टेकसंगम-2026: मुख्यमंत्री योगी ने लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का किया शुभारंभ।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना, न्याय व्यवस्था को मजबूत करना और समाज को सुरक्षित बनाना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समस्याओं के समाधान और शीघ्र निर्णय लेने में सहायक हो सकती है, लेकिन उसे मनुष्य का निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का उपयोग मानवीय विवेक, नैतिकता और लोककल्याण की भावना के साथ किया जाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 24 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन टेकसंगम-2026 के दूसरे दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक और विधिक अनुपालन पर आधारित लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने ‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन किया और ‘अभेद’ पहल की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में संस्थान और 10 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच सहयोग से संबंधित समझौतों का भी आदान-प्रदान किया गया।
विज्ञान, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेकसंगम विज्ञान, तकनीक और भारतीय मनीषा के समन्वय की नई दृष्टि प्रस्तुत करता है। वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संगम भारतीय संस्कृति, ज्ञान और आस्था का प्रतीक है। इसी प्रकार तकनीकी विकास को भी भारतीय ज्ञान परंपरा के विवेक और लोककल्याण की भावना से जोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने कार्यक्षमता बढ़ाई है और AI ने समस्याओं के समाधान की नई संभावनाएं खोली हैं। वहीं, डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में तकनीक को सुरक्षित, विश्वसनीय और जनहितकारी बनाना आवश्यक है।
AI और क्वांटम तकनीक से न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार AI और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में मिशन मोड पर कार्य कर रही है। इन तकनीकों के माध्यम से शासन, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टेकसंगम-2026 में AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डेटा प्रोटेक्शन और विधिक अनुपालन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य तकनीकी नवाचारों को व्यावहारिक रूप से समाज और न्याय व्यवस्था के हित में उपयोग करने की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।

यूपी में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन, 12 रेंज में प्रयोगशालाएं तैयार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य अपराधों की जांच और न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक रेंज में प्रयोगशालाओं की स्थापना की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 12 रेंज में फॉरेंसिक साइंस लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य प्रयोगशालाओं का कार्य अंतिम चरण में है। राज्य में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं। इन व्यवस्थाओं से घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने, नमूनों की जांच और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को गति देने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में पुलिस अधिकारियों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। संस्थान में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
लेक्सक्यू सेंटर और ‘लॉ विद लैब’ पहल से विज्ञान-कानून का समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की ‘लॉ विद लैब’ पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक साइंस और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग, व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं विकसित होंगी। उन्होंने कहा कि टेकसंगम के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौतों से विद्यार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा वैश्विक स्तर पर शैक्षिक सहयोग के नए अवसर मिल सकते हैं।
डेटा सुरक्षा और नागरिकों की निजता पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों की निजता, डेटा सुरक्षा और उनकी सहमति का महत्व भी बढ़ा है। कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को AI और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे के साथ डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
2030 तक पांच गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और तकनीकी विकास को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। नोएडा में सेमीकंडक्टर फैब यूनिट से संबंधित कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पांच गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि AI सिटी, तकनीकी केंद्रों और कौशल विकास से जुड़ी पहलों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में टेकसंगम
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि टेकसंगम-2026 में होने वाला विचार-विमर्श विज्ञान, तकनीक और न्याय व्यवस्था के बीच समन्वय को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन के क्षेत्र में अनुसंधान तथा नवाचार को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम को पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका की अध्यक्ष प्रो. तनुजा सिंह तथा उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, डिफेंस साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा, मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
टेकसंगम-2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश में AI, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इन पहलों का उद्देश्य तकनीकी विकास को जनहित, डेटा सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की मजबूती से जोड़ना है।


