लखनऊ अग्रिकांड में 15 मासूमों की दर्दनाक मौत से आहत CM योगी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाकर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए बड़े एक्शन का दिया आदेश…। क्या 15 मासूमों की मौत के दोषियों को मिट्टी में मिला देंगे, या फिर होगा बुलडोजर एक्शन?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा अग्रिकांड के दोषियों को किसी भी हालात में बख्शा न जाए कड़ी से कड़ी सजा मिला. दोबारा इस तरह का कांड न हो सके तो बुलडोजर एक्शन भी हो। मौत की बिल्डिंग में LDA ने नोटिस चस्पा कर दिया। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 मासूमों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और संबंधित विभागों के अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर ऐसी कौन सी लापरवाही हुई, जिसकी वजह से 15 मासूमों की जान चली गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन कराया गया होता, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई होती और फायर सेफ्टी नियमों को गंभीरता से लिया गया होता तो शायद इतने बड़े हादसे को रोका जा सकता था। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में दूसरों के लिए भी नजीर बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कहीं भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल उस इमारत को लेकर उठ रहा है जहां यह हादसा हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन की वैधता, सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल हैं। इसी बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA ने संबंधित भवन पर नोटिस चस्पा कर दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि भवन निर्माण और स्वीकृति प्रक्रिया की भी गहन जांच की जा रही है।
जानकारों का कहना है कि यदि जांच में अवैध निर्माण, नक्शे के विपरीत निर्माण या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की पुष्टि होती है तो प्रशासन कठोर कार्रवाई कर सकता है। उत्तर प्रदेश में पहले भी कई मामलों में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में इस मामले में भी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि आखिर फायर सेफ्टी ऑडिट नियमित रूप से क्यों नहीं हुए। क्या संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था? यदि किया था तो कमियां क्यों नहीं दूर कराई गईं? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच एजेंसियां अब कई विभागों के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। बताया जा रहा है कि प्रशासन भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृत नक्शे, फायर एनओसी, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेश भर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अस्पतालों, स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, मॉल, अपार्टमेंट और भीड़भाड़ वाले सभी भवनों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। जहां भी कमियां मिलें, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे हादसों को होने से पहले रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा करें और किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें।
उधर, हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और उनके परिवारों को लेकर पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है। राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और किसी भी दोषी को नहीं छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री के सख्त रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिम्मेदारी जहां तक जाएगी, वहां तक कार्रवाई हो सकती है।
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अब पूरे प्रदेश की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर 15 मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या यह केवल एक दुर्घटना थी या फिर लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी का परिणाम? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे। फिलहाल इतना तय है कि लखनऊ अग्निकांड ने प्रशासनिक व्यवस्था, फायर सेफ्टी सिस्टम और भवन निर्माण नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस निष्कर्ष पर पहुंचती है और दोषियों के खिलाफ कितनी बड़ी कार्रवाई होती है। प्रदेश की जनता यही उम्मीद कर रही है कि 15 मासूमों की मौत व्यर्थ न जाए और इस हादसे से ऐसा सबक मिले कि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।

भ्रष्टाचार की भी जांच हो, पीड़ितों को मिले एक करोड़ मुआवजा : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अलीगंज में हुए कोचिंग अग्निकांड पर दुख जताते हुए भवन के नक्शे, एनओसी और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है और निष्पक्ष जांच होने पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आएगी। मंगलवार को मीडिया से बातचीत के बाद अखिलेश यादव ने केजीएमएयू पहुंचकर अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल युवक जयंत कुमार से मुलाकात की और चिकित्सकों से उसके इलाज की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।

राजनीति न करें अखिलेश, हादसा उनके कुकृत्यों का नतीजा : ब्रजेश पाठक
अलीगंज अग्निकांड पर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तीखा हमला बोला। उन्होंने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह हादसा सपा सरकार के कुकृत्यों का नमूना है। घटना में 15 लोगों की जान गई है और अखिलेश एसी कमरे में बैठकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्लॉट आवंटन से लेकर इस अवैध बिल्डिंग का निर्माण सपा सरकार में हुआ था। इमारत के सील होने के बाद उसे खोल दिया गया। ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द कर दिया गया था। सेटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि दिसंबर 2015 में प्लॉट खाली था। फरवरी 2016 में निर्माण शुरू हुआ और 5 जून तक इमारत बन गई। नियम ताक पर रखकर नक्शा पास कराया गया। उस समय किसी अधिकारी की जवाबदेही तय कर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सीएम योगी घटना की सूचना पर अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें न्याय दिलाने के लिए रात में ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। जितने भी लोग इस घटना के जिम्मेदार होंगे, सभी पर कार्रवाई होगी। एसआईटी बना दी गई है। जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया है, उनके दर्द को समझते हुए सरकार हर संभव मदद और न्याय सुनिश्चित करेगी।

दोषियों पर कार्रवाई करे सरकार : संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने आज प्रेसवार्ता में लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड पर डबल इंजन सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संजय सिंह ने कहा कि जिस कंप्यूटर सेंटर की बिल्डिंग में आग लगी, उसे ध्वस्त करने का आदेश 2016 में ही हो चुका था। फिर यह अवैध और जर्जर बिल्डिंग कैसे खड़ी रही? किसके संरक्षण में इसे चलाया जा रहा था, इसकी जांच होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि जब लोग दमकल विभाग को फोन कर रहे थे, तो समय पर कोई गाड़ी नहीं पहुंची। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हर अग्निकांड के बाद केवल जांच का नाटक होता है।
दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई : केशव प्रसाद मौर्य
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अलीगंज में हुए अग्निकांड पर शोक जताते हुए कहा कि इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में ऐसे सभी संस्थानों और स्थानों के जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरकार का प्रयास है कि इस प्रकार की दुर्घटना पुनरावृत्ति न हो। कहा, हादसे की सूचना मिलते ही उन्होंने अपना अयोध्या का कार्यक्रम भी निरस्त कर दिया। मौर्य ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम दुख की इस घड़ी में सभी शोकाकुल परिवारों को यह पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करें।



