आईआईएमसी की प्रोफेसर अनुभूति यादव की किताब ’मीडिया लिट्रेसी’ का विमोचन

आईआईएमसी की प्रोफेसर अनुभूति यादव की किताब ’मीडिया लिट्रेसी’ का सफ़लता पूर्वक हुआ विमोचन।

लखनऊ। वर्तमान मीडिया युग के दौर में सही खबरों का स्थान फेक न्यूज और अफवाहों ने बहुत तेजी से ले लिया है. इसी को मद्देनजर रखते हुए गलत खबरों को रोकने के लिए तमाम मीडिया संस्थानों द्वारा नए –२ प्रयोग किए जा रहे है. वही खासकर महामारी के दौर में फेक न्यूज ने काफी विकराल रूप धारण कर लिया है. वही सोमवार को आईआईएमसी की प्रोफेसर डॉ अनुभूति यादव की किताब ’ मीडिया लिट्रेसी ’ का सफलता पूर्वक विमोचन हुआ. इस मौके पर डा0 अनुभूति यादव ने बताया कि मीडिया लिटरेसी: कीज़ टू इंटरप्रेटिंग मीडिया मैसेजेस नामक पुस्तक में मीडिया और सूचना साक्षरता के क्षेत्र के अपने समृद्ध अनुभवों के साथ इस प्रिंट संस्करण को निकालने का फैसला किया, जब हम सभी गलत सूचना, दुष्प्रचार और विभिन्न प्रकार की अफवाहों से घिरे हैं। महामारी के दौरान दुनिया ने इंफोडेमिक से निपटने के लिए मीडिया और सूचना साक्षरता के महत्व को पहचाना है।

इस किताब में लेखक के तौर पर प्रो0 आर्ट सिल्वरब्लैट आर्ट सिल्वरब्लैट वेबस्टर यूनिवर्सिटी, सेंट लुइस, मिसौरी में मीडिया कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर एमेरिटस, प्रो. अनुभूति यादव, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में न्यू मीडिया के प्रोफेसर, भारत और डॉ. वेदव्यास कुंडू, गांधी स्मृति और दर्शन समिति के कार्यक्रम अधिकारी, भारत से वैश्विक एमआईएल समारोहों में एक योगदान है। यह भारतीय संस्करण डिजिटल इंटरनेशनल मीडिया लिटरेसी एजुकेशन प्रोजेक्ट (DIMLE) के तहत विकसित किया गया था।

तमाम मीडिया संस्थानों में कार्यरत के पत्रकारों ने बताया कि मीडिया लिटरेसी किताब मीडिया के छात्रों के अत्यंत उपयोगी साबित होगी. न्यू मीडिया व सोशल मीडिया के त्वरित सूचना प्रवाह में गलत खबरों की समस्त तरीकों से यह किताब रूबरू कराएगी.

पुस्तक के भाग एक में मीडिया पाठ के महत्वपूर्ण विश्लेषण के लिए एक सैद्धांतिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। भाग दो में छात्रों को इस पद्धतिगत ढांचे को विभिन्न प्रकार के मीडिया प्रारूपों में लागू करने का अवसर देता है: पत्रकारिता, विज्ञापन और राजनीतिक संचार। भाग तीन में मास मीडिया मुद्दों (मीडिया, मीडिया और बच्चों में हिंसा, मीडिया और सामाजिक परिवर्तन, और वैश्विक संचार) पर एक संक्षिप्त विचार शामिल है, साथ ही लोगों के अधिक मीडिया साक्षर होने के बाद संभावित परिणामों की चर्चा भी शामिल है।

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