ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण कोटा के बाद ही उपवर्गीकरण न्यायसंगत

भाजपा ईबीसी व एमबीसी को न्याय देने की पक्षधर नहीं, ओबीसी में नफरत पैदा करने में जुटी। “ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण कोटा के बाद ही उपवर्गीकरण न्यायसंगत।”

चौ.लौटनराम निषाद

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ईडब्ल्यूएस के नाम से 10 प्रतिशत आरक्षण कोटा संविधान संशोधन कर 48 घंटे में ही दे दिया। संवैधानिक व्यवस्थानुसार आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।परंतु राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सरकार ने मा. उच्चतम न्यायालय व संविधान से परे जाकर संविधान संशोधन कर सामान्य वर्ग की 8 लाख से कम आय वालों को 10 प्रतिशत कोटा दे दिया।ओबीसी कोटा के बंटवारे की चर्चा के मुद्दे पर भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व कांग्रेस नेता चौ. लौटनराम निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछड़ों की ताकत को कमजोर करने व उपसी नफरत पैदा करने के लिए भाजपा ओबीसी कोटा का वर्गीकरण करने की गुणा गणित कर रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा का मकसद अतिपिछड़ों,अत्यंत पिछड़ों को सामाजिक न्याय देना नहीं, आपस में नफरत पैदा कर 2024 में राजनीतिक लाभ उठाना है।


उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वंचित वर्ग को वास्तव में सामाजिक न्याय देना चाहती है तो ओबीसी को पहले समानुपातिक आरक्षण कोटा की अधिसूचना जारी करे। उत्तर प्रदेश की 54 प्रतिशत से अधिक पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत ही कोटा दिया गया है,जो संविधान के अनुच्छेद 15(4),16(4) व 16(4ए) के समुचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के प्रतिकूल है।कांग्रेस नेता लौटनराम निषाद ने कहा कि भाजपा पिछड़ों,अतिपिछड़ों वंचितों की हितैषी है तो मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को लागू करे।पिछड़ी जातियों को कार्यपालिका,विधायिका,न्यायपालिका,निजी क्षेत्र के उपक्रमों व संस्थानों में एससी, एसटी की तरह समानुपातिक आरक्षण कोटा दिए जाने की मांग किया।

निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के हवाले से बताया कि सामान्य वर्ग की संख्या 20.94 प्रतिशत, एससी की 24.95 प्रतिशत, एसटी की 0.56 प्रतिशत व ओबीसी की संख्या 54.05 प्रतिशत है। जिसके अनुसार पिछड़ा/ यादव 10.49 प्रतिशत,अतिपिछड़ा 10.22 प्रतिशत व सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग 33.34 प्रतिशत है।अतिपिछड़ा वर्ग में लोधी,कुर्मी,कलवार,सोनार,अर्कवंशी,गोसाई,जाट,गुजर को रखा गया है।जस्टिस राघवेन्द्र कुमार की अध्यक्षता वाली उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति-2018 की रिपोर्ट भी लगभग सामाजिक न्याय समिति से मिलती जुलती ही है।निषाद ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को 3 या 4 उपश्रेणियों में विभक्त किया जाय,पहले ओबीसी को एससी, एसटी की भांति जनसंख्या के बराबर 54 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया जाय।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ओबीसी को न्याय देना नहीं चाह रही बल्कि बीसी, ईबीसी व एमबीसी को आपस में लड़ाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।यही आर एस एस व भाजपा की डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी का हिस्सा है।

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