सिख गुरु परम्परा का इतिहास वास्तविक भारत का इतिहास-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 400वें प्रकाश पर्व के अवसर परआयोजित सिख सभ्याचारक मेला एवं सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए।मध्यकालीन इतिहास सिख गुरुओं के त्याग एवं बलिदान के समावेश के बिना अधूरा।प्रधानमंत्री जी ने साहिबज़ादों की शहादत की याद में 26 दिसम्बर की तिथि को पूरे देश में ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की।सिख गुरुओं ने देश और धर्म की रक्षा अपने त्याग,बलिदान, शक्ति और भक्ति के माध्यम से की।सिख गुरु परम्परा का इतिहास वास्तविक भारत का इतिहास,प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से लाल किला, दिल्ली में गुरु तेगबहादुर जी महाराज के 400वें प्रकाश उत्सव का ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का सम्मान करना हमारे लिएगर्व की बात,अपने गौरवशाली अतीत एवं गुरु परम्परा को सम्मानित करना भारतीय परम्परा,सभी धर्माें के प्रति सम्मान एवं आदर का भाव होना हर भारतीय की निशानी।गुरु नानक देव जी महाराज ने एक संत के रूप मंे भक्तिके माध्यम से लोक कल्याण एवं जनजागरण का कार्य किया।जब देश और धर्म संकट में आया तो भक्ति को शक्तिपुंज बनाकर सिख गुरुओं ने अपने त्याग एवं बलिदान से एक नई गाथा निर्मित की।प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में काशी में भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम की स्थापना हुई।अपनी विरासत को अक्षुण्ण रखने और विकसित करने तथा आने वाली पीढ़ियों के पथ-प्रदर्शन के लिए हम सबको मिलकर कार्य करने होंगे।


लखनऊ। सिख गुरुओं के देश सेवा के कार्य हम सबको ऊर्जित एवं प्रेरित करते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री आवास में गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव के कार्यक्रम को आयोजित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा त्याग एवं बलिदान की सिख परम्परा को सम्मान देने के विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गयी। इसी क्रम में वर्ष 2020 एवं 2021 में साहिबज़ादा दिवस के कार्यक्रमों को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित किया गया।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 400वें प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित सिख सभ्याचारक मेला एवं सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिख गुरु परम्परा का इतिहास वास्तविक भारत का इतिहास है। भारत का मध्यकालीन इतिहास सिख गुरुओं के त्याग एवं बलिदान के समावेश के बिना अधूरा है। उस कालखण्ड में सिख गुरुओं ने देश और धर्म की रक्षा अपने त्याग, बलिदान, शक्ति और भक्ति के माध्यम से की थी।



श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का सम्मान करना हमारे लिए गर्व की बात है। सिख गुरुओं के त्याग एवं बलिदान ने भारत को भारत बनाने में योगदान दिया है। अपने गौरवशाली अतीत एवं गुरु परम्परा को सम्मानित करना भारतीय परम्परा है। सभी धर्माें के प्रति सम्मान एवं आदर का भाव होना हर भारतीय की निशानी है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह जी ने बैसाखी के अवसर पर ही खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसलिए वे अपने पहले कार्यकाल के प्रथम कार्यक्रम के तहत बैसाखी पर्व के अवसर पर याहियागंज स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। दूसरे कार्यकाल में भी वे इस वर्ष बैसाखी पर्व पर याहियागंज गुरुद्वारे में मत्था टेकने गये।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्र नरेन्द्र मोदी जी ने साहिबजादो की शहादत की याद में 26 दिसम्बर की तिथि को पूरे देश में ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के चारों सुपुत्रों की स्मृति को बनाए रखने और वर्तमान युवा पीढ़ी तथा देश की माताओं को देश और धर्म के प्रति अपने योगदान को स्मरण रखने के लिए प्रधानमंत्री जी की इस घोषणा एवं आह्वान के लिए उन्होंने अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विगत 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से लाल किला, दिल्ली में गुरु तेगबहादुर जी महाराज के 400वें प्रकाश उत्सव का ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अपने पूर्वजों को सम्मान देने का यह कार्य भारत की सच्ची तस्वीर है। प्रधानमंत्री जी द्वारा इस कार्यक्रम के माध्यम से देश और दुनिया को नई प्रेरणा प्रदान की गयी। पूरी दुनिया ने गुरु तेगबहादुर जी के त्याग एवं बलिदान को सुना एवं समझा।  


इतिहास कुछ कालखण्ड के लिए झुठलाया जा सकता है, लेकिन इतिहास अपनी सच्चाई अवश्य रखता है। भारतीय परम्परा के लिए सिख गुरुओं का त्याग एवं बलिदान सच्चा इतिहास है और सिख परम्परा के समक्ष पूरी दुनिया नतमस्तक हुई है। हम सभी को इतिहास की घटनाओं से सीख लेनी होगी। गुरु नानक देव जी महाराज ने एक संत के रूप मंे भक्ति के माध्यम से लोक कल्याण एवं जनजागरण का कार्य किया था। उन्होंने कहा कि जब देश और धर्म संकट में आया तो भक्ति को शक्तिपुंज बनाकर सिख गुरुओं ने अपने त्याग एवं बलिदान से एक नई गाथा निर्मित की। इस पवित्र गाथा का आज पूरा देश और दुनिया स्मरण कर रही है। सिख गुरुओं के प्रति आस्था एवं सम्मान का भाव प्रत्येक भारतीय का नैतिक कर्तव्य है। आपसी भाईचारे एवं सौहार्द को बनाए रखते हुए हमे निरन्तर विकास पथ पर अग्रसर रहना होगा।प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में काशी में भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम की स्थापना हुई है। काशी विश्वनाथ मन्दिर को स्वर्णमण्डित करने का कार्य महाराजा रणजीत सिंह ने किया था। लखनऊ के याहियागंज गुरुद्वारा को गुरु तेगबहादुर जी की कृपा प्राप्त हुई थी तथा गुरु गोविन्द सिंह जी ने अपने बचपन के 02 माह लखनऊ में ही व्यतीत किये थे।  


मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं ने सर्वधर्मसम्भाव की परम्परा को विकसित करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि अपनी विरासत को अक्षुण्ण रखने और विकसित करने तथा आने वाली पीढ़ियों के पथ-प्रदर्शन के लिए हम सबको मिलकर कार्य करने होंगे। गुरु परम्परा एवं चार साहिबजादों जी के कार्यक्रमों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। सिख गुरुओं के त्याग और बलिदान तथा आजादी की लड़ाई में उनके योगदान की प्रेरणा हेतु स्कूल और कॉलेजों में विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित किया जाना चाहिए। इससे समाज को गुमराह करने वाले स्वयं बेनकाब एवं परास्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि याहियागंज गुरुद्वारा और अन्य कार्यक्रमों को गति प्रदान करने हेतु जिला प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर एक ठोस कार्ययोजना बनाएं, जिससे आने वाली पीढ़ी को हम लोग एक प्रेरणा स्थल प्रदान कर सकें।इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए विभिन्न महानुभाव को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह ओलख, लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया, एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, पर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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