जानें योग करने के बाद शवासन क्यों जरूरी

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अनिल शर्मा

आश्चर्यजनक रूप से, शवासन को योग के सबसे चुनौतीपूर्ण आसनों में से एक माना जाता है। लेटना, साँसों को नियंत्रित करना और मन में चल रही हलचल को शांत करना उतना आसान नहीं होता जितना दिखता है। जिस प्रकार आप शवासन के दौरान जीवन की छोटी-छोटी चिंताओं को छोड़ना सीखते हैं, उसी प्रकार आप कठिन परिस्थितियों में सचेत रहकर प्रतिक्रिया करने की क्षमता भी विकसित करते हैं। क्या आप जानते हैं कि व्यायाम के बाद मिलने वाला आनंद पूरी तरह प्राकृतिक होता है? योगाचार्य के. डी. मिश्रा के अनुसार, शवासन आपकी ऊर्जा और सकारात्मकता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है, जिससे आप योग मैट से उतरने के बाद भी मानसिक रूप से तरोताजा महसूस करते हैं। जानें योग करने के बाद शवासन क्यों जरूरी

Covid-19 के बाद से हम सभी अपनी सेहत पर पहले से अधिक ध्यान देने लगे हैं। हर व्यक्ति अच्छी डाइट के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहा है। इसी कारण, योग के प्रति लोगों की रुचि भी तेजी से बढ़ी है। स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचाव के लिए लोग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रोज़ाना योग का अभ्यास कर रहे हैं। हालांकि, योगाभ्यास के बाद शवासन करने को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शवासन योग के सबसे सरल आसनों में से एक है, जिसमें आपको पीठ के बल लेटकर पूरी तरह रिलैक्स होना होता है। इसके बावजूद, कई लोग इस महत्वपूर्ण आसन को करना टाल देते हैं। लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि बिना शवासन के आपका योग सत्र अधूरा माना जाता है।

आइए जानते हैं योगाचार्य के.डी.मिश्रा से कि योग के बाद शवासन करना क्यों आवश्यक है..?

“शव” का अर्थ मृत शरीर होता है, और अपने शरीर को पूर्णतः स्थिर व निःसंग बना लेने के कारण ही इस आसन को “शवासन” कहा जाता है। इस आसन का उपयोग आमतौर पर योग सत्र को समाप्त करने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह एक गहन विश्राम देने वाला आसन है, जो शरीर, मन और आत्मा को पुनर्जीवित करता है। शवासन, जिसका नाम लेटे हुए मृत शरीर की मुद्रा से लिया गया है, शरीर को संपूर्ण विश्राम देने की स्थिति है। यह योग सत्र के अंत में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण आसन है, क्योंकि योगाभ्यास की शारीरिक सक्रियता का समापन मानसिक शांति और विश्राम के साथ होना चाहिए। यह वह अवस्था होती है, जब शरीर पूर्ण रूप से शिथिल हो जाता है और गहरी शांति का अनुभव करता है।

शवासन करने की विधि

शवासन करने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाएँ, दोनों टाँगे साथ में हों परन्तु एक दूसरे को स्पर्श न करते हुए, हथेलियाँ आकाश की ओर खुली, दोनों बाजू शरीर के साथ रखें।
अपने चेहरे की माँसपेशियों को ढीला रखते हुए आँखों को धीरे से बंद करें। नासिकाओं से धीरे-धीरे गहरी साँसे लेते रहें। अब सिर से आरंभ करते हुए अपना ध्यान शरीर के एक एक अंग पर ले कर जाएँ और उस अंग को सजगता पूर्वक विश्राम में लाते हुए नीचे की ओर आते जाएँ और इस प्रकार पाँव तक पहुँचे। शवासन में तीन से पाँच मिनट या उससे भी अधिक समय तक बने रहें। यदि आपको इस आसन में नींद आने लगे तो साँस को थोड़ा तीव्र तथा अधिक गहरा कर लें। यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपना योग सत्र कम से कम 3 से 5 मिनट तक शवासन के साथ आरंभ करें। सत्र में विभिन्न आसन करते हुए बीच-बीच में शरीर तथा मन को विश्राम देने के लिए शवासन को दोहराते रहें और पूरे अभ्यास सत्र का समापन कम से कम 3 से 5 मिनट के एक और शवासन के साथ करें।

शवासन के लाभ

शवासन के अभ्यास से गहरे विश्राम और ध्यानपूर्ण अवस्था की प्राप्ति होती है, जो शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों (टिशूज़) के पुनर्निर्माण में सहायक होती है और तनाव को प्रभावी रूप से कम करती है। यह आसन योगाभ्यास के लाभों को शरीर के सूक्ष्म स्तर तक पहुँचाने का अवसर देता है, जिससे संपूर्ण पुनर्यौवन (rejuvenation) की स्थिति प्राप्त होती है। किसी भी योग सत्र का समापन करने के लिए शवासन सबसे उपयुक्त आसन माना जाता है, विशेष रूप से यदि योगाभ्यास तीव्र गति से किया गया हो। यह न केवल रक्तचाप, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक है, बल्कि शरीर को पृथ्वी तत्व से संतुलित करने और वात दोष (वायु तत्व के असंतुलन) को कम करने में भी प्रभावी भूमिका निभाता है।

योग करने के बाद शवासन करना क्यों जरूरी है..?

किसी भी तरह का योग करने के बाद शवासन करना आपके ओवरऑल बॉडी के लिए जरूरी है। योग करने के बाद शवासन, शरीर की रिकवरी प्रक्रिया है, जो आपके द्वारा योग के दौरान शरीर पर डाले गए सभी दबाव के बाद की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान आपका शरीर संतुलन में वापस आता है। जब आप किसी भी तरह की कसरत करते हैं तो आपके बॉडी पार्ट ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, और शवासन करने से वो वापस नॉर्मल हो जाते हैं। यह तक की आपके हार्मोन भी नॉर्मल हो जाते हैं। इसके अलावा, यह आरामदायक मुद्रा शरीर को अच्छा महसूस कराने वाले न्यूरोकेमिकल्स को भी बढ़ावा देती है, जो पूरे दिन आपके मूड को अच्छा रखने में मदद करती है।

योग के बाद शवासन करने के फायदे

शवासन के दौरान हमारा शरीर अन्य योगासनों के लाभों को पूरी तरह आत्मसात करने में सक्षम होता है। इस आसन के माध्यम से आप अपने शरीर के प्रत्येक हिस्से को जागरूक करते हैं, जिससे आपको गहरा आराम और मानसिक शांति मिलती है। यह शरीर को अभ्यास के दौरान उत्पन्न तनाव से उबरने का अवसर देता है और शरीर तथा मन को स्थिर एवं संतुलित करने में सहायक होता है। किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि, विशेष रूप से योग के बाद, शवासन करना बेहद आवश्यक है। यह न केवल शरीर को पूर्ण विश्राम देता है, बल्कि अन्य योगासनों से मिलने वाले लाभों को भी अधिक प्रभावी बनाता है। इसलिए, योगाभ्यास के बाद शवासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं। जानें योग करने के बाद शवासन क्यों जरूरी