चलाए। पार्टी के निर्देश के अनुसार ही राजनीतिक गतिविधियां की जाए। यहां यह उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव लंबे अर्से से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय नहीं देखे गए। पहले हुई कोर कमेटियों की बैठक में भी यादव नहीं आए। हालांकि यादव राजस्थान से ही राज्य सभा के सांसद हैं, लेकिन प्रदेश में चल रही गुटबाजी को देखते हुए यादव ने राजस्थान से किनारा कर लिया, लेकिन 21 अक्टूबर को अचानक यादव ने सक्रियता दिखाई है।

भूपेंद्र यादव तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का भरोसेमंद नेता माना जाता है। सूत्रों की मानें तो अमित शाह की पहल पर ही भूपेंद्र यादव 21 अक्टूबर की बैठक में शामिल हुए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र यादव ही चुनाव के प्रभारी थे। सवाल उठता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो सख्त हिदायत दी है उसका पालन क्या प्रदेश के नेता करेंगे? भाजपा में चल रही गुटबाजी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी लगातार कटाक्ष करते रहे हैं। 21 अक्टूबर को ही हुए एक समारोह में सीएम गहलोत ने कहा कि मैं तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ही सपना पूरा करना चाहता हंू, लेकिन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ऐसा नहीं होने दे रहे। गहलोत ने कहा कि ईआरसीपी राजे ने ही अपने कार्यकाल में बनाई थी। लेकिन इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए अब केंद्र सरकार मदद नहीं कर रही है। गहलोत ने समारोह में मौजूद भाजपा विधायक अशोक लाहोटी को वसुंधरा राजे का समर्थक विधायक बताया।

देवनानी ने गिनाई राजनीतिक उपलब्धियां-

भाजपा के वरिष्ठ नेता और अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी ने दीपावली के अवसर पर जो शुभकामनाओं वाला कार्ड छपवाया है उसमें अपनी राजनीतिक उपलब्धियां भी गिनाई है। पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चलाए गए मोदी-20 के कार्यक्रमों का प्रदेश संयोजक देवनानी को ही बनाया गया था। कार्ड में देवनानी ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश भर में पचास कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें पचास हजार प्रबुद्ध जनों की भागीदारी रही। इसी प्रकार कार्ड में स्वयं के विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का ब्योरा भी लिखा गया। यानी देवनानी ने इस कार्ड के माध्यम से अपना राजनीतिक प्रचार भी किया है। कार्ड के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414155744 पर देवनानी से ली जा सकती है। वैसे इस शुभकामना वाले कार्ड को उत्तर क्षेत्र के 10 हजार घरों तक पहुंचाया गया है।

अजमेर के चार भाजपा नेता शामिल-

राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ संभाग स्तर पर होने वाली जन आक्रोश रैलियों को सफल बनाने के लिए प्रदेश भाजपा ने जो प्रदेश स्तरीय कमेटी बनाई है उसमें अजमेर के चार भाजपा नेता शामिल हैं। इन नेताओं में विधायक वासुदेव देवनानी, डिप्टी मेयर नीरज जैन, पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, पार्षद देवेंद्र सिंह शेखावत शामिल है। आक्रोश रैली का सबसे बड़ा कार्यक्रम जयपुर में होगा। उम्मीद है कि जयपुर की रैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे।

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