राहुल ने बनाया अभिनेय के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम

प्रसिद्ध भोजपुरी हास्य अभिनेता राहुल श्रीवास्तव की 20 फिल्में हैं प्रदर्शन को तैयार। ऑर्केस्ट्रा से आकर्षित हो कला की दुनिया में कदम रखने वाले राहुल ने बनाया अभिनेय के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम।

मायानगरी मुंबई में आकार अपनी पहचान बनाना कभी भी आसान नहीं रहा है, लेकिन जिसने जिद्द, जुनून और कड़ी मेहनत की है। उसे यहाँ एक अदद पहचान भी मिली है। जी हाँ, ऐसे ही एक कलाकार हैं राहुल श्रीवास्तव, जिनकी ख्याति आज भोजपुरी सिने इंडस्ट्री में एक हास्य अभिनेता की है। उन्होंने अब तक भोजपुरी के तकरीबन सभी कलाकारों के साथ काम किया है और आज की तारीख में उनकी बैक टू बैक 20 फिल्में रिलीज को तैयार हैं। मगर राहुल श्रीवास्तव के लिए यह बेहद आसान कभी भी नहीं रहा।

भले राहुल श्रीवास्तव (कृष्णराज सहाय) का जन्म बिहार पटना के कंकड़बाग इलाक़े में १९ जुलाई सन् १९७८ को एक कायस्थ परिवार में हुआ । मगर आज वे अपने दम पर अथक प्रयास से इस मुकाम तक पहुंचे हैं। राहुल, चार बहनों के बीच अकेले थे। बचपन से ही इन्हें संगीत और अभिनय में रुचि थी। इनकी माता स्व0 मायारानी श्रीवास्तव (भूतपूर्व लेखाधिकारी, BSNL बिहार झारखंड ) तथा पिता स्व0 रमेश कुमार सहाय ( DIRECTOR OF TELEGRAPH, CTO, PATNA) थे। माँ बाप की एकलौती संतान होने से थोड़ा लाड़ प्यार भी मिलता रहा। जब ये क़रीब ६ साल के थे तो इनके घर में एक ऑर्केस्ट्रा का आयोजन किया गया था वही से इन्हें कलाकारी करने का शौक़ चढ़ गया । पढ़ाई के साथ गाना भी गाना शुरू कर दिया था ।इसी बीच उनकी माँ का स्थानांतरण राँची हो गया, जहां से पढ़ाई के साथ उन्होंने एक नाट्य संस्था से जुड़ कर अभिनय को आत्मसात कर लिया। साथ में गायिकी भी चलती रही।

गौस्नर हाई स्कूल राँची से मैट्रिक तथा वहीं से इन्टरमीडिएट तक शिक्षा लेकर पटना वापस आ गए। बाँकी पढ़ाई पटना में की। उस वक्त बिहार में ऑर्केस्ट्रा ऑन मासुमी का बहुत क्रेज हुआ करता था। तो राहुल उससे जुड़े और सिंगिंग करते रहे। अभिनय भी उनका जारी रहा, लेकिन फिर वे पटना में पाटलिपुत्र फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इन्स्टिट्यूट में कैमरामैन की विधिवत शिक्षा लेकर कुछ एल्बम में कैमरामैन के तौर पर काम किया। तभी पटना में एक भोजपुरी फ़िल्म “चाचा भतीजा” की शूटिंग होने जा रही थी । तो एक फ़िल्म प्रचारक के माध्यम से उनकी मुलाक़ात फ़िल्म के निर्देशक बाली से हुई और उन्हें इस फिल्म से ब्रेक मिला। फिर दूसरी फ़िल्म दिनेश लाल यादव निरहुआ के साथ “क़सम धरती मईया की” में काम किया, जिसके निर्देशक थे “ससुरा बड़ा पईसा वाला” जैसी सिनेमा देने वाले अजय सिन्हा। उसके बाद उन्होंने मुम्बई का रुख कर लिया। और वहाँ कई फ़िल्मों के काम करने के साथ ही वही बस गए।

पटना के रंगमंच से भी उनका गहरा नाता रहा है। राहुल को उनके अभिनय के लिए सबरंग कामेडी किंग अवार्ड, विफा अवार्ड, १०वां अन्तर्राष्ट्रीय भोजपुरी महासम्मेलन तथा अनेकों प्रकार के अवार्ड से सम्मानित किया गया । अभी तक तकरीबन वे 80 फ़िल्मों का अनुभव लिए भोजपुरी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। अभी इनकी आने वाली तक़रीबन 20 फ़िल्में प्रदर्शित होने को तैयार है । इनकी फ़िल्मों की बड़ी संख्या है जिसमें, चाचा भतीजा, क़सम धरती मईया की, हमार रजऊ दारोग़ा नंबर 1 , गंगा कोहरे देस में, बाह खिलाड़ी बाह, भईया के ससुरारी में, निरहुआ चलल ससुराल, किशन अर्जुन, आजा ओढ़नियाँ तान के, साथिया, बाज गईल डंका, ज़िद्दी, दिल है कि मानता नहीं, इच्छाधारी नाग, लड़ाई, जो जीता वही सिकंदर, भोजपुरिया दारोग़ा, तेज़ाब एगो गंगाजल, तीन ठग और राजा जैसी फ़िल्में शामिल हैं।

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