हाईकोर्ट ने क्षतिपूर्ति की वसूली हेतु नोटिस पर लगाई रोक

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिनांक 20 सितंबर, 2022 को सीएए/एनआरसी के विरुद्ध 19 दिसंबर, 2019 को लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान हिंसा/तोड़फोड़ के लिए एस आर दारापुरी को क्षतिपूर्ति की वसूली हेतु कलेमस ट्राइब्यूनल, लखनऊ द्वारा दिनांक 16/2/2022 को जारी नोटस पर रोक लगा दी है। एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट को ट्राइब्यूनल द्वारा जो नोटिस भेजा गया था उस पर दारापुरी ने क्लेम/क्लेम एप्लीकेशन की प्रतिलिपि मांगी थी जैसाकि क्षतिपूर्ति एक्ट- 2020 की धारा 9 में प्रावधानित है। परंतु ट्राइब्यूनल ने उनके इस आवेदन को दिनांक 14/7/2022 को रद्द करके अग्रिम कार्रवाही करने का आदेश पारित कर दिया था।

दारापुरी ने ट्राइब्यूनल के 14/7/2022 के आदेश को अवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने/ रोक लगाने हेतु हाई कोर्ट में रिट याचिका संख्या 6502/2022 दाखिल की थी जिस पर हाई कोर्ट ने स्टे आर्डर पारित किया है। इस रिट याचिका की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट नितिन कुमार मिश्रा तथा कमलेश कुमार सिंह द्वारा की गई।

यह ज्ञातव्य है कि इससे पहले एडीएम लखनऊ द्वारा जनवरी 2020 में दारापुरी को 64 लाख 37 हजार की क्षतिपूर्ति का नोटिस भेजा गया था जिसके विरुद्ध उन्होंने स्टे के लिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी जो अभी तक लंबित है। परंतु इसी बीच दिनांक 18 फरवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की वसूली को अवैधानिक मानते हुए सभी नोटिस रद्द कर दिए थे।अब उत्तर प्रदेश सरकार ने क्षतिपूति एक्ट 2020 के अंतर्गत नए सिरे से वसूली हेतु नोटिस जारी की हैं परंतु इसमें भी इस एक्ट के प्रावधानों का अनुपालन न करके जोर जबरदस्ती की जा रही है। ऐसा लगता है कि योगी सरकार का मुख्य ध्येय अपने विरोधियों को किसी न किसी तरह उलझा कर रखना और परेशान करना है।

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