devotion

  • उत्तर प्रदेशPhoto of इटावा:जाति के नाम पर धर्म का चीरहरण

    इटावा:जाति के नाम पर धर्म का चीरहरण

    राजू यादव इटावा में जाति के नाम पर धर्म का अपमान, सनातन परंपरा हुई शर्मसार। जब धर्म और जाति के…

    Read More »
  • विशेषPhoto of भारतीय शिक्षा में पुनर्विचार भाषा 

    भारतीय शिक्षा में पुनर्विचार भाषा 

    विजय गर्ग जैसा कि जर्मनी से जापान के वैश्विक उदाहरणों में मूल भाषा की शिक्षा के मूल्य की पुष्टि की…

    Read More »
  • विशेषPhoto of लोकतंत्र बहाली का सपना

    लोकतंत्र बहाली का सपना

     25-26 जून 1975 की रात्रि इतिहास का काला अध्याय है। पांच दशक पहले देश में तानाशाही थोपने के साथ आपातकाल…

    Read More »
  • राष्ट्रीयPhoto of लैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट

    लैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट

    प्रियंका सौरभ एक चिंताजनक संकेत,लैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट। एक ओर भारत चंद्रमा पर पहुंचने की उपलब्धियों…

    Read More »
  • राष्ट्रीयPhoto of  विश्व शांति दिवस

     विश्व शांति दिवस

    अजय कुमार झा अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा शांति…

    Read More »
  • लखनऊPhoto of डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी टीबी मरीज को लेंगे गोद-ब्रजेश पाठक

    डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी टीबी मरीज को लेंगे गोद-ब्रजेश पाठक

    डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी टीबी मरीज को लेंगे गोद। टीबी मुक्त भारत अभियान में स्वास्थ्य विभाग की पहल, शासनादेश जारी। उपमुख्यमंत्री ने दी…

    Read More »
  • राष्ट्रीयPhoto of जम्मू-कश्मीर में वोटिंग देख पाकिस्तान उगल रहा जहर

    जम्मू-कश्मीर में वोटिंग देख पाकिस्तान उगल रहा जहर

    जम्मू-कश्मीर में बंपर वोटिंग को देख क्यों पाकिस्तान भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है..? सोचने वाली बात यह है कि…

    Read More »
  • राजनीतिPhoto of लोकतंत्र के हित में एक राष्ट्र-एक चुनाव

    लोकतंत्र के हित में एक राष्ट्र-एक चुनाव

    चुनाव एक देश एक चुनाव की जगह  सुरक्षा की दृष्टि से देश में कई चरणों में कई बार लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव होने लगे जिसने देश पर अनावश्यक खर्च भी बढ़ा दिया। -डा. भरत मिश्र प्राची      एक राष्ट्र एक चुनाव इस देश के लिये कोई नई पहल नहीं है. आजादी के बाद 1951-52 से लेकर 1967 तक के लोकसभा विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते रहे लेकिन जब से सत्ता के प्रति राजनीति में मोह ज्यादा पनप गया, देश में छोटे – छोटे दल ज्यादा पनप गये जिससे आया राम, गया राम की कहानी शुरू हो गई। सत्ता के लिये कौन किधर चला जायेगा, कब चला जायेगा, किसी को पता नहीं। इस तरह के बदले हालात एवं असुरक्षित माहौल ने देश में लोकतंत्र की तस्वीर ही बदल डाली। विधान सभा, लोकसभा के परिवेश समय से पहले हीं डगमगाने लगे। मघ्यावधि चुनाव की स्थितियां बनने लगी। एक देश एक चुनाव की जगह  सुरक्षा की दृष्टि से देश में कई चरणों में कई बार लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव होने लगे जिसने देश पर अनावश्यक खर्च भी बढ़ा दिया। अब फिर से एक राष्ट्र, एक चुनाव कराये जाने की संवैधानिक बात सामने आ रही है जिसके तहत इस दिशा में देश के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविद के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिश स्वीकार करते हुए वर्तमान केन्द्र सरकार ने वर्ष 2029 में एक राष्ट्र एक चुनाव कराये जाने की पहल शुरू कर दी है। केन्द्र सरकार की यह पहल देश एवं लोकतंत्र के हित में अवश्य है जहां चुनाव पर होने वाले अनावश्यक खर्च रोका जा सकता है पर देश में बदली राजनीतिक पृष्ठ्भूमि जहां लाभतंत्र के साथ – साथ माफिया वर्ग हावी है, इस तरह के परिवेश को कब तक स्थाईत्व प्रदान कर सकेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। इस पहल पर जहां सत्ता पक्ष सकरात्मक नजर आ रहा है, वहीं विपक्ष अपने – अपने तरीके से विरोध जता रहा है। फिर भी इस पहल पर कुछ राजनीतिक, कुछ संवैधानिक अड़चनें अवश्य नजर आ रही है जिसका समाधान सभी को मिलकर तलाशना होगा ।      फिलहाल वर्ष 2025, एवं 2026 में देश के 17 राज्यों के होने वाले विधान सभा चुनाव के कार्यकाल को बढ़ाये जाने की समिति ने सिफारिश की है जहां कुछ राज्यों में केन्द्र की सत्ता पक्ष राजनीतिक दल की सरकार तो कुछ राज्यों में विपक्ष की सरकार सत्ता में है जो एक टेढ़ी खीर है।     जब देश में एक राष्ट्र एक चुनाव के तहत लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव करा लिये जाय तो इस बात की कोई गारंटी नहीं कि देश में मध्यावधि चुनाव की स्थिति न बने, यहीं तर्क विपक्ष की ओर से आ रहा है।       एक राष्ट्र एक चुनाव को सफल बनाने के लिये देश में मध्यावधि चुनाव की स्थिति को टालने के मार्ग तलाशने होगे। इस दिशा में संविधान में एक कानून यह भी परित किया जाना चाहिए जो परिवेश मध्यावधि चुनाव के कारण बनते है, उस पर अकुंश लगाया जाय। बहुमत  के आधार पर सरकार गिराने के बजाय अल्पमत की सरकार चलते रहने का कानून बने जिससे आया राम गया राम की कहानी खत्म हो। लोकसभा एवं विधान सभा परिवेश पर आया राम गया राम प्रभावहीन रहेंगे एवं देश में बहुदलीय की जगह राजनीतिक दलों की संख्या सीमित रहे तो एक राष्ट्र एक चुनाव सफल हो सकता है।

    Read More »
  • राष्ट्रीयPhoto of भारत को चौकन्ना रहना होगा..!

    भारत को चौकन्ना रहना होगा..!

    क्या इससे बदल जाएंगे युद्ध के तरीके-भारत को भी रहना होगा चौकन्ना। युद्ध में अब ऐसी युक्तियों का उपयोग होता…

    Read More »
  • राजनीतिPhoto of केजरीवाल का आखिरी दांव क्या रंग दिखायेगा..?

    केजरीवाल का आखिरी दांव क्या रंग दिखायेगा..?

    राजेश कुमार पासी केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करके राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी…

    Read More »
Back to top button