
“यूं ही कोई अटल नहीं होता” यह पंक्ति भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, उनके दृढ़ संकल्प, और उनके महान जीवन मूल्यों को दर्शाती है। किसी का नाम या व्यक्तित्व यूं ही ‘अटल’ नहीं बनता; उसके पीछे कठिन संघर्ष, अडिग सिद्धांत और राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम होता है।
आज देश एक ऐसे महान नेता को भावुक होकर याद कर रहा है, जिन्होंने राजनीति को सिर्फ सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का संकल्प माना। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज पुण्यतिथि है। 16 अगस्त 2018 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी आवाज, उनकी कविताएं और उनके विचार आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में जीवित हैं।
अटल जी का व्यक्तित्व ऐसा था, जिसमें शब्दों की संवेदनशीलता, विचारों की गहराई और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण एक साथ दिखाई देता था। आज उनकी पुण्यतिथि पर आइए, उन्हें सिर्फ श्रद्धांजलि ही न दें, बल्कि उनके उन विचारों को याद करें, जो आज भी हमें मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने और देशहित में सोचने की प्रेरणा देते हैं।
1980 में मुम्बई के शिवाजी पार्क में उस व्यक्ति ने कहा था “अंधेरा छंटेगा सूरज निकलेगा कमल खिलेगा।” अंधेरा छँटा सूरज निकला और कमल खिल गया। यह सब उनके सामने हुआ। कमल खिला तो ऐसे खिला कि उसकी गुलाबी आभा के आगे सारे रंग फीके पड़ गए। वे अटल थे कहते हैं एक अच्छा कवि कुछ भी करे कमाल ही करता है। अटल जी ने जो किया कमाल किया। राजनीति,कविता,प्रेम सब कमाल का था।उनकी राजनैतिक यात्रा भी सम्बन्धों की मर्यादा पर लिखी गयी एक सुन्दर प्रेम की कविता जैसी लगती है। बरसो तक विपक्ष में रह कर सरकारों का प्रखर विरोध करते रहने वाले अटल जी अपने पूरे कार्यकाल में न कभी अभद्र हुए न अमर्यादित। अटल जी विपक्ष के वे नेता थे जिनकी आलोचना प्रधानमंत्री भी ध्यान से सुनते थे। उन्होंने सिद्ध किया था कि विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना नहीं होता, बल्कि केवल सरकार की गलतियों का विरोध करना होता है। और यही कारण था कि विपक्ष का नेता होने के बाद भी उन्हें भारत का प्रतिनिधि बना कर नरसिंह राव जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ भेजा था।
भारतीय लोकतंत्र में पक्ष का विपक्ष पर ऐसा विश्वास और कभी देखने को नहीं मिलता। वे जब प्रधानमंत्री हुए तब भी उन्होंने अपनी मर्यादा नहीं तोड़ी। जब एक वोट के कारण तेरह महीने की सरकार गिरी, वे तब भी विचलित नहीं हुए। और जब पाँच साल तक सरकार चलाने का मौका मिला तब भी मर्यादा नहीं छोड़ी। अटल जी ने कभी अपना रंग नहीं बदला, हमेशा एक से ही रह गए। तभी वे मुस्कुरा कर कह देते थे “अटल हूँ विहारी नहीं” शायद पाकिस्तान युद्ध के समय की बात है किसी अखबार वाले ने खबर उड़ा दी कि अटल जी ने इन्दिरा जी को दुर्गा कहा है। अटल अपने विरोधियों का भी सम्मान करने के लिए जाने जाते थे। अटल जी की छवि ऐसी थी कि लोगों ने विश्वास कर लिया। अटल जीवन भर सफाई देते रहे कि हमने कभी इन्दिरा जी को दुर्गा नहीं कहा पर किसी ने नहीं सुनी। उनकी बात का न सुना जाना उनके चरित्र की सबसे बड़ी जीत थी। अटल जी ने प्रेम किया तो कविताओं सी पवित्रता के साथ किया, और कविता लिखी तो ऐसी लिखी जैसे प्रेम किया हो। प्रेम तो खैर अपूर्णता के साथ ही पूर्ण होता है। पर कविता की यात्रा पूर्ण न हो सकी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बड़े दु:ख के साथ कहा था “राजनीति के मरुस्थल में मेरी कविता की धारा सूख गई है” फिर भी उन्होंने जितना लिखा कमाल लिखा…

अटल जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी कविताएं, उनकी मुस्कान और उनके शब्द आज भी उन्हें हमारे बीच जीवित रखते हैं।
शायद इसीलिए कहा जाता है— यूँ ही कोई अटल नहीं होता…
यूं ही कोई अटल नहीं होता
अटल थे, अटल हैं, अटल रहेंगे!
नाम अटल, सोच अटल, देशभक्ति अटल!
सियासत में भी अटल, दिलों में भी अटल
एक शख्सियत… जो हमेशा अटल रहेगी
कवि भी थे, नेता भी थे… लेकिन सबसे पहले राष्ट्रभक्त थे
वक्त गुजर गया, अटल की यादें नहीं
अटल जी चले गए, विचार आज भी जिंदा हैं
एक नाम, हजारों यादें—अटल बिहारी वाजपेयी
यूं ही नहीं मिला था उन्हें ‘अटल’ नाम!
भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शख्सियत ही कुछ ऐसी थी—गंभीर राजनीति के बीच भी उनके शब्दों में मुस्कान होती थी और उनकी हाजिरजवाबी में गहरी बात छिपी होती थी। जब संसद में उनसे उनके विवाह को लेकर सवाल किया गया, तो अटल जी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा—“मैं अविवाहित जरूर हूं, लेकिन कुंवारा नहीं।” बस एक वाक्य… और सदन में मुस्कान बिखर गई। लेकिन इस हल्के-फुल्के जवाब के पीछे अटल जी का जीवन दर्शन भी झलकता था। उन्होंने विवाह नहीं किया, लेकिन उनका जीवन कभी अकेला नहीं रहा। देश, लोकतंत्र, कविता, साहित्य और करोड़ों देशवासियों से उनका रिश्ता जीवनभर बना रहा।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का कहना था कि छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता। वाजपेयी जी जात-पात या छूआछूत को नहीं मानते थे। उनका कहना था कि यदि ईश्वर भी कहे कि छूआछूत मानो, तो वे ऐसे ईश्वर को मानने के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन ईश्वर ऐसा नहीं कहेंगे।
वाजपेयी जी एक महान जनसेवक और राष्ट्रभक्त थे। उनका मनना था कि देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं, राष्ट्रदेव की पूजा में हमें, खुद को समर्पित कर देना चाहिए। यह सत्य है कि परिवर्तन ही संसार का नियम है। यह विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्तियों की याद दिलाता है: “जो कल थे, वे आज नहीं हैं। जो आज हैं, वे कल नहीं होंगे। होने, न होने का क्रम, इसी तरह चलता रहेगा।”
अटल जी की एक बहुप्रसिद्ध कविता है “हिन्दू जीवन हिन्दू तन-मन रग-रग हिन्दू मेरा परिचय” यह कविता उन्होंने तब लिखी थी जब भारतीय राजनीति के चेहरे माथे पर तिलक लगाने से डरते थे। अटल यहाँ भी अटल ही रहे। अटल जी अपनी कविताओं में सबसे अधिक सुन्दर दिखते हैं। भारत को मिट्टी का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्रपुरुष मानने वाले अटल जी इसके कण-कण में शंकर को देखने वाले अटल जी उनसा दूसरा कोई नहीं उनकी पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन..!


