आजादी के पीछे बलिदानियों का संघर्ष-मुख्य सचिव

22 और 23 मार्च प्रदेश और देश के लिए महत्वपूर्ण दिन।आजादी के पीछे बलिदानियों का संघर्ष। शहीदों के सपनों को साकार करने की जरूरत। ऐसे आयोजन युवाओं को देश को आगे ले जाने के लिए प्रेरित करेंगे। 

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] लखनऊ।  राजधानी लखनऊ में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित दो दिन चलने वाले आजादी के अमृत महोत्सव के तहत उत्तर प्रदेश के गठन की यात्रा और शहीदी दिवस के अवसर पर ‘रंग दे बसंती’ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र तथा प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश मेश्राम उपस्थित रहे, जिन्होंने संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश के गठन यात्रा और बलिदानियों के सम्मान में आयोजित चित्र प्रदर्शिनी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 22 मार्च से प्रारंभ होकर 23 मार्च तक चलेगा। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि 22 मार्च उत्तर प्रदेश के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रदर्शिनी में भी हमने देखा कि 22 मार्च 1902 प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इस दिन प्रदेश का नाम यूनाइटेड प्रॉविन्सेज आफ आगरा एण्ड अवध किया गया था। कालांतर में 24 जनवरी 1950 को प्रदेश का नाम यूनाइटेड प्रॉविन्सेज से बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया। 

         उन्होंने कहा कि 06 अगस्त, 1937 को प्रदेश का पहचान चिन्ह मछली, तीर धनुष, और धाराएं (कोट आफ आर्म्स) का अनुमोदन किया गया था जो कि प्रदेश की हिंदू मुस्लिम एकता की साझी विरासत और गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। उन्होंने कहा कि 23 मार्च आजादी के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है इस दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई। हाल ही में प्रदेश ने लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व मनाया और अपना प्रतिनिधि चुना। इस आजादी के पीछे तमाम बलिदानियों का संघर्ष था, जिन्होंने दूसरे लोगों को उत्साहित किया, प्रेरणा दी।कार्यक्रम में स्वाधीनता संग्राम और बलिदानियों के सम्मान में आयोजित प्रदर्शिनी का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 में आजादी की पहली क्रांति मंगल पांडेय, रानी लक्ष्मीबाई, ऊदा देवी, अवंतीबाई, झलकारी बाई, बेगम हजरत महल, सुभद्रा कुमारी चौहान, जय शंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद के योगदान को देश कभी भुला नहीं सकता है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था वह कैसा भारत देखना चाहते थे , जहां हर कोई अपनी क्षमता का पूरा प्रयोग कर सके, है एक नागरिक देश की उन्नति में अपना पूरा सहयोग कर सके, जिसकी झलक इस प्रदर्शिनी में मिल रही। आज हमें उन सभी स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के सपनों को साकार करने की जरूरत है। उन्होंने होली पर्व के तुरंत बाद रंग से बसंती जैसे शानदार कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संस्कृति विभाग को शुभकामना और बधाई देते हुये कहा कि अमर बलिदानी आजादी के दीवानों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों से प्रदेश के युवाओं को देश को दुनिया में आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।   इस अवसर पर मुख्य सचिव ने दो दिवसीय कार्यक्रम में पतंगबाजी  प्रतियोगिताओं के भाग लेने वाले विजेताओं को पुरस्कृत भी किया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश व प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों ने एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां देकर वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। [/Responsivevoice]

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