- मुख्यमंत्री ने विधान सभा के मानसून सत्र के द्वितीय दिवस की कार्यवाही स्थगित होने के उपरान्त प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया।
- विगत 09 वर्षां में डबल इंजन सरकार ने उ0प्र0 के परसेप्शन को बदलने में सफलता प्राप्त की।
- उ0प्र0 ने देश की टॉप थ्री इकोनॉमी के रूप में स्वयं को स्थापित किया।
- समाजवादी पार्टी और काँग्रेस द्वारा उ0प्र0 के परसेप्शन को खराब करने की कुत्सित चेष्टा की जा रही।
- श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर से सम्बन्धित प्रकरण मा0 उच्चतम न्यायालय में लम्बित, पूरे प्रकरण की गम्भीरता को समझते हुए भी विपक्ष ने आज सदन की अवमानना तथा अपमान किया।
- प्रतिपक्ष का सदन में संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना अत्यन्त निन्दनीय और शर्मनाक।
- अयोध्या कोटि-कोटि सनातन धर्मावलम्बियों की आस्था का केन्द्र, अयोध्या के चढ़ावा चोरी से जुड़े प्रकरण को सरकार ने गम्भीरता से लिया।
- सदन में समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा अध्यक्ष पीठ की अवमानना की गयी, वह चर्चा से भागना चाहते, केवल माहौल खराब कर जनहित से जुड़े मुद्दों को कमजोर करना चाहते।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विगत 09 वर्षां में डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश के परसेप्शन को बदलने में सफलता प्राप्त की है। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है। यहाँ के युवाओं के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब यहाँ के नौजवान पलायन नहीं कर रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश का किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं है। गरीबों को शासन की सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। उत्तर प्रदेश का परसेप्शन देश में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में बना है। उत्तर प्रदेश ने देश की टॉप थ्री इकोनॉमी के रूप में स्वयं को स्थापित किया है।
आज यहाँ विधान भवन परिसर में विधान सभा के मानसून सत्र के द्वितीय दिवस की कार्यवाही स्थगित होने के उपरान्त मुख्यमंत्री प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और काँग्रेस द्वारा उत्तर प्रदेश के परसेप्शन को खराब करने की कुत्सित चेष्टा की जा रही है। इन्होंने प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था। इनकी किसान विरोधी नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर थे। प्रदेश के परम्परागत उद्यम चौपट हो चुके थे। इनकी गलत नीतियों और भ्रष्ट आचरण और गुण्डागर्दी के कारण उत्तर प्रदेश में कोई निवेश नहीं करना चाहता था। इन्होंने उत्तर प्रदेश के नौजवानों के हक पर डकैती डाली थी, उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया था। वह समाजवादी पार्टी पुनः प्रदेश के परसेप्शन को खराब कर देश में इसकी छवि बदरंग करने का प्रयास कर रही है। हम समाजवादी पार्टी और काँग्रेस के आचरण की निन्दा करते हैं।
श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर, अयोध्या से सम्बन्धित प्रकरण माननीय उच्चतम न्यायालय में लम्बित है। पूरे प्रकरण की गम्भीरता को समझते हुए भी विपक्ष ने आज सदन की अवमानना तथा अपमान किया है। साथ ही, विपक्ष द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में लम्बित और न्यायालय की निगरानी में चल रही सम्पूर्ण प्रक्रिया को अपमानित करने का शर्मनाक प्रयास भी किया गया। जो मुद्दा किसी न्यायाधिकरण या आयोग के पास लम्बित हो, उस मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। विशेष परिस्थितियों में यदि विधान सभा अध्यक्ष समझे कि चर्चा-परिचर्चा के कारण सम्बन्धित जाँच प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है, तो वह चर्चा की अनुमति दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिपक्ष ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक और दलीय नेताओं की बैठक में आश्वस्त किया था कि वह जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, उसके लिए वह नियम के अन्तर्गत नोटिस देंगे। दलीय नेताओं की बैठक में उन्होंने तथा संसदीय कार्य मंत्री ने कहा था कि जो विषय अध्यक्ष पीठ द्वारा स्वीकृत होंगे और चर्चा के लिए स्वीकार किए जाएंगे, उन विषयों पर सत्ता पक्ष की ओर से तर्कपूर्ण तरीके से जवाब दिया जाएगा। अध्यक्ष विधान सभा द्वारा बार-बार सदस्यों से अनुरोध किया कि वह नियमों के अन्तर्गत सदन में अपनी बात रखें। इस पर भी प्रतिपक्ष का सदन में संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना अत्यन्त निन्दनीय और शर्मनाक है।
विपक्ष का लोकतांत्रिक मूल्यों पर कभी विश्वास नहीं रहा है। यह सदन में नियमों और परम्पराओं का पालन नहीं करते। किसी न्यायाधिकरण या न्यायालय के अधीन संचालित या आयोग में लम्बित प्रकरण पर चर्चा तथा आरोप-प्रत्यारोप के माध्यम से तर्कहीन मुद्दों को उठाकर नकारात्मक और भ्रामक सूचनाओं का प्रचार-प्रसार करने का प्रयास करते हैं। विपक्षी दलों का यह आचरण अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है। यह संविधान निर्माताओं और बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर की भावनाओं का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में अयोध्या में चंदा चोरी नहीं, बल्कि चढ़ावा से जुड़ा एक प्रकरण आया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 12 जून को उत्तर प्रदेश सरकार से एस0आई0टी0 के माध्यम से इस प्रकरण की जाँच कराने का अनुरोध किया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक धर्मार्थ ट्रस्ट है। इस मामले में राज्य सरकार बिना ट्रस्ट के आग्रह के हस्तक्षेप नहीं कर सकती या माननीय न्यायालय के आदेश के बगैर कोई निर्णय नहीं ले सकती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 13 जून को एक एस0आई0टी0 गठित की। इसमें सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी अध्यक्ष, आई0जी0 रैंक के अधिकारी सदस्य और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ स्पेशल सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी सदस्य हैं। उन्हें अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गये। एस0आई0टी0 ने 15 जून से कार्य प्रारम्भ किया। उन्होंने 23 जून को अपनी पहली अन्तरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। उत्तर प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट के क्रम में ट्रस्ट को एस0आई0टी0 की सिफारिशें उपलब्ध करायी। ट्रस्ट ने 25 जून को एफ0आई0आर0 दर्ज करायी। एफ0आई0आर0 दर्ज होने के पश्चात उपलब्ध साक्ष्य और प्रमाण के आधार पर कुल आठ लोग पकड़े गए। अभी एस0आई0टी0 की जाँच चल रही थी कि माननीय उच्चतम न्यायालय में योजित एक पी0आई0एल0 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय ने आगे की कार्यवाही के लिए एस0आई0टी0 के पुनर्गठन के साथ ही सम्पूर्ण प्रकरण को अपनी देख-रेख में आगे बढ़ाया। इस मामले में किसी भी साधु-सन्त की संलिप्तता एस0आई0टी0 की प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट में नहीं पायी गयी।
श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के पूरे प्रांगण में 1,100 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। इस मामले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध साक्ष्य और प्रमाणों के आधार पर कुल आठ लोग संलिप्त पाये गये। इस सम्बन्ध में साधु-सन्तों पर आक्षेप करना, अयोध्या धाम को अपमानित करना, श्री राम जन्मभूमि मन्दिर को बदनाम करना सही नहीं है। वहाँ 1,100 कर्मचारी जो लाखों श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में दिन-रात, सर्दी-गर्मी-बरसात में सुविधाजनक दर्शन कराने, उत्तर प्रदेश के परसेप्शन को अच्छा बनाने और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने में अपना योगदान दे रहे हैं, उन्हें कटघरे में खड़ा करना एक आश्चर्यजनक स्थिति है। यह आक्षेप वह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगा रही है, जिन्होंने सदैव श्रीराम जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का अपमान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1990 में अयोध्या की गलियों और सरयू की पावन धारा को रक्त रंजित करने का पाप समाजवादी पार्टी की सरकार ने किया था। पूरा विश्व और राम भक्त यह जानते है कि इन्होंने राम भक्तों पर गोलियाँ चलाने का अक्षम्य पाप किया था। उन्होंने राम सेतु प्रकरण मुद्दे पर माननीय उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट दाखिल किया था, जिसमें प्रभु श्रीराम और प्रभु श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा कर उन्हें मिथक घोषित किया था।
अयोध्या के चढ़ावा चोरी से जुड़े प्रकरण को सरकार ने गम्भीरता से लिया, क्योंकि अयोध्या कोटि-कोटि सनातन धर्मावलम्बियों की आस्था का केन्द्र है। सरकार ने स्पष्ट किया था कि वह सीधे किसी ट्रस्ट में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, क्योंकि उस ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश सरकार ने गठित नहीं किया। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश से वह ट्रस्ट गठित है। इसलिए इस मामले में ट्रस्ट की अपील या माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर हम कार्यवाही को आगे बढ़ा पाएंगे।
राम भक्तों को अपमानित करने, भारत की सनातन आस्था पर प्रहार करने तथा सन्तों पर आक्षेप लगाने का समाजवादी पार्टी और काँग्रेस के सांसदों और नेताओं का आचरण सनातन धर्म का अपमान है। दुनिया में भारत के सनातन मूल्यों और आदर्शों के प्रति एक अच्छी भावना बनी थी, उस भावना पर इन दोनों दलों के नेताओं द्वारा किया गया प्रहार एवं आचरण सनातन विरोधी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में जो लोग पकड़े गए हैं, उनका भारतीय जनता पार्टी या साधु-सन्तों से कोई लेना देना नहीं है। इसके बावजूद पूज्य सन्तों, सनातन धर्म, भारतीय जनता पार्टी तथा किसी अन्य सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन को अनावश्यक कटघरे में खड़ा करके लांछन लगाया जा रहा है। उनके द्वारा सनातन के साथ-साथ सत्य को दबाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। इसीलिए यह लोग चर्चा से भागना चाहते हैं। यह वही लोग हैं जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का सदैव विरोध किया था। 22 जनवरी, 2024 को जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में 500 वर्षों के बाद श्रीरामलला की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का समारोह हो रहा था, उस कार्यक्रम में आमंत्रण के बावजूद यह लोग नहीं गए थे। यह लोग उन सभी मुद्दो पर सदैव मौन बने रहे, लेकिन आज आस्था की बात कर रहे हैं। यह लोग लगातार हिन्दुओं और भारत की सनातन परम्परा को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। यह आचरण उत्तर प्रदेश के साथ-साथ सनातन धर्मावलम्बियों का अपमान है।
आज सदन में समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा अध्यक्ष पीठ की अवमानना की गयी है। वह चर्चा से भागना चाहते हैं। जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। ऐसे मुद्दे को उठाकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, जिनका सदन से लेना देना नहीं था। फिर भी दूध का दूध और पानी का पानी हो, इसके लिए जब अध्यक्ष पीठ ने व्यवस्था दी, तो उसे मानने को तैयार भी नहीं हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है। संवाद के माध्यम से उनकी समीक्षा की जाती है। इसके उपरान्त हम एक परिणाम पर पहुँचते हैं। यह लोग उन मुद्दों पर चर्चा नहीं कराना चाहते हैं। केवल माहौल खराब कर जनहित से जुड़े मुद्दों को कमजोर करना चाहते हैं। इन्होंने पूरे सदन की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। आज विधान सभा में अध्यक्ष पीठ की अवमानना कर पूरे माहौल को तनावपूर्ण बनाने का कुत्सित प्रयास किया गया है। समाजवादी पार्टी और काँग्रेस का यह आचरण अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है।
संवैधानिक मूल्यों को तार-तार करने वाला है। जनहित एवं आमजन से जुड़े विकास के मुद्दे पर स्वस्थ चर्चा को आगे बढ़ाने की बजाय उत्तर प्रदेश की पहचान को फिर से धूमिल करने की कुत्सित चेष्टा की जा रही है। यह प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हितों पर कुठाराघात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा मार्शलों के साथ मारपीट और धक्कामुक्की करने का प्रयास किया गया। यह अत्यन्त शर्मनाक है। सदन में प्रत्येक सदस्य के लिए आवश्यक होता है कि वह अध्यक्ष पीठ का सम्मान करें और अध्यक्ष पीठ के निर्देशों का पालन करें। यदि कोई मुद्दा है, तो वह अध्यक्ष पीठ की अनुमति से सदन के पटल पर रख सकता है।



