लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों का गुनहगार कौन?

आखिर इस दर्दनाक हादसे के पीछे वो कौन सी 5 बड़ी और मुख्य वजहें थीं, जो मासूम बच्चों के लिए साक्षात काल बन गईं? क्या यह केवल एक दुर्घटना थी, या फिर लापरवाही, अव्यवस्था और जिम्मेदार लोगों की अनदेखी ने इन नन्हीं जिंदगियों को मौत के मुंह में धकेल दिया? आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख कारणों को, जिन्होंने एक सामान्य दिन को मातम में बदल दिया.हादसा, लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?

लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड में कुल 15 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई है. केजीएमयू (KGMU) ट्रॉमा सेंटर के मुताबिक, कई छात्र झुलसे हैं जिनका इलाज जारी है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में आग शॉर्ट सर्किट और एसी पर ओवरलोड के कारण लगी. सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बिना फायर एनओसी (NOC) के चलाई जा रही इस इमारत में बच्चों की मौत के पीछे बेंचों और किताबों के जलने से उठा जहरीला धुआं, कंप्यूटर सिस्टम और अवैध गेमिंग जोन प्रमुख काल बने. लखनऊ का अलीगंज (पुरनिया) इलाका एक ऐसी भीषण और रोंगटे खड़े कर देने वाली त्रासदी का गवाह बना है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. उषा मेहता मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में भड़की भीषण आग ने 15 मासूम बच्चों की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. केजीएमयू (KGMU) ट्रॉमा सेंटर के सीएमओ डॉ. अमिय अग्रवाल के अनुसार, अस्पताल में 21-22 बच्चों को लाया गया था, जिनमें से 15 बच्चों को मृत अवस्था (ब्रॉट डेड) में लाया गया. इसके अलावा, जान बचाने के लिए छज्जे से कूदे बच्चों समेत 5 गंभीर घायलों का इलाज जारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है

इस हादसे के पीछे मुख्य वजह कौन थीं, जो बच्चों के लिए साक्षात काल बन गईं?


बिना फायर NOC के बारूद के ढेर पर चल रही थी मौत की बिल्डिंग


इस पूरे अग्निकांड में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस तीन मंजिला कमर्शियल इमारत के मालिक ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया था. बिल्डिंग के मालिक ने फायर एनओसी (No Objection Certificate) के लिए कभी अप्लाई ही नहीं किया था. बिना किसी वैध एनओसी, आपातकालीन निकास (एग्जिट गेट) और अग्नि सुरक्षा उपकरणों के ही इस इमारत में धड़ल्ले से एक लाइब्रेरी, कंप्यूटर कोर्स कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन का संचालन किया जा रहा था, जिसने सीधे तौर पर इस भीषण हादसे को दावत दी.


एसी (AC) पर ओवरलोड और कंप्यूटर सिस्टम में धमाका


जांच में सामने आया है कि भीषण गर्मी के कारण बिल्डिंग में लगे एयर कंडीशनर (AC) पर अचानक लोड बहुत ज्यादा बढ़ गया था. एसी पर अत्यधिक लोड बढ़ने की वजह से पूरी बिल्डिंग की वायरिंग में भयंकर शॉर्ट सर्किट हुआ. इस शॉर्ट सर्किट ने कंप्यूटर लैब में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम्स को अपनी चपेट में ले लिया. कंप्यूटरों के प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स ने इतनी तेजी से आग पकड़ी कि पल भर में ही पूरी लैब आग के शोलों में तब्दील हो गई और बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.


‘यमदूत’ बना बेंचों का सनमाइका और जहरीला धुआं


जैसे ही कंप्यूटर लैब से आग आगे बढ़ी, उसने क्लासरूम और लाइब्रेरी के भीतर रखे बच्चों के बैठने वाले बेंचों और फर्नीचर को अपनी चपेट में ले लिया. इन बेंचों में इस्तेमाल किए गए प्लाईवुड, प्लास्टिक और सनमाइका के जलने के कारण पूरे फ्लोर पर बेहद गाढ़ा, काला और जहरीला धुआं फैल गया. कमरे में वेंटिलेशन न होने की वजह से यह धुआं सीधे बच्चों के फेफड़ों में बैठ गया, जिससे झुलसने से पहले ही दम घुटने (Suffocation) के कारण मासूम बच्चे बेहोश होकर गिरने लगे.


किताबों का ढेर: आग की लपटों को मिला ‘ईंधन’


इमारत के भीतर चल रही लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर में भारी मात्रा में किताबों और कॉपियों का स्टॉक जमा था. चूंकि कागज में आग बेहद तेजी से फैलती है, इसलिए जैसे ही लपटें किताबों के रैक तक पहुंचीं, आग ने पूरी तरह से विकराल रूप धारण कर लिया. किताबों के जलने से न सिर्फ आग की तीव्रता दोगुनी हो गई, बल्कि इससे पैदा हुए भारी धुएं ने पूरी सीढ़ियों को ब्लॉक कर दिया. भागने के लिए कोई सुरक्षित जगह न मिल पाने के कारण बच्चे अंदर ही ट्रैप हो गए.


तीसरी मंजिल पर मौत का जाल: अवैध ‘गेमिंग जोन’


हादसे को और ज्यादा भयावह बनाने में इस बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर चल रहे गेमिंग जोन ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. गेमिंग जोन में भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, हाई-वोल्टेज वायर, सिंथेटिक मैट और प्लास्टिक फिक्स्चर मौजूद थे. नीचे के फ्लोर से शुरू हुई आग जैसे ही ऊपर गेमिंग जोन तक पहुंची, वहां मौजूद प्लास्टिक और ज्वलनशील सामग्रियों के कारण पूरी बिल्डिंग पल भर में ही एक दहकते हुए तंदूर में बदल गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भी भारी बाधा आई.

अखिलेश यादव लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेन्टर और एनीमेंशन सेन्टर में भीषण अग्निकांड में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की हुई मौत पर शोक जताते हुए गहरी संवेदना प्रकट की. घायल छात्र -छात्राओं के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. उन्होंने कहा कि घायल छात्र-छात्राओं को अच्छी से अच्छी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय. अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी लखनऊ महानगर अध्यक्ष फाखिर सिद्दीकी प्रमुख पदाधिकारियों एवं नेताओं के साथ घटनास्थल पर पहुँचे. उन्होंने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया और घटना की जानकारी ली. घटनास्थल पर उनके साथ सपा लखनऊ नगर  महासचिव गौरव सिंह यादव, प्रदेश सचिव प्रदीप कन्नौजिया, अनीस अहमद लारी, पूर्व पार्षद राज कुमार सिंह राजा, नगर उपाध्यक्ष रजी अहमद, सतीश रावत, प्रशांत यादव, राकेश रावत, कोषाध्यक्ष राजवीर सिंह नगर सचिव राजेन्द्र तिवारी, विनय यादव, सपा नेता उपेंद्र कुमार सिंह एव शिबू चौधरी भी मौजूद रहे।  

पुरनिया अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेन्टर में हुए हृदयविदारक भीषण अग्निकांड में 14 मासूम छात्र-छात्राओं की जिंदा जलकर हुई दर्दनाक मृत्यु की घटना पर उत्तर प्रदेश कंाग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय-पूर्व मंत्री ने गहरा दुःख व्यक्त किया है एवं शोक संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस असह्य दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इस अग्निकाण्ड की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने एवं इस प्रकार की दुःखद घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सख्त कार्यवाही किए जाने की मांग की है. साथ ही उन्होने घायलों के समुचित इलाज व मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रूपये आर्थिक मुआवजा प्रदान किये जाने की मांग की है.

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