रक्षाबंधन पर रक्षारोपण का ले संकल्प

मैं डॉक्टर प्रतिभा सिंह शीतल प्रथम आहार सोसायटी के साथ जनरल सेक्रेटरी के तौर पर जुड़कर कर 8-10 वर्ष से रक्षा रोपण जो की हमारे जीवन को बचाने वाले “ट्रू लाइफ सेवर” पेड़ पौधों को राखी /रक्षाबंधन के त्यौहार में पवित्र धागा बांधकर हर वर्ष मनाते हैं.हमने आज तक पूरे देश में लाखों वृक्ष लगाए हैं और उनको बचाने व उनसे जुड़ने के प्रयास के लिए रक्षारोपण का त्योहार हर वर्ष मनाते हैं. जिन पौधों को हमने लगाया वृक्षारोपण के नाम पर उन्हें हम बचाते हैं. रक्षारोपण करके बचपन से सुना व माना कि रक्षाबंधन का यह त्योहार यह बताता है कि भाई अपनी बहन की हमेशा रक्षा करेगा और उसको ध्यान में रखकर हम वर्षों से हमेशा ही अपने जीवन के लिए रक्षा रूपी ऑक्सीजन, प्राण वायु जो हम शास्वत रूप से लेते हैं. वो हमारे जीवन को चलाते हैं तो उन्हें रोपित करने के साथ-साथ उनकी रक्षा की भी जिम्मेदारी हमारी स्वयं की बन जाती है. इसको ध्यान में रखकर समयानुसार एक दूसरे की रक्षा करने के लिए ही हमने “रक्षा रोपण” की शुरुआत की और इसमें पूरे भारत में व भारत के बाहर भी बहुत से लोग हमसे जुड़े हैं. रक्षाबंधन पर रक्षारोपण का ले संकल्प

रक्षाबंधन पर रक्षारोपण का ले संकल्प

जो हर वर्ष अपनी-अपनी जगह पर अपने द्वारा लगाए गए वृक्षों के साथ ही साथ जिन्होंने अडॉप्ट किया है मतलब दूसरे के वृक्ष या कहीं कोई वृक्ष ऐसा है जो कमजोर है अथवा सूख रहा है तो उसको बचाने के साथ-साथ उसे अडॉप्ट करके ये राखी का पवित्र धागा बांधकर रक्षा रोपण मनाते हैं. जब भाई रक्षाबंधन हाथ में बांधता है तो इस विचार से कि ये धागा प्यार व केयर का है. वह आपकी रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहे. इसी सोच को ध्यान में रखकर हमने अपने और वृक्षों के बीच में इस रक्षा सूत्र को स्थापित किया। और इस बंधन को लेकर के आए जिसका नाम दिया गया रक्षा रोपण.

हर वर्ष जब हम वन महोत्सव मनाते हैं या पूरे वर्ष किए गए पौधारोपण में जितने भी पौधे हम लगाते हैं और उसके पहले और भी जो पौधे लगाए गए हैं सभी के साथ वृक्षारोपण का त्यौहार मनाते हैं. इससे हम दो तरीके से पौधों के साथ कनेक्ट होते हैं. एक हमने जिन पौधों को लगाया या अडॉप्ट किया है वह किस स्थिति में है बचें हैं या किसी समस्या में है.साथ ही साथ जो बॉन्डिंग है जीवन रक्षा हेतु रक्षाबंधन का उसको डेवलप करने में उसे मेंटेन करने में एक आनंद की अनुभूति के साथ-साथ अपने जिम्मेदारी का एहसास भी बनाएं रखना.

गर्मी में पेड़ पौधे पर विशेष ध्यान देना पड़ता है. ऐसे मौसम में इन्हें सिर्फ पानी देने से ही ताजगी नहीं मिलती है, बल्कि पानी देने का सही समय भी मालूम होना चाहिए. अगर आप गलत समय पर पौधों को पानी देंगे तो वह उनके लिए फायदेमंद नहीं होगा. गर्मियों में पौधों को हमेशा सुबह व शाम के समय पर पानी देना ही उपयुक्त रहता है.अगर आप दोपहर में पानी देंगे तो तेज धूप और गर्मी के कारण यह पानी जल्दी सूख जाएगा और पानी पौधों को नहीं मिलेगा. जबकि सुबह और शाम में दिया हुआ पानी लंबे समय तक नमी बनाए रखता है.

वृक्ष हमारे लिए ऑक्सीजन देते हैं, वायु प्रदूषण को कम करते हैं और बारिश को नियंत्रित करते हैं. वृक्षों से हमें कई तरह के उपयोगी पदार्थ मिलते हैं, जैसे लकड़ी, औषधियां, गोंद, छाल, फल-फूल, आदि. वृक्षों को लगाने से आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है और वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है. वृक्ष आस-पास की गर्मी को सोख लेते हैं, जिससे वातावरण में ठंडक रहती है. वृक्ष पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं. वृक्ष हमें विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, तूफ़ान, चक्रवात आदि से बचाते हैं. पेड़-पौधों की रक्षा में ही हमारी रक्षा है.

क्षाबंधन पर रक्षारोपण का ले संकल्प

आज देश और विदेश में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े किए जा रहे हैं. जंगलों को काटकर बड़ी बड़ी बिल्डिंग और कालोनियों का निर्माण हो रहा है तो क्या हम कह सकते हैं कि पर्यावरण आगे भी हमारी रक्षा करेगा? नहीं करेगा. पर्यावरण और प्रकृति का संतुलन ही जीवों की उत्पत्ति का माध्यम है. जीवन को बचाने के लिए आज हम सभी को पर्यावरण की रक्षा करनी ही होगी और पेड़ पौधों के साथ साथ नदियों को बचाना होगा. पर्यावरण को बचाने से ही आप, हम और सभी बच पाएंगे. रक्षाबंधन पर संकल्प लें और अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और उन पेड़ों की रक्षा भी करें. रक्षाबंधन पर रक्षारोपण का ले संकल्प

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